ईरान पर हमले के बीच नेपाल ने खाड़ी देशों की उड़ानें रद्द कीं
काठमांडू, 28 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बाद नेपाल और खाड़ी देशों के विभिन्न शहरों के बीच संचालित एक दर्जन से अधिक उड़ानें शनिवार को रद्द कर दी गईं।
संयुक्त अमेरिका-इजरायल हमले के बाद ईरान द्वारा इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई किए जाने से क्षेत्र के कई देशों ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है और नागरिक उड़ानों पर रोक लगा दी है।
त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (टीआईए) प्राधिकरण ने बताया कि शनिवार शाम तक काठमांडू से पश्चिम एशिया के विभिन्न शहरों के लिए रवाना होने वाली तथा वहां से आने वाली कुल 14 उड़ानें रद्द कर दी गईं। टीआईए, नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (सीएएएन) के अधीन कार्य करता है।
अधिकारियों के अनुसार, नेपाल एयरलाइंस, हिमालय एयरलाइंस, कतर एयरवेज, एयर अरेबिया, फ्लाईदुबई और कुवैत एयरवेज की कई उड़ानें रद्द की गईं। इनमें हिमालय एयरलाइंस ने सर्वाधिक छह उड़ानें निरस्त कीं।
उड़ानें रद्द होने के बाद बड़ी संख्या में यात्री त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर फंस गए, जिससे टर्मिनल परिसर में भीड़ बढ़ गई और यात्री आगे की जानकारी का इंतजार करते रहे।
हिमालय एयरलाइंस ने सोशल मीडिया पर जारी नोटिस में कहा, “मध्य पूर्व के हवाई क्षेत्र में मौजूदा स्थिति के कारण दुबई, दमाम और दोहा के लिए हमारी सभी उड़ानें अगले आदेश तक रद्द की जाती हैं। यात्रियों से अनुरोध है कि वे हमारी आधिकारिक सोशल मीडिया चैनलों और वेबसाइट पर नवीनतम जानकारी प्राप्त करते रहें।”
नेपाल एयरलाइंस ने भी जानकारी दी कि मध्य पूर्व की मौजूदा परिस्थितियों के कारण 28 फरवरी और 1 मार्च 2026 को निर्धारित आरए 229/230 (काठमांडू-दुबई-काठमांडू) और आरए 239 (काठमांडू-दोहा-काठमांडू) उड़ानें अगले आदेश तक रद्द की गई हैं। दमाम की उड़ानों की स्थिति जल्द अपडेट की जाएगी।
इससे पहले टीआईए प्राधिकरण ने यात्रियों को आगाह किया था कि कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें विलंबित, पुनर्निर्धारित या रद्द हो सकती हैं। यात्रियों से एयरपोर्ट आने से पहले संबंधित एयरलाइंस से अपनी उड़ान की ताजा स्थिति की पुष्टि करने की अपील की गई है।
हवाईअड्डा प्रशासन ने कहा कि यात्रियों की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए एयरलाइंस और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है।
--आईएएनएस
डीएससी
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US Israel Iran युद्ध के चलते दुनिया दो गुटों में बंटी! आए कई देशों के रिएक्शन; कौन किसके साथ?
US Israel Attack Iran: अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान और मिडिल ईस्ट में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं. दुनिया भर के बड़े देश इस मुद्दे पर अलग-अलग राय रख रहे हैं. कोई अमेरिका-इजराइल को जिम्मेदार बता रहा है, तो कोई ईरान को दोष दे रहा है. आइए जानते हैं किस देश ने क्या कहा.
रूस: अमेरिका-इजराइल अपना एजेंडा थोप रहे
रूस ने ईरान पर हमले की कड़ी निंदा की है. रूसी विदेश मंत्रालय का कहना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम का बहाना बनाकर अमेरिका और इजराइल वहां सरकार बदलना चाहते हैं. रूस ने चेतावनी दी है कि इससे पूरे मिडिल ईस्ट में मानवीय और परमाणु तबाही हो सकती है. रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका का ‘शांतिदूत’ वाला चेहरा बेनकाब हो गया है. उन्होंने कहा कि ईरान से बातचीत सिर्फ दिखावा थी.
नॉर्वे: प्रिवेंटिव स्ट्राइक सही नहीं
नॉर्वे के विदेश मंत्री ने कहा कि इजराइल का हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार सही नहीं है. कानून के मुताबिक, पहले हमला तभी हो सकता है जब खतरा बिल्कुल सामने हो.
फ्रांस: महायुद्ध का खतरा
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हालात को बेहद खतरनाक बताया है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की. मैक्रों ने कहा कि यह जंग अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए बड़ा खतरा है.
ब्रिटेन: बड़े क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका
ब्रिटेन ने अपने नागरिकों को बहरीन, कुवैत, कतर और यूएई में सतर्क रहने की सलाह दी है. सरकार का कहना है कि यह संघर्ष पूरे क्षेत्र में फैल सकता है.
स्पेन: अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान जरूरी
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने युद्ध रोकने की अपील की और कहा कि सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करना चाहिए.
यूक्रेन: ईरान सरकार जिम्मेदार
यूक्रेन का कहना है कि ईरान सरकार ने अपने ही नागरिकों पर दमन किया, जिससे हालात बिगड़े.
कतर और जॉर्डन की चेतावनी
कतर ने अपने यहां अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमले की निंदा की और जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखा. जॉर्डन ने कहा कि वह अपनी सीमाओं की रक्षा करेगा, लेकिन इस युद्ध का हिस्सा नहीं है.
लेबनान: युद्ध में नहीं उतरेंगे
लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने कहा कि वह देश को इस संघर्ष में नहीं झोंकेंगे.
संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय आयोग की चिंता
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने दोनों पक्षों की कार्रवाई की निंदा की और संयम बरतने की अपील की. यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि ईरान के परमाणु केंद्रों की सुरक्षा बेहद जरूरी है.
ICRC और अफ्रीकी संघ की अपील
रेड क्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति ने कहा कि यह तनाव खतरनाक चेन रिएक्शन शुरू कर सकता है. अफ्रीकी संघ ने तुरंत युद्धविराम की मांग की है.
रजा पहलवी का दावा
ईरान के आखिरी शाह के बेटे रजा पहलवी ने कहा कि अब आखिरी जीत करीब है और ईरान में बदलाव का समय आ गया है. कुल मिलाकर अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है. कई देश शांति की अपील कर रहे हैं, जबकि कुछ देश सीधे तौर पर एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. अगर हालात नहीं संभले तो यह संघर्ष बड़े युद्ध में बदल सकता है.
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