दुनिया को 'उल्टे चश्मे' से देखने वाले कलमकार, जिनका मानना था हास्य कटु नहीं, मिठास भरा होना चाहिए
मुंबई, 28 फरवरी (आईएएनएस)। गुजराती साहित्य के हास्य सम्राट तारक जनुभाई मेहता दुनिया को सीधे नहीं, बल्कि 'उल्टे चश्मे' से देखते थे। उनकी कलम ने समाज की कमियों पर हल्का-फुल्का व्यंग्य किया, लेकिन कभी कटुता नहीं अपनाई। उनका मानना था कि हास्य कटु नहीं, मिठास भरा होना चाहिए, जो हंसाते हुए दिल को छूए और सोचने पर मजबूर करे।
दुनिया को 'उल्टे चश्मे' से देखने वाले कलमकार, जिनका मानना था हास्य कटु नहीं, मिठास भरा होना चाहिए
मुंबई, 28 फरवरी (आईएएनएस)। गुजराती साहित्य के हास्य सम्राट तारक जनुभाई मेहता दुनिया को सीधे नहीं, बल्कि 'उल्टे चश्मे' से देखते थे। उनकी कलम ने समाज की कमियों पर हल्का-फुल्का व्यंग्य किया, लेकिन कभी कटुता नहीं अपनाई। उनका मानना था कि हास्य कटु नहीं, मिठास भरा होना चाहिए, जो हंसाते हुए दिल को छूए और सोचने पर मजबूर करे।
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