MLC Election पर PM Modi के तंज का जवाब, Congress ने पूछा- नागपुर और वाराणसी पर चुप्पी क्यों?
बुधवार को कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर पलटवार किया, जिसमें उन्होंने विधान परिषद चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन पर तंज कसा था। कांग्रेस ने नागपुर और वाराणसी में विपक्ष की जीत का हवाला देते हुए भाजपा के चुनावी दबदबे के दावों पर सवाल उठाए। यह पलटवार तब आया जब प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में हुए विधान परिषद (MLC) चुनावों में कांग्रेस के एक भी सीट न जीत पाने पर तंज कसा था, जबकि इन चुनावों में मतदान बैलेट पेपर के जरिए हुआ था।
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प्रधानमंत्री ने बुधवार को 'X' पर पोस्ट किया, "4 बड़े राज्यों - उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक - में 28 सीटों पर MLC चुनाव हुए। ये चुनाव बैलेट पेपर के जरिए कराए गए। अंदाजा लगाइए कि कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं?" उन्होंने विपक्ष की ओर से फिर से बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग के बीच, कांग्रेस के खराब प्रदर्शन को उजागर किया। वहीं, कांग्रेस ने अपना ध्यान BJP को मिली हार की ओर मोड़ने की कोशिश की। इसमें खास तौर पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का गृह नगर नागपुर, और प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी शामिल हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने प्रधानमंत्री के बयानों पर सवाल उठाते हुए वाराणसी में हुए 2024 लोकसभा चुनाव का जिक्र किया, जहां मोदी कम अंतर से जीते थे। श्रीनेत ने कहा कि प्रधानमंत्री मतपत्रों (बैलेट पेपर) की बात कर रहे हैं। पहले उन्हें यह बताना चाहिए कि जब चुनाव पेपर बैलेट से होते थे, तब वे अपने ही संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कैसे हार गए थे?" उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री पिछला चुनाव एक साजिश के जरिए जीते थे। उन्होंने आगे कहा कि मैं प्रधानमंत्री से कहना चाहती हूं कि वाराणसी जाने की गलती न करें, वरना आप हार जाएंगे।
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कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने भी प्रधानमंत्री मोदी को चुनौती दी कि वे भविष्य के चुनावों में पेपर बैलेट की मांग का समर्थन करें। खेड़ा ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री को पेपर बैलेट पर इतना ही भरोसा है कि वे इसका समर्थन कर रहे हैं, तो यही तो हमारी भी मांग है। इसलिए, आने वाले सभी चुनाव पेपर बैलेट से होने चाहिए। साथ ही, उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बयानों में वाराणसी के नतीजों का जिक्र क्यों नहीं किया।
Kiren Rijiju ने Naseeruddin Shah को बताया खतरनाक शहरी दिमागी नक्सली
(फाइल फोटो के साथ) नयी दिल्ली, 29 अक्टूबर केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने नसीरुद्दीन शाह को एक ‘खतरनाक शहरी दिमागी नक्सली’ करार देते हुए कहा है कि उनके विचार भारतीय लोकतंत्र के लिए ‘बेहद हानिकारक’ हैं। शाह ने एक वीडियो पोस्ट करके केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को नष्ट करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रीजीजू ने बुधवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि वह शाह का सम्मान करते थे, लेकिन उन्हें शाह के ‘असली चरित्र’ के बारे में बहुत देर से पता चला।
मंगलवार को फेसबुक पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में, काफी गुस्से में दिख रहे शाह ने जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ को बहाल करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का समर्थन किया। उन्होंने खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताया। उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने और ‘देश के युवाओं का हौसला’ तोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ लिखी एक पिन भी लगा रखी थी, जिसे उन्होंने कैमरे के सामने दिखाया। रीजीजू ने अभिनेता की आलोचना करते हुए कहा, ‘‘मुझे लगा था कि नसीरुद्दीन शाह बस एक अभिनेता हैं। मैं उनका सम्मान करता था और उन्हें पसंद भी करता था... मुझे कभी पता नहीं था कि वह एक खतरनाक ‘शहरी दिमागी नक्सली’ हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे उनके असली चरित्र के बारे में बहुत देर से पता चला।
(उनके विचार) भारत के लोकतंत्र के लिए बेहद हानिकारक हैं।’’ दिमागी नक्सल शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में किया था। उन्होंने ‘दिमागी नक्सलियों’ को ऐसे लोगों के रूप में बताया, जो कथित तौर पर तंत्र में गहराई तक पैठ बना चुके हैं समाज के लिए खतरा बने हुए हैं। शिवसेना नेता शायना एनसी ने भी बृहस्पतिवार को ‘पीटीआई-वीडियो’ से बातचीत में शाह की टिप्पणी पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा, ‘‘सवाल यह है कि क्या नसीरुद्दीन शाह सरफरोश के एसीपी राठौड़ हैं या गुलाम हसन? वह शहरी नक्सलवाद, टुकड़े-टुकड़े गैंग के समर्थन और देश-विरोधी गतिविधियों के बारे में बात करते हैं। श्रीमान्, पूरे सम्मान के साथ आपसे मेरा सवाल यह है कि क्या आप भारत के समर्थन में नारे लगाने में विश्वास रखते हैं या भारत-विरोधी नारों में?’’ आमिर खान अभिनीत एक्शन ड्रामा सरफरोश में शाह ने खलनायक, गुप्त एजेंट गुलफाम हसन का किरदार निभाया था।
वर्ष 1999 की इस सुपरहिट फिल्म में खान एसीपी अजय सिंह राठौड़ की मुख्य भूमिका में थे। शाह (76) अक्सर वीडियो पोस्ट करके विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों पर अपना समर्थन जताते रहे हैं। उन्होंने जुलाई में नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ियों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी की अगुवाई में हुए विरोध-प्रदर्शन को सरकार द्वारा संभालने के तरीके की भी आलोचना की है।
पिछले हफ्ते, शाह ने ‘सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट’ के उन विद्यार्थियों के समर्थन में भी अपनी आवाज़ उठाई, जो परिसर में हुई हिंसक घटनाओं को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। मंगलवार को अपने एक वीडियो में शाह ने कहा, ‘‘मैं गर्व से कहता हूं कि मैं एक दिमागी नक्सल हूं। मुझे नहीं पता कि चौकीदारों ने मुझ जैसे लोगों को और क्या-क्या नाम दिए हैं—जैसे राष्ट्र-विरोधी , टुकड़े-टुकड़े गैंग , और न जाने क्या-क्या।’’
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