मध्यपूर्व संघर्ष से सहमा शेयर बाजार, सेंसेक्स 1,048 अंक टूटा; निवेशकों के 7 लाख करोड़ रुपए डूबे
मुंबई, 2 मार्च (आईएएनएस)। इजरायल-ईरान युद्ध के चलते भारतीय शेयर बाजार सोमवार के कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,048.34 अंक या 1.29 प्रतिशत की गिरावट के साथ 80,238.85 और निफ्टी 312.95 अंक या 1.24 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,865.70 पर था।
बड़ी गिरावट के चलते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का मार्केटकैप 7 लाख करोड़ रुपए कम होकर 456 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो कि शुक्रवार को 463 लाख करोड़ रुपए था।
सूचकांकों में निफ्टी इन्फ्रा (2.23 प्रतिशत), निफ्टी ऑटो (2.20 प्रतिशत), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (2.15 प्रतिशत), निफ्टी ऑयल एंड गैस (2.15 प्रतिशत), निफ्टी पीएसयू (1.84 प्रतिशत), निफ्टी मीडिया (1.82 प्रतिशत), निफ्टी रियल्टी (1.61 प्रतिशत) और निफ्टी एनर्जी (1.61 प्रतिशत) की गिरावट के साथ बंद हुआ।
दूसरी तरफ निफ्टी इंडिया डिफेंस (0.49 प्रतिशत), निफ्टी मेटल (0.24 प्रतिशत) और निफ्टी फार्मा (0.02 प्रतिशत) ही बढ़ने वाले इंडेक्स थे।
सेंसेक्स पैक में बीईएल, सन फार्मा और आईटीसी गेनर्स थे। इंडिगो, एलएंडटी, मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स, बजाज फिनसर्व, एमएंडएम, बजाज फाइनेंस, एचसीएल टेक, ट्रेंट, इटरनल, टाइटन, अल्ट्राटेक सीमेंट, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, एसबीआई और एक्सिस बैंक लूजर्स थे।
लार्जकैप के साथ स्मॉलकैप और मिडकैप में भी गिरावट देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 935.10 अंक या 1.58 प्रतिशत की गिरावट के साथ 58,180.50 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 296.50 अंक या 1.75 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 16,632 .40 पर था।
एलकेपी सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक दे ने कहा, मध्यपूर्व में तनावपूर्ण हालातों के चलते निफ्टी की कमजोर शुरुआत हुई थी। दैनिक टाइमफ्रेम पर सूचकांक बढ़ती ट्रेंडलाइन से नीचे फिसल गया है, जो बाजार में बढ़ती कमजोरी का संकेत है। आरएसआई अभी भी मंदी के क्रॉसओवर में है, जो कमजोर गति की पुष्टि करता है।
उन्होंने आगे कहा कि निफ्टी के लिए सपोर्ट 24,600 है। अगर यह इससे नीचे फिसलता है तो बाजार में गिरावट बढ़ सकती है। बाजार के लिए रुकावट का स्तर 25,000 है।
--आईएएनएस
एबीएस/
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एक्सप्लेनर: ईरान युद्ध के बीच क्यों हो रही 'होर्मुज जलडमरूमध्य' की चर्चा? क्या है यह और क्यों दुनिया के तेल व्यापार के लिए माना जा रहा बेहद अहम?
नई दिल्ली, 2 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर बड़े हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। जवाब में ईरान ने इजरायल पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए और बहरीन, कुवैत व कतर में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया। जैसे-जैसे संघर्ष बढ़ा, दुनिया की नजर एक संकरे समुद्री रास्ते होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) पर टिक गई, जहां से गुजरने वाले तेल और गैस के जहाजों की आवाजाही लगभग थम गई है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री मार्ग है। यह उत्तर में फारस की खाड़ी को दक्षिण में ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है।
अपने सबसे संकरे हिस्से में यह केवल लगभग 33 किलोमीटर चौड़ा है, जबकि तेल टैंकरों के लिए निर्धारित शिपिंग लेन महज 3-3 किलोमीटर चौड़ी हैं। भले ही यह ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जल में आता है, लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता है, जहां से वैश्विक जहाजरानी को गुजरने की अनुमति है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), जहां दुबई स्थित है, भी इसी मार्ग के पास पड़ता है।
अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद बढ़े तनाव के चलते ईरान ने इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी दी है। इसके कारण तेल और गैस के जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ जहाज इस मार्ग से बाहर निकलते दिखे, लेकिन नए जहाज अंदर प्रवेश करते नजर नहीं आए।
ओमान के उत्तरी तट के पास एक छोटे तेल टैंकर पर हमला भी हुआ, जिसे पहले अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित बताया गया था। हालांकि हमला किसने किया, यह स्पष्ट नहीं है। इन घटनाओं ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है।
प्राचीन समय में भी यह व्यापार का प्रमुख मार्ग था। चीन से रेशम, चीनी मिट्टी के बर्तन, हाथीदांत और कपड़े इसी रास्ते से पश्चिमी देशों तक पहुंचते थे।
आधुनिक दौर में यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारों में से एक बन चुका है। सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, कतर, बहरीन और यूएई से निकलने वाले कच्चे तेल और एलएनजी के विशाल टैंकर इसी रास्ते से गुजरते हैं।
ऊर्जा की इस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा एशियाई देशों, खासकर चीन, तक जाता है। हालांकि सऊदी अरब और यूएई के पास कुछ पाइपलाइन विकल्प मौजूद हैं, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक अधिकांश तेल आपूर्ति के लिए इस जलडमरूमध्य का कोई ठोस विकल्प नहीं है।
दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है। औसतन हर दिन 2 करोड़ बैरल से अधिक कच्चा तेल और ईंधन यहां से भेजा जाता है। कतर, जो दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी निर्यातकों में शामिल है, अपनी लगभग पूरी गैस आपूर्ति इसी मार्ग से करता है।
अगर यहां कोई भी बाधा आती है, तो वैश्विक तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इससे पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं और दुनिया भर में महंगाई पर असर पड़ सकता है, खासकर एशियाई देशों पर।
होर्मुज जलडमरूमध्य कई बार भू-राजनीतिक तनाव का केंद्र रहा है। 1973 के अरब-इजरायल युद्ध के दौरान तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया था। 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध में दोनों देशों ने एक-दूसरे के तेल टैंकरों को निशाना बनाया, जिसे टैंकर वॉर कहा गया।
2012 में ईरान ने पश्चिमी प्रतिबंधों के जवाब में इस मार्ग को बंद करने की धमकी दी थी। 2019 में यूएई के तट के पास कई टैंकरों पर हमले हुए। हाल के वर्षों में भी ईरान ने कुछ जहाजों को जब्त किया था।
इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिकी नौसेना की पांचवीं फ्लीट के पास है, जिसका मुख्यालय बहरीन में है। हालांकि, सीधे युद्ध जैसे हालात में मजबूत सैन्य मौजूदगी भी पूरी तरह जोखिम खत्म नहीं कर सकती।
यदि होर्मुज जलडमरूमध्य अस्थायी रूप से भी बंद हो जाता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ेगा। तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है, शिपिंग बीमा महंगा हो सकता है और ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों, खासतौर पर एशिया, पर भारी दबाव पड़ेगा।
इसी वजह से जैसे-जैसे ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव बढ़ रहा है, पूरी दुनिया की नजर इस अहम समुद्री मार्ग पर टिकी हुई है। यह सिर्फ एक जलडमरूमध्य नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कन है।
--आईएएनएस
डीबीपी/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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