45 साल से अपना दाहिना हाथ छिपाए रहते थे ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई, क्या थी इसके पीछे वजह
अयातुल्लाह अली खामेनेई अपना दाहिना हाथ छिपाए रहते थे। 1981 में उनपर एक जानलेवा हमला हुआ था। इस हमले में उनका एक हाथ खराब हो गया था। खामेनेई ने कहा था, अगर मेरा दिमाग और जुबान चल रही है तो मुझे एक हाथ की जरूरत नहीं है।
खामेनेई की 'डिजिटल घेराबंदी': US-इजरायल की उस 'अदृश्य' तकनीक की कहानी जिसने बंकरों में भी ढूंढ निकाला मौत का पता
नई दिल्ली : 28 फरवरी 2026 की सुबह जब तेहरान का 'लीडरशिप कंपाउंड' जोरदार धमाकों से दहल उठा, तो वह केवल एक मिसाइल हमला नहीं था, बल्कि दशकों की जासूसी और 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) के उस घातक मेल का नतीजा था जिसने नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि इस हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई समेत ईरान के 48 शीर्ष नेता मारे गए हैं। ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी सैन्य अभियान अपनी तय समय सीमा से आगे चल रहा है और अगले चार हफ्तों में मिडिल ईस्ट की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
'हाई फिडेलिटी' सर्विलांस: महीनों से साए की तरह पीछे थी CIA
अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA पिछले कई महीनों से साए की तरह खामेनेई का पीछा कर रही थी। द न्यू यॉर्क टाइम्स के मुताबिक, इसे 'हाई फिडेलिटी' इंटेलिजेंस कहा जाता है। CIA ने खामेनेई की हर छोटी-बड़ी आदत, उनके सुरक्षा प्रोटोकॉल और उनके गुप्त ठिकानों का एक बारीक 'डिजिटल मैप' तैयार कर लिया था। एजेंसियां यह तक जानती थीं कि खामेनेई किस समय किस बंकर में होते हैं और कब वे बाहर निकलते हैं। यही वह डेटा था जिसने सुरक्षा की सात परतों को भेदने का रास्ता साफ किया।
वह 'गोल्डन विंडो': रात के बजाय दिन के उजाले में क्यों हुआ हमला?
खुफिया जानकारी मिली थी कि शनिवार 28 फरवरी की सुबह तेहरान के एक गुप्त परिसर में एक बड़ी हाई-लेवल मीटिंग होने वाली है। पहले हमला रात में करने की योजना थी, लेकिन जब पता चला कि खामेनेई खुद इस मीटिंग में मौजूद रहेंगे, तो प्लान बदल दिया गया। सुबह करीब 9:40 बजे, जब सभी 48 नेता एक ही जगह जमा थे, अमेरिका और इजरायल ने 'डेलाइट स्ट्राइक' (दिन में हमला) का फैसला किया ताकि कोई भी बचकर भाग न सके।
'Claude Gov' AI: जिसने इंटरसेप्ट किए लाखों खुफिया दस्तावेज
इस ऑपरेशन की सबसे चौंकाने वाली बात इसमें AI का इस्तेमाल है। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, 'Claude' एंथ्रोपिक का AI मॉडल के विशेष सैन्य वर्जन ने लाखों फारसी दस्तावेजों, इंटरसेप्ट की गई कॉल्स और सैटेलाइट इमेजरी को रीयल-टाइम में स्कैन किया। इस AI टूल ने 'इंटेलिजेंस के कोहरे' को साफ कर दिया और उन लोकेशन को पिनपॉइंट किया जिन्हें इंसानी आंखें नहीं देख पा रही थीं। इसने न केवल टारगेट पहचाने, बल्कि हमले के बाद होने वाले 'बैटल सिनेरियो' को भी पहले ही सिमुलेट कर लिया था।
'मोसाद' का जमीनी जाल: तकनीक के बीच 'इंसानी गद्दारी'
सिर्फ सैटेलाइट और AI ही नहीं, बल्कि जमीन पर मौजूद 'ह्यूमन इंटेलिजेंस' (HUMINT) ने भी अहम भूमिका निभाई। इजरायली खुफिया एजेंसी 'मोसाद' ने तेहरान के पॉवर कॉरिडोर में अपने जासूसों का ऐसा जाल बिछाया था कि मीटिंग का सटीक कमरा नंबर तक लीक हो गया। रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा घेरे में मौजूद किसी करीबी ने यह जानकारी साझा की थी कि खामेनेई मीटिंग के दौरान किस खास सोफे या कुर्सी पर बैठेंगे, जिससे मिसाइल की सटीकता लेजर जैसी अचूक रही।
'ट्रैकिंग सिस्टम' का मायाजाल: बर्नर्स फोन भी नहीं बचा सके
ईरानी नेता अक्सर 'बर्नर फोन्स' और 'ऑफ-ग्रिड' संचार का उपयोग करते थे, लेकिन अमेरिका के 'हाइली सोफिस्टिकेटेड ट्रैकिंग सिस्टम' ने उनके करीबियों और सहयोगियों के डिजिटल फुटप्रिंट्स को पकड़ लिया। भले ही खामेनेई फोन का इस्तेमाल न कर रहे हों, लेकिन उनके साथ चलने वाले सुरक्षाकर्मियों और सलाहकारों के डिजिटल सिग्नल ने उनकी लोकेशन उजागर कर दी। ट्रंप ने खुद कहा, "वे हमारे इंटेलिजेंस और ट्रैकिंग सिस्टम से बच नहीं सकते थे, उनके पास करने के लिए कुछ नहीं बचा था।"
4 हफ्ते का काउंटडाउन: ट्रंप का 'ओपन वॉर' और बदलता नक्शा
डोनाल्ड ट्रंप ने 'डेली मेल' को दिए इंटरव्यू में दावा किया कि यह जंग अब केवल 4 हफ्तों की रह गई है। उन्होंने साफ कहा कि ऑपरेशन 'अहेड ऑफ शेड्यूल' है। इस हमले ने न केवल ईरान के सर्वोच्च नेता को खत्म किया, बल्कि रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के मुख्य कमांडरों और रक्षा मंत्री को भी मिटा दिया है। अब अमेरिका और इजरायल का लक्ष्य ईरान में शासन परिवर्तन और वहां 'लोकतंत्र' की बहाली है।
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