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Kerala rainfall: 5 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी, मूसलाधार बारिश से जीवन अस्त-व्यस्त

तिरुवनंतपुरम, पांच अगस्त केरल के कई हिस्सों में बुधवार को मूसलाधार बारिश जारी रही, जिससे बड़े पैमाने पर जलभराव हो गया और सड़कें जलमग्न हो गईं। अधिकारियों ने बताया कि और अधिक राहत शिविर खोले गए हैं तथा निचले इलाकों के निवासियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। पत्तनमथिट्ठा, अलाप्पुझा और कोट्टयम के दक्षिणी जिलों में बारिश का कहर जारी रहा, जहां लगातार हो रही बौछारों के कारण सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।

इन जिलों के कई जलमग्न इलाकों में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को घुटने तक भरे पानी से होकर जाते देखा गया। कई निचले इलाकों में बाढ़ का पानी भरा रहने और कई घरों में पानी जमा रहने के कारण और भी अधिक निवासियों को राहत शिविरों में ले जाया गया। अधिकारियों ने कहा कि भारी बारिश जारी रहने के मद्देनजर सुरक्षित निकाले गए लोगों को ठहराने के लिए अतिरिक्त राहत शिविर बनाए गए हैं।

कोझिकोड और कन्नूर के उच्च पहाड़ी इलाकों सहित उत्तरी जिलों के कई हिस्सों में भी व्यापक वर्षा दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने केरल के पांच जिलों में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी देते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस) ने राज्य के दक्षिणी तट के कुछ हिस्सों में ऊंची लहरें उठने और तटवर्ती इलाकों में समुद्र का पानी घुसने की चेतावनी दी है। आईएमडी ने पत्तनमथिट्ठा, कोट्टयम, इडुक्की, कन्नूर और कासरगोड जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

मौसम विभाग ने कहा कि बृहस्पतिवार को यह अलर्ट पत्तनमथिट्ठा, अलाप्पुझा, कोट्टयम, इडुक्की, एर्नाकुलम, कन्नूर और कासरगोड जिलों के लिए लागू रहेगा। आईएमडी ने बताया कि शुक्रवार के लिए मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मौसम एजेंसी के अनुसार, राज्य में कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है, जबकि छह और सात अगस्त को चुनिंदा स्थानों पर बहुत भारी बारिश होने की उम्मीद है।

आईएनसीओआईएस ने कल्लाक्कडाल नामक समुद्री स्थिति को लेकर चेतावनी जारी की है, जिसमें समुद्र में अचानक ऊंची और उग्र लहरें उठती हैं, जिससे तटीय इलाकों में बाढ़ आ सकती है। कल्लाक्कडाल समुद्र की एक ऐसी स्थिति है जिसमें बिना किसी स्थानीय तूफान या हवा के अचानक समुद्र में बहुत ऊंची और उग्र लहरें उठने लगती हैं और तटों पर बाढ़ आ जाती है। यह चेतावनी तिरुवनंतपुरम जिले में कप्पिल से पोझियूर, कोल्लम जिले में अलप्पड से एडवा, और अलाप्पुझा जिले में चेल्लानम से अझिक्कल जेट्टी तक के तटीय पट्टी के लिए जारी की गई है।

आईएनसीओआईएस ने बृहस्पतिवार दोपहर 2.30 बजे तक कन्याकुमारी तट पर 1.2 मीटर से 1.6 मीटर तक ऊंची लहरें उठने और समुद्र के पानी के अंदरूनी इलाकों में प्रवेश करने की चेतावनी दी है। अधिकारियों ने मछुआरों, तटीय निवासियों और आम जनता को सतर्क रहने तथा चेतावनी की अवधि के दौरान संवेदनशील तटीय क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी है। इन चेतावनियों के मद्देनजर, केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (केएसडीएमए) ने मछुआरों और तटीय निवासियों को सतर्क रहने, आईएनसीओआईएस की चेतावनी वापस लिये जाने तक समुद्र तटों तथा पर्यटन गतिविधियों से दूर रहने और संभावित रूप से तटों की मिट्टी बहने के प्रति सावधानी बरतने की सलाह दी है।

लगातार हो रही बारिश के बीच, केएसडीएमए ने भूस्खलन, पहाड़ों से मलबे एवं कीचड़ के बहाव और अचानक आने वाली बाढ़ के प्रति संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों से दिन के समय सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। प्राधिकरण ने बाढ़ की आशंका वाले निचले इलाकों के निवासियों को स्थानीय स्थिति का आकलन करने के बाद राहत शिविरों में जाने की सलाह भी दी है। लोगों को भारी बारिश के दौरान नहाने, मछली पकड़ने या किसी अन्य उद्देश्य से नदियों और अन्य जल स्रोतों में न जाने की सलाह दी गई है।

आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने जनता से अपील की है कि तेज बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम की चेतावनी वापस लिये जाने तक झरनों, जलाशयों और पहाड़ी पर्यटन स्थलों पर जाने से बचें। प्राधिकरण ने वाहन चालकों को पानी के स्रोतों के पास की सड़कों और मरम्मत के काम से गुजरने वाले रास्तों पर यात्रा करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी है, क्योंकि भारी बारिश के दौरान दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे नजारों को देखने या सेल्फी लेने के लिए नदियों या जल निकायों के ऊपर बने पुलों पर इकट्ठा न हों, जबकि पहाड़ी इलाकों में रात के समय यात्रा करने से बचना चाहिए।

प्राधिकरण ने तेज हवाओं के कारण उखड़े पेड़ों और क्षतिग्रस्त बिजली के खंभों से होने वाले हादसों के प्रति भी चेतावनी दी है। भारी बारिश के कारण इडुक्की और कोट्टायम समेत बारिश से प्रभावित 10 जिलों के शैक्षणिक संस्थान बुधवार को बंद रहे।

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Tarun Tejpal यौन उत्पीड़न मामले में Goa सरकार की अपील पर फैसला बृहस्पतिवार को सुनाएगा हाई कोर्ट

पणजी, पांच अगस्त बंबई उच्च न्यायालय ने तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को बृहस्पतिवार सुबह मौजूद रहने का निर्देश दिया है, क्योंकि अदालत 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में उन्हें बरी किए जाने के खिलाफ गोवा सरकार की अपील पर अपना फैसला सुनाएगी। न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जामसांडेकर की पीठ ने दोनों पक्षों की ओर से विस्तृत दलीलें सुनने के बाद पिछले सप्ताह फैसला सुरक्षित रख लिया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बरी किए जाने के फैसले को रद्द करने की अनुरोध वाली राज्य सरकार की अपील पर दलीलें पेश की थीं, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने तेजपाल का पक्ष रखा था।

यह मामला एक पूर्व कनिष्ठ सहयोगी के आरोपों से जुड़ा है, जिसमें उसने दावा किया था कि नवंबर 2013 में गोवा में ‘थिंकफेस्ट’ कार्यक्रम के दौरान एक होटल की लिफ्ट में तेजपाल ने उसका यौन उत्पीड़न किया था। निचली अदालत द्वारा तेजपाल को बरी किए जाने के बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने पिछले सप्ताह भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और तेजपाल के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।

तुषार मेहता ने राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखा। मेहता ने दलील दी कि सत्र अदालत ने यौन उत्पीड़न पीड़िता के व्यवहार को लेकर पहले से बनी धारणाओं के आधार पर शिकायतकर्ता के आचरण का आकलन कर गंभीर गलती की। सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि किसी यौन उत्पीड़न पीड़िता की प्रतिक्रिया को लेकर कोई सार्वभौमिक मानक नहीं हो सकता, क्योंकि यह व्यक्ति की शिक्षा, व्यक्तित्व, सामाजिक पृष्ठभूमि और परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।

उन्होंने यह भी कहा था कि निचली अदालत ने शिकायतकर्ता के बयानों में मामूली विरोधाभासों को जरूरत से ज्यादा तवज्जो दी, जबकि यह जांचना चाहिए था कि उसके मुख्य आरोपों में निरंतरता बनी रही या नहीं। बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि अभियोजन ने तेजपाल के माफी वाले ईमेल को यौन संबंध की स्वीकारोक्ति के रूप में गलत तरीके से पेश किया। उन्होंने शिकायतकर्ता की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कथित घटना से पहले और बाद में उसका व्यवहार, ईमेल, व्हाट्सऐप संदेश और दस्तावेजी रिकॉर्ड अभियोजन के मामले के विपरीत हैं।

बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि चलती लिफ्ट में शिकायतकर्ता को कैद रखे जाने का उसका बयान विशेषज्ञ साक्ष्य और सीसीटीवी फुटेज से मेल नहीं खाता।

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  Sports

BCCI Fitness Crackdown: अब Senior Players को नहीं मिलेगी छूट, CoE ने तय किए पारदर्शी Fitness Standards

भारतीय क्रिकेट टीम में पिछले कुछ समय से खिलाड़ियों के बार-बार चोटिल होने की घटनाओं ने बीसीसीआई की चिंता बढ़ा दी है। इसी को देखते हुए बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की चिकित्सा और फिटनेस टीम अब पूरी फिटनेस प्रणाली में बदलाव की तैयारी कर रही है। उद्देश्य यह है कि सभी खिलाड़ियों के लिए एक समान आधार मानक तय किए जाएं और फिटनेस जांच की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और पारदर्शी बनाया जाए।

मौजूद जानकारी के अनुसार, पिछले एक वर्ष के दौरान भारतीय टीम की फिटनेस जांच प्रणाली में बदलाव किया गया था। जब एड्रियन लेरू ने सोहम देसाई की जगह ताकत और शारीरिक तैयारी प्रशिक्षक का जिम्मा संभाला, तब खिलाड़ियों की फिटनेस जांच के लिए पहले इस्तेमाल होने वाली यो-यो परीक्षा की जगह ब्रोंको परीक्षा को प्राथमिकता दी गई। हालांकि इस नई प्रणाली के लिए कोई तय आधार मानक नहीं होने से अलग-अलग खिलाड़ियों के लिए अलग-अलग स्तर अपनाए गए, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई।

बता दें कि अब उत्कृष्टता केंद्र ने ब्रोंको परीक्षा के लिए पांच मिनट पंद्रह सेकंड से पांच मिनट बीस सेकंड के बीच का समय आधार मानक के रूप में तय करने की तैयारी की है। इसके अलावा दो किलोमीटर दौड़ पूरी करने के लिए नौ से दस मिनट का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। इससे पहले यो-यो परीक्षा में 16.5 अंक को न्यूनतम स्तर माना जाता था।

गौरतलब है कि हाल ही में आयरलैंड और इंग्लैंड के सीमित ओवरों के दौरे के बाद फिटनेस व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे। मौजूद जानकारी के अनुसार, बीसीसीआई के चिकित्सा विभाग और भारतीय टीम के सहयोगी स्टाफ के बीच तालमेल की कमी भी सामने आई। बताया जा रहा है कि कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों को अपेक्षाकृत आसान लक्ष्य देकर फिट घोषित किया गया, जबकि कुछ खिलाड़ियों को टीम प्रबंधन की जरूरतों को देखते हुए समय से पहले मंजूरी दी गई।

इसी बीच भारतीय टीम के फिजियो कमलेश जैन से भी लगातार बढ़ रही चोटों और खिलाड़ियों की फिटनेस में गिरावट को लेकर जवाब मांगा गया है। टीम प्रबंधन का मानना है कि खिलाड़ियों की मैदान पर फुर्ती पहले जैसी नहीं रही है। कई वरिष्ठ बल्लेबाज लंबे समय तक बल्लेबाजी करने के दौरान विकेटों के बीच तेजी से दौड़ने में संघर्ष कर रहे हैं, जबकि क्षेत्ररक्षण में भी कुछ खिलाड़ियों की गति चिंता का विषय बनी हुई है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज भी हाल ही में श्रीलंका दौरे से पहले उत्कृष्टता केंद्र में अचानक कराई गई फिटनेस जांच से हैरान रह गए थे, क्योंकि उन्हें नए मानकों की पूरी जानकारी पहले से नहीं थी। अब केंद्रीय अनुबंध वाले खिलाड़ियों को इन नए मानकों की जानकारी दी जा रही है, ताकि सभी एक जैसी तैयारी कर सकें।

बता दें कि जसप्रीत बुमराह का मामला भी चर्चा में रहा। चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन को भरोसा दिलाया गया था कि वह श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट तक पूरी तरह फिट हो जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। वहीं हर्षित राणा को लेकर भी सवाल उठे। उन्हें घुटने की चोट से उबरने के बाद टीम में शामिल किया गया, लेकिन बाद में इंग्लैंड दौरे के दौरान उन्हें वापस उत्कृष्टता केंद्र भेजना पड़ा। शुरुआत में चोट की आशंका जताई गई, जबकि बाद में बताया गया कि उन्हें गंभीर ऐंठन हुई थी और उनका वजन तय सीमा से अधिक था।

गौरतलब है कि वर्ष 2023 के एकदिवसीय विश्व कप, 2024 के टी20 विश्व कप और 2025 की चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान भारतीय टीम ने चोट प्रबंधन की बेहतर व्यवस्था के कारण लगभग सभी प्रमुख खिलाड़ियों की उपलब्धता सुनिश्चित की थी। केवल हार्दिक पंड्या को विश्व कप के दौरान टखने में चोट लगी थी। अब माना जा रहा है कि मौजूदा फिटनेस प्रणाली में चोट से बचाव की बजाय कठिन अभ्यास पर अधिक जोर दिया जा रहा है। ऐसे में बीसीसीआई का प्रयास है कि फिटनेस कार्यक्रम को संतुलित बनाया जाए, जिससे खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन के साथ लंबे समय तक पूरी तरह स्वस्थ भी रह सकें।
Thu, 06 Aug 2026 20:05:40 +0530

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