चौथे T20I में New Zealand पर 5-0 से Clean Sweep का लक्ष्य Tilak Varma ने रखा
ऑकलैंड के ईडन पार्क में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ चौथे T20 इंटरनेशनल मैच से पहले, भारतीय बल्लेबाज़ तिलक वर्मा ने डेथ ओवरों में सटीक यॉर्कर डालने और अच्छी गेंदबाज़ी करने के महत्व पर ज़ोर दिया है। भारत पहले ही T20I सीरीज़ जीत चुका है और अब आखिरी मैच में क्लीन स्वीप करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। वर्मा ने बताया कि ईडन पार्क के मैदान का आकार, खासकर सीधी बाउंड्री (स्ट्रेट बाउंड्री), काफी छोटा है, जिससे उस तरफ रन बनाना आसान हो जाता है। उन्होंने कहा कि पिछले दो मैचों में छोटी साइड बाउंड्री का खेल पर काफी असर पड़ा था, और इन हालात में प्रभावी गेंदबाज़ी करना एक बड़ी चुनौती है।
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एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, वर्मा ने हाल के मैचों में गेंदबाजी यूनिट के प्रदर्शन की तारीफ की। उन्होंने कहा कि पिछले दो मैचों में, एक गेंदबाजी यूनिट के तौर पर हमने बहुत अच्छी गेंदबाजी की है, खासकर डेथ ओवरों और बीच के ओवरों में। अगर आप खास तौर पर प्रिंस यादव को देखें, तो जिस तरह से वह टीम की जरूरत के समय - खासकर डेथ ओवरों में - यॉर्कर डाल रहे हैं, वह हमारे लिए एक सकारात्मक संकेत है।
उन्होंने पहले मैच में 225 रन लुटाने के बाद टीम में आए सुधारों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे टीम ने अगले मैचों में न्यूजीलैंड को 180 और 198 रनों पर रोक दिया, और भारत ने इन दोनों ही लक्ष्यों को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया। ईडन पार्क की पिच और बाउंड्री की स्थितियों के बारे में वर्मा ने कहा कि मुझे लगता है कि अगले कुछ मैचों में भी... पिछले मैच में स्क्वायर बाउंड्री काफी छोटी थीं, और मैंने सुना है कि इस मैच में स्ट्रेट बाउंड्री भी छोटी है—मैं यहाँ कभी खेला तो नहीं हूँ, लेकिन मैंने ऐसा ही सुना है। इसलिए, डेथ ओवरों में गेंदबाजी करना और यॉर्कर का सही इस्तेमाल करना बहुत अहम होगा। हम इस मामले में अच्छा कर रहे हैं।
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आगे की ओर देखते हुए, वर्मा ने सीरीज में 'क्लीन स्वीप' (सभी मैच जीतने) को लेकर उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि हम अभी 3-0 से आगे हैं, इसलिए हमारे पास क्लीन स्वीप करने का एक शानदार मौका है। अभी दो मैच बचे हैं, और हम एक-एक करके उन पर ध्यान देंगे। हमारा पहला लक्ष्य अगला मैच जीतना है, ताकि (न्यूजीलैंड में मौजूद) भारतीय दर्शकों को आखिरी मैच में 5-0 से सीरीज जीतने का शानदार नजारा देखने का मौका मिल सके।
Bhakosa Recipe: Breakfast में Fast Food छोड़ बनाएं Bhakosa, भाप में पकी दाल और मसालों से मिलेगा गजब स्वाद
आज के आधुनिक दौर में फास्ट फूड बर्गर, पिज्जा और मोमोज जैसे फूड ने लोगों की जुबान और रसोई पर कब्जा जमा लिया है। लेकिन इस सब के बीच धीरे-धीरे हमारी पारंपरिक डिश कहीं पीछे छूटती जा रही है। हालांकि एक दौर ऐसा था, जब उत्तर प्रदेश के गांवों में घरों में बनने वाला भकोसा हर किसी का पसंदीदा नाश्ता हुआ करता था। लेकिन समय के साथ-साथ यह स्वादिष्ट, लजीज और सेहतमंद डिश गायब होने के कगार पर पहुंच चुकी है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको उत्तर प्रदेश के इस पारंपरिक डिश की खासियत और बनाने के तरीके के बारे में बताने जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश का पारंपरिक भकोसा
भकोसा उत्तर प्रदेश का पारंपरिक व्यंजन है। हालांकि यह देखने में दक्षिण भारत के मोमोज या फिर फरा जैसा लगता है। लेकिन इसका स्वाद और बनाने का तरीका थोड़ा अलग होता है। इसको मुख्य रूप से गेहूं के आटे या फिर चने के दाल से बनाकर तैयार किया जाता है। इसको पकाने के लिए तेल या घी का न के बराबर इस्तेमाल किया जाता है। जिससे यह स्वाद में स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है।
क्या है भकोसा बनाने की विधि
भकोसा बनाने का प्रोसेस काफी आसान है। इसके लिए सबसे पहले गेहूं के आटे को गूंथकर उसकी छोटी-छोटी पूरियां या फिर रोटियों के जैसी लोई बनाएं। फिर चले की दाल को रातभर के लिए भिगोकर पीस लें। इसमें हरी मिर्च, अदरक, हींग, लहसुन और मसालों का भरपूर इस्तेमाल किया जाता है।
इसके बाद पिसी हुई मसालेदार दाल को आटे की पूरियों के अंदर भरकर आधे चांद के आकार में मोड़ दें। फिर इसको तेल की जगह पानी की भाप या फिर स्टीम में पकाया जाता है। फिर इसको कई छोटे टुकड़ों में काटकर करी पत्ता, राई और हरी मिर्च से तड़का लगाएं।
जानिए भकोसा डिश की खासियत
इसका पारंपरिक डिश सिर्फ स्वाद ही नहीं बल्कि कई गुणों से भरपूर होती है। इसमें ज्यादा तेल का इस्तेमाल नहीं होता है, जिस कारण यह पेट के लिए बेहद हल्की और आसानी से पचने वाली डिश है। गेहूं का आटा फाइबर और चने की दाल प्रोटीन का बेहतरीन स्त्रोत होता है। जोकि बुजुर्गों और बच्चों दोनों के लिए फायदेमंद होता है। वहीं लहसुन, हींग और मसालों का तड़का इसके स्वाद को दोगुना कर देता है। इसको हरी धनिया की चटनी के साथ खाने का एक अलग ही मजा होता है।
संस्कृति और यादों से जुड़ा है भकोसे का रिश्ता
यह सिर्फ एक व्यंजन नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की ग्रामीण संस्कृति और पुरानी यादों का एक अहम हिस्सा है। सर्दियों में जब भी कुछ हल्का और स्वादिष्ट खाने का मन करता था, तो दादी और मां मिलकर इस व्यंजन को बनाकर तैयार करती थीं। वहीं आज के दौरान में लोग अनहेल्दी फास्टफूड की तरह भागते हैं।
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