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गैरसैंण में एक वर्ष में दो विधानसभा सत्रों का आयोजन राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक- सीएम धामी

Uttarakhand News: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में विधानसभा सत्र के समापन के उपरांत आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि राज्य सरकार गैरसैंण के विकास और प्रदेश की जनभावनाओं के सम्मान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है. उन्होंने कहा कि इस वर्ष गैरसैंण में दो विधानसभा सत्र आयोजित किए गए हैं. पिछले पांच वर्षों में गैरसैंण में विधानसभा सत्रों के आयोजन को विशेष महत्व दिया गया है. सरकार का प्रयास रहा है कि प्रदेश के विकास और जनहित से जुड़े विषयों पर सदन में सार्थक चर्चा हो तथा जनहित में आवश्यक निर्णय लिए जाएं.

सदन में हंगामे पर विपक्ष को खरी-खरी

CM ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का महत्वपूर्ण मंच है, जहां जनप्रतिनिधियों को जनता से जुड़े विषयों को गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ उठाना चाहिए. उन्होंने विपक्ष के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि सदन में विरोध करने का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप होना चाहिए. सदन की कार्यवाही बाधित करने और अनावश्यक हंगामा करने से जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा प्रभावित होती है.

आरोप की राजनीति छोड़ विकास में साथ दे विपक्ष

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस को जनहित के विषयों पर सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सदन के भीतर और बाहर जनसमस्याओं पर सार्थक चर्चा करने के बजाय विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को प्राथमिकता दे रही है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पक्ष और विपक्ष दोनों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है. राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन प्रदेश के विकास और जनता के हितों को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए.

वादे पूरे कर रही सरकार, कड़े फैसलों से नहीं हटे पीछे

सीएम ने कहा कि राज्य सरकार ने अपने कार्यकाल में जनहित से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं. समान नागरिक संहिता लागू करने, सख्त भू-कानून बनाने तथा शिक्षा एवं अन्य क्षेत्रों में आवश्यक सुधारों की दिशा में कदम उठाए गए हैं. उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में जनता के समक्ष रखे गए दृष्टिपत्र के अनुरूप सरकार ने विभिन्न महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं. प्रदेश की आवश्यकताओं और जनभावनाओं के अनुरूप आगे भी निर्णय लिए जाते रहेंगे.

मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने सामाजिक समानता और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है. उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता को लेकर पहले अनेक आशंकाएं व्यक्त की गई थीं, लेकिन सरकार ने व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए इस कानून को लागू किया. मुख्यमंत्री ने अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में किए गए बदलावों का भी उल्लेख किया और कहा कि सरकार सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए कार्य कर रही है.

आंदोलनकारियों के बलिदान और राष्ट्रीय सुरक्षा का सम्मान जरूरी

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य का निर्माण आंदोलनकारियों के लंबे संघर्ष और बलिदान का परिणाम है. रामपुर तिराहा कांड उत्तराखंड के इतिहास की अत्यंत पीड़ादायक घटना रही है, जिसे प्रदेशवासी कभी नहीं भूल सकते. उन्होंने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की टिप्पणियों पर आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड और राज्य आंदोलन से जुड़े विषयों पर टिप्पणी करते समय प्रदेश की जनभावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए.

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के संबंध में की गई राजनीतिक टिप्पणियों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और राष्ट्रसेवा में योगदान देने वाले व्यक्तित्वों के प्रति सम्मान का भाव होना चाहिए. सार्वजनिक जीवन में संवाद की मर्यादा और भाषा की शालीनता बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है.

मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार पारदर्शिता और सुशासन के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में व्यवस्थागत सुधार किए हैं. सरकार का उद्देश्य जनहित में निर्णय लेना और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाना है.

बजट से बदलेगी तस्वीर, पहाड़ तक पहुंचेगा लाभ

मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत 7,844.18 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट में विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान किए गए हैं. इसमें बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, कृषि तथा अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखा गया है. विधानसभा सत्र के दौरान अनुपूरक बजट सहित विभिन्न विधेयक पारित किए गए हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड के समग्र विकास के साथ ही दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना है. गैरसैंण सहित पूरे प्रदेश में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने तथा जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है. प्रदेश के विकास और जनता के हितों से जुड़े विषय सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में रहेंगे.

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वोटर लिस्ट से नाम कटने पर Form-6 भरना जरूरी क्यों? सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछे सवाल

Supreme Court on Delhi SIR: दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर उठे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने चुनाव आयोग से सीधा सवाल किया है कि जो नागरिक पहले से मतदाता सूची में दर्ज हैं, उनसे नए वोटर के तौर पर फॉर्म-6 भरने के लिए क्यों कहा जा रहा है. अदालत ने साफ किया कि अगर कोई व्यक्ति सिर्फ अपना पता बदलता है या कुछ समय के लिए शहर से बाहर जाता है, तो उसे पहली बार वोट देने वाला नहीं माना जा सकता. इस पूरे मामले पर देश की सर्वोच्च अदालत ने चुनाव आयोग को अपना पक्ष रखने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है.

पुराने वोटरों पर नए नियमों का बोझ

यह पूरा मामला तब गरमाया जब दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची से लगभग 43 लाख लोगों के नाम बाहर कर दिए गए. चुनाव आयोग की इस कार्रवाई के पीछे तर्क दिया गया कि ये लोग या तो अपने पते पर मौजूद नहीं थे या फिर कहीं और चले गए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई. अदालत ने कहा कि फॉर्म-6 सिर्फ उन नागरिकों के लिए तय किया गया है जो जीवन में पहली बार मतदान करने जा रहे हैं. जो लोग वर्ष 2026 की मतदाता सूची में पहले से शामिल हैं, उन्हें केवल पता बदलने के लिए फॉर्म-8 भरने की छूट मिलनी चाहिए. कोर्ट का मानना है कि ऐसे वोटरों से यह झूठा हलफनामा नहीं मांगा जा सकता कि उनका नाम पहले कभी मतदाता सूची में था ही नहीं.

अस्थायी पलायन और मताधिकार की सुरक्षा

सुनवाई के दौरान अदालत ने आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और उनकी वास्तविक परिस्थितियों को रेखांकित किया. पीठ ने कहा कि काम या आजीविका के सिलसिले में किसी का एक या दो महीने के लिए बाहर रहना कोई स्थायी पलायन नहीं है. बहुत से लोग रोजगार की तलाश में या पारिवारिक कारणों से कुछ समय के लिए शहर छोड़ते हैं, लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं है कि उन्होंने अपनी मूल जगह हमेशा के लिए छोड़ दी है. अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा कि किसी का कुछ समय के लिए अनुपस्थित होना उसे मतदाता सूची से बाहर करने का आधार नहीं बन सकता.

ढांचागत खामियों पर अदालत की दो टूक

मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस बागची ने पूरी प्रक्रिया की खामियों को उजागर करते हुए कड़ा सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि अगर कोई मतदाता किसी कारणवश समय पर गणना फॉर्म नहीं भर पाया, तो क्या वह हमेशा के लिए अपने वोट देने के अधिकार से हाथ धो बैठेगा. उन्होंने इसे चुनावी प्रक्रिया की एक बड़ी ढांचागत विसंगति करार दिया, जिसे तुरंत सुधारे जाने की आवश्यकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक अंतिम मतदाता सूची तैयार नहीं हो जाती, तब तक महज तारीख बीत जाने के आधार पर किसी भी नागरिक का फॉर्म निरस्त नहीं किया जाना चाहिए. जनता के बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकारों को तकनीकी समय-सीमा की आड़ में नहीं छीना जा सकता.

चुनाव आयोग का पक्ष और समय-सीमा

सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त रुख के बाद चुनाव आयोग ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की. आयोग के प्रतिनिधियों ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वे देर से आने वाले पंजीकरण आवेदनों को स्वीकार करने पर सकारात्मक विचार करेंगे. इसके साथ ही आयोग ने यह संकेत भी दिया कि यदि जरूरत पड़ी, तो 30 अक्टूबर की मौजूदा समय-सीमा को आगे बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है. अदालत की टिप्पणियों से यह साफ हो गया है कि नागरिकों के मताधिकार की रक्षा करना प्रशासनिक समय-सारणी से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है.

बिहार और बंगाल मामलों पर अदालत का स्पष्टीकरण

सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने एक और महत्वपूर्ण कानूनी पहलू पर स्थिति साफ की. उन्होंने कहा कि बिहार एसआईआर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तार्किक विसंगति यानी लॉजिकल डिसक्रिपेंसी के मुद्दे पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया था. पश्चिम बंगाल में भी इसे केवल एक कामचलाऊ या अंतरिम व्यवस्था के तौर पर मंजूरी दी गई थी. अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि लोग बिहार से जुड़े आदेश को इस तरह पेश कर रहे हैं जैसे सब कुछ पहले ही तय हो चुका हो. पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने तार्किक विसंगति वाली श्रेणी को कानूनी मान्यता नहीं दी है, इसलिए इसे आधार बनाकर लोगों को वोट देने से वंचित नहीं किया जा सकता.

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