प्रीमियर लीग फुटबॉल- आर्सनल ने चेल्सी को 2-1 से हराया:पॉइंट्स टेबल में टॉप पर पहुंचा; ब्रूनो फर्नाडेंज के गोल से मैनचेस्टर यूनाइटेड भी जीता
इंग्लिश प्रीमियर लीग (EPL) में खिताबी जंग अब और रोमांचक हो गई है। रविवार को एमिरेट्स स्टेडियम में खेले गए हाई-वोल्टेज 'लंदन डर्बी' में टेबल टॉपर आर्सनल ने चेल्सी को 2-1 से हरा दिया। इस जीत के साथ टीम ने पॉइंट्स टेबल में नंबर-1 पर अपनी पोजिशन स्ट्रॉन्ग भी कर ली। मैनचेस्टर सिटी 59 पॉइंट्स के साथ दूसरे नंबर पर है। वहीं, एक अन्य मुकाबले में मैनचेस्टर यूनाइटेड ने क्रिस्टल पैलेस पर रोमांचक जीत दर्ज कर तीसरा स्थान हासिल कर लिया है। टीम से ब्रूनो फर्नांडेज ने बेहतरीन गोल दागा। आर्सेनल vs चेल्सी पूरे मैच में आर्सेनल का दबदबा रहा और दिलचस्प बात यह रही कि मैच के तीनों गोल कॉर्नर के जरिए ही आए। चेल्सी को भारी पड़ी रेड कार्ड की मार मैच के आखिर में चेल्सी के पेड्रो नेटो को अंपायर से बहस और फाउल के कारण दूसरा यलो कार्ड मिला। 2 यलो कार्ड के कारण उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा, जिससे टीम को 10 खिलाड़ियों से ही मैच खेलना पड़ा। चेल्सी फिलहाल 45 पॉइंट्स के साथ छठे नंबर पर है। यूनाइटेड की 'कमबैक' जीत ओल्ड ट्रैफर्ड में मैनचेस्टर यूनाइटेड ने एक गोल से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए क्रिस्टल पैलेस को 2-1 से हरा दिया।
अफगानिस्तान का पाकिस्तान के नूरखान एयरबेस पर हमला:तालिबान के मंत्री बोले- हमने डूरंड लाइन पार की, PAK का दावा- 400 अफगान लड़ाके मारे
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर बीते चार दिनों से लगातार हवाई हमले और गोलीबारी जारी है। तालिबान सरकार का कहना है कि हमने पाकिस्तान के बेहद संवेदनशील नूर खान एयरबेस पर हमला किया है। यह एयरबेस रावलपिंडी में है। इसके साथ ही तालिबान के एक मंत्री ने दावा किया कि उनके लड़ाके डूरंड लाइन पार कर पाकिस्तान की जमीन में घुस चुके हैं। तालिबान के मुताबिक, क्वेटा और खैबर पख्तूनख्वा के कुछ सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए गए हैं। ये कार्रवाई पाकिस्तान की ओर से काबुल, बगराम और अन्य इलाकों में किए गए हवाई हमलों के जवाब में की गई। दूसरी तरफ पाकिस्तान सरकार ने दावा किया है कि अब तक 400 से ज्यादा अफगान लड़ाके मारे जा चुके हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं। तालिबान के अनुसार, जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया, उनमें शामिल हैं: पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच जंग जैसे हालात पाकिस्तान और अफगानिस्तान में संघर्ष की शुरुआत 22 फरवरी को हुई थी। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की थी। पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने दावा किया था कि सीमावर्ती इलाकों में TTP के ठिकानों पर कार्रवाई में कम से कम 70 लड़ाके मारे गए। बाद में पाकिस्तानी अखबार डॉन ने यह संख्या 80 तक पहुंचने का दावा किया था। इसके जवाब में अफगानिस्तान ने 27 फरवरी को पाकिस्तान पर हमला किया। अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान को 'सही समय पर कड़ा जवाब' दिया जाएगा। मंत्रालय ने इन हमलों को देश की संप्रभुता का उल्लंघन बताया था। पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर दबाव बनाता रहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी संगठन को न करने दे। इस्लामाबाद का आरोप है कि TTP अफगानिस्तान से ऑपरेट हो रहा है, जबकि तालिबान सरकार इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में 415 तालिबान लड़ाके मारे पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खिलाफ हमले को ‘गजब लिल हक’ ऑपरेशन नाम दिया है और काबुल समेत कई प्रांतों में हमले किए। ‘गजब लिल हक’ का मतलब है, अपने हक के लिए खड़े होना। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ता उल्लाह तारर के मुताबिक अब तक - पाकिस्तानी वायुसेना ने दावा किया है कि उसने नंगरहार और कंधार में तालिबान के सैन्य मुख्यालयों को निशाना बनाया। वहीं तालिबान का कहना है कि उसके सिर्फ 8 से 13 लड़ाके मारे गए और कुछ घायल हुए हैं। उसने दावा किया कि 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और दो सैन्य मुख्यालयों समेत कई चौकियों पर कब्जा किया गया। तालिबान ने चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान ने आगे हमला किया तो और कड़ा जवाब दिया जाएगा। हमले के बाद की तस्वीरें… पाकिस्तान की संसद में निंदा प्रस्ताव पास पाकिस्तान की सीनेट ने अफगानिस्तान के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि आगे किसी भी उकसावे पर कड़ा और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सेना मुख्यालय का दौरा कर जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई। पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने अफगान तालिबान सरकार को गैर-कानूनी बताते हुए आरोप लगाया कि वहां महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकार छीने जा रहे हैं। दोनों देशों के बीच पहले भी हुआ है तनाव अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड लाइन को लेकर लंबे समय से विवाद है। दोनों देश एक-दूसरे पर हमले और आतंकियों को छिपाने का आरोप लगाते रहते हैं। 2021 में अफगानिस्तान हुकूमत पर तालिबान के कंट्रोल के बाद से तनाव और बढ़ गया है।
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