Delhi High Court ने जेल नियमों की अनदेखी पर DG Prisons को थमाया अवमानना नोटिस
दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को खुली और अर्ध-खुली कारागारों में कैदियों के लिए सुविधाओं से जुड़े न्यायिक निर्देशों का पालन न किए जाने को गंभीरता से लेते हुए, महानिदेशक (कारागार) को अवमानना का नोटिस जारी किया। अदालत ने कहा कि उन्होंने आदेशों की ‘पूरी तरह से अनदेखी’ की है। उच्च न्यायालय ने दिल्ली के मुख्य सचिव को अवमानना नोटिस जारी करने की चेतावनी भी दी।
अदालत ने कहा कि सरकारी अधिकारी इस मामले को बहुत हल्के में ले रहे हैं, जबकि उच्चतम न्यायालय ने ‘ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशंस’ (ओसीआई) के लिए एक प्रोटोकॉल तैयार करने और वहां भेजे जा सकने वाले कैदियों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश पारित होने के आठ महीने बीत जाने के बावजूद, इसके अनुपालन की कोई जानकारी नहीं मिली है और न ही राज्य सरकार या दिल्ली जेल प्रशासन की ओर से इस दिशा में शायद ही कोई कदम उठाए गए हैं। पीठ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के फरवरी 2026 के निर्देश और उसके बाद उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद, सरकार और जेल प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की और यह मामला ‘जरा भी आगे नहीं बढ़ा’।
पीठ ने कार्यवाही के दौरान महानिदेशक (कारागार) की अनुपस्थिति पर कड़ी आपत्ति जताई। उच्च न्यायालय ने कहा कि उन्होंने यहां उपस्थित न होकर और अपने अधीन एक अधिकारी से हलफनामा भरवाकर-जो कि अधूरी जानकारी के साथ अदालत में दाखिल किया गया-अदालत के आदेशों के प्रति ‘पूरी तरह से अवहेलना’ दिखाई है। अदालत ने यह भी कहा कि न्यायिक आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट देने के लिए जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों का रवैया ‘पूरी तरह से लापरवाह और असंवेदनशील’ था।
उच्च न्यायालय राज्य में अर्ध खुली और खुली जेलों से जुड़े मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका की सुनवाई कर रहा था। इससे पहले, अदालत ने दिल्ली सरकार से एक हलफनामा दाखिल करने को कहा था, जिसमें यह बताया जाए कि 26 फरवरी को उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।अदालत ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार, ओसीआई के प्रबंधन के लिए हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को एक निगरानी समिति गठित करनी होगी, जिसकी अध्यक्षता राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष या उनके द्वारा नामित व्यक्ति करेंगे। न्यायमूर्ति साम्ब्रे और न्यायमूर्ति शर्मा की पीठ ने सुनवाई के दौरान सवाल किया कि क्या राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार मौजूदा नियमों और विनियमों को तैयार किया है या उनमें संशोधन किया है।
इस पर, दिल्ली सरकार के स्थायी वकील (आपराधिक) संजय लाओ ने अधिकारियों के निर्देश पर कहा कि इसकी आवश्यकता नहीं है। पीठ ने सवाल किया कि क्या उसे यह बयान दर्ज कर लेना चाहिए कि नियमों में किसी संशोधन या बदलाव की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने रेखांकित किया कि उच्चतम न्यायालय ने सरकारी अधिकारियों से कहा था कि वे निगरानी समिति की बैठक में सचिव के पद से नीचे के अधिकारियों को न भेजें।
हालांकि, स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, बैठक में उप-सचिव स्तर के एक अधिकारी को भेजा गया। न्यायमूर्ति साम्ब्रे ने कहा, ‘‘आप दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष के सामने होने वाली निगरानी समिति की बैठक में अपने जोकरों को भेजते हैं। क्या आप चाहते हैं कि हम बैठक का कार्यवृत्त दिखाएं कि आप समिति की बैठक में शामिल होने के लिए किसे नामित कर रहे हैं?’’ उन्होंने कहा, ‘‘ सरकार ने यहां जो कुछ भी किया है, हम अपने आदेश में उनका उल्लेख कर तमाशा नहीं बनाना चाहते।’’ दिल्ली सरकार के वकील ने जब यह समझाने की कोशिश की कि अधिकारियों ने क्या कदम उठाए हैं, तो पीठ ने कहा कि वे मामलों को बहुत हल्के में ले रहे हैं और यह पूरी तरह से ‘दिखावा’ है।
पीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा, ‘‘आपको जवाबदेह नहीं ठहराया गया है; उच्चतम न्यायालय के प्रति जवाबदेह तो उच्च न्यायालय को ठहराया गया है।’’ इसके बाद, सरकारी वकील और गृह विभाग के विशेष सचिव ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वे सुनवाई की अगली तारीख पर अदालत के सामने अनुपालन रिपोर्ट दिखाएंगे। वकील ने यह भी आश्वासन दिया कि 30 अक्टूबर को होने वाली समिति की अगली बैठक में दिल्ली सरकार और जेल प्रशासन विभाग के उच्च-स्तरीय अधिकारी, सभी जरूरी निर्देशों और रिपोर्टों के साथ शामिल होंगे। इन आश्वासनों के बाद, अदालत ने दिल्ली के मुख्य सचिव को अवमानना नोटिस जारी करने की प्रक्रिया टाल दी, लेकिन महानिदेशक (जेल) से कहा कि वे 18 नवंबर तक अवमानना नोटिस पर अपना जवाब दाखिल करें।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 नवंबर को सूचीबद्ध किया।
Spain Train Crash: तोलेदो में दो तेज रफ्तार ट्रेनों की भीषण भिड़ंत, 68 यात्रियों की मौत
स्पेन के तोलेदो प्रांत में बुधवार को एक तेज रफ्तार ट्रेन पटरी पर खड़ी दूसरी ट्रेन से टकरा गई। इस हादसे में कम से कम 68 लोगों की मौत हो गई और ट्रेन के डिब्बे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
इस साल देश में यह दूसरा भीषण रेल हादसा है। कैस्टिला-ला मांचा के क्षेत्रीय प्रशासन ने कहा कि 58 लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बचावकर्मी मलबे में जीवित बचे लोगों की तलाश जारी रखे हुए हैं।
यह हादसा ऐसे समय हुआ है, जब दक्षिणी स्पेन में जनवरी में दो तेज रफ्तार ट्रेनों के बीच हुई एक अन्य टक्कर की यादें अभी भी ताजा हैं। उस हादसे में भी इन्हीं दो कंपनियों की ट्रेनें शामिल थीं। स्पेन की रेल प्रणाली के संचालक एडीआईएफ ने बताया कि यह दुर्घटना बुधवार सुबह तोलेदो प्रांत में हुई।
इसमें सैकड़ों यात्रियों को लेकर मैड्रिड से दक्षिण-पश्चिमी स्पेन के सेविले जा रही दो तेज रफ्तार ट्रेनें शामिल थीं। दोनों ट्रेनें एक ही दिशा में जा रही थीं। स्पेन की सरकारी कंपनी रेनफे की एक ट्रेन ने निजी कंपनी इर्यो की खड़ी ट्रेन के पिछले हिस्से में टक्कर मार दी।
इससे ग्रामीण इलाके में दो गांवों के बीच इर्यो ट्रेन के दो डिब्बे पटरी से उतर गए। स्पेन की मीडिया की खबरों के अनुसार, ऐसा प्रतीत होता है कि ‘रेनफे’ की ट्रेन ने ‘इर्यो’ की ट्रेन को टक्कर मारी। हादसे के बाद मैड्रिड, स्यूदाद रियल और अंदालूसिया के बीच रेल सेवा रोक दी गई।
स्पेन की स्वास्थ्य मंत्री मोनिका गार्सिया ने टीवीई को बताया कि आपातकालीन कर्मी सबसे अधिक क्षतिग्रस्त दो रेल डिब्बों से जीवित बचे लोगों को निकालने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि घायलों को क्षेत्र के विभिन्न अस्पतालों में भेजा जा रहा है। कैस्टिला ला मांचा क्षेत्र की प्रवक्ता एस्थर पाडिला ने सरकारी प्रसारक ‘टीवीई’ से बातचीत में कहा कि ‘रेनफे’ की ट्रेन में 397 यात्री और ‘इर्यो’ की ट्रेन में 147 यात्री सवार थे।
आपातकालीन सेवाओं, दमकलकर्मियों और पुलिस की मदद के लिए सेना की आपातकालीन ब्रिगेड को तैनात किया गया। एंबुलेंस और हेलीकॉप्टर सेवा घटनास्थल से घायलों को ले जाने में जुटे रहे, जबकि सुरक्षित बचे यात्रियों को बसों में बैठाकर वहां से ले जाया गया। स्पेन के परिवहन मंत्री ऑस्कर पुएंते ने कहा कि दुर्घटना स्पेन की रेलगाड़ियों के नियंत्रण केंद्र के उस ‘‘समझ से परे’’ आदेश के कारण हुई, जो सुरक्षा प्रणाली के काम करना बंद कर देने के बाद दिया गया था।
उन्होंने कहा कि रेलगाड़ियों के चालकों की इसमें कोई गलती नहीं थी। पुएंते ने बताया कि सुबह आठ बजकर 30 मिनट पर 63 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर कंप्यूटर में खराबी के कारण सुरक्षा प्रणाली ने काम करना बंद कर दिया, जिससे उस खंड पर सभी रेलगाड़ियां रुक गईं। उन्होंने बताया हालांकि केंद्रीय नियंत्रण केंद्र ने रेनफे की रेलगाड़ी को बिना गति सीमा के फिर से चलने का निर्देश दिया।
इसके बाद सुबह आठ बजकर 53 मिनट पर वह पहले से खड़ी दूसरी रेलगाड़ी से टकरा गई।
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