यूएस-इजरायल हमलों में ईरानी रक्षा मंत्री की मौत का दावा, IRGC कमांडर भी ढेर
US-Israe Airstrikes: मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव के बीच इजरायल और अमेरिका के संयुक्त अभियान ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ को लेकर नए दावे सामने आए हैं. कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि हालिया एयरस्ट्राइक में ईरान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व को गंभीर नुकसान पहुंचा है. ईरान के रक्षा मंत्री के मारने की भी बात सामने आई है. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि सभी पक्षों से स्पष्ट रूप से नहीं हुई है.
रक्षा मंत्री और IRGC कमांडर को लेकर खबरें
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने दावा किया गया है कि एयरस्ट्राइक के दौरान ईरान के रक्षा मंत्री अजीज नासिरजादेह और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वरिष्ठ कमांडर मोहम्मद पाकपुर निशाने पर थे. बताया जा रहा है कि तेहरान स्थित एक कथित गुप्त कमांड सेंटर पर पिनपॉइंट हमले किए गए, जहां रणनीतिक बैठक चल रही थी.
हालांकि ईरानी सरकारी मीडिया ने इन खबरों पर सीमित प्रतिक्रिया दी है और विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है. युद्ध जैसे हालात में अक्सर सूचना युद्ध भी तेज हो जाता है, जिससे दावों और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर हो सकता है.
Iran's Defence Minister Amir Nasirzadeh and Revolutionary Guards commander Mohammed Pakpour are believed to have been killed in Israeli attacks, two sources familiar with Israel's military operations and one regional source said: Reuters pic.twitter.com/71V69fjqy9
— ANI (@ANI) February 28, 2026
‘मिसाइल सिटी’ नेटवर्क पर असर?
विश्लेषकों के मुताबिक यदि शीर्ष सैन्य अधिकारी वास्तव में हमले में हताहत हुए हैं, तो इसका असर ईरान की रक्षा संरचना पर पड़ सकता है. नासिरजादेह को ईरान की मिसाइल क्षमता और भूमिगत बंकर नेटवर्क के विकास से जोड़ा जाता रहा है. वहीं पाकपुर को जमीनी अभियानों और क्षेत्रीय रणनीति का अनुभवी कमांडर माना जाता था.
फिर भी, सैन्य ढांचे में उत्तराधिकार की व्यवस्था पहले से तय होती है, इसलिए किसी एक या दो अधिकारियों के हटने से पूरी प्रणाली तत्काल ठप हो जाए, ऐसा मानना जल्दबाजी हो सकती है.
खामेनेई की सुरक्षा पर चर्चा
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को लेकर भी कई तरह की खबरें सामने आई हैं. बताया जा रहा है कि उन्हें एहतियातन सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया गया है. उनके आवास पर हमले और सैटेलाइट तस्वीरों से नुकसान के दावों पर भी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है.
ईरानी नेतृत्व ने अब तक यह संकेत दिया है कि देश जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है और राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है.
क्षेत्रीय असर और वैश्विक चिंता
मध्य पूर्व में हालात तेजी से बदल रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने संयम बरतने और कूटनीतिक रास्ता अपनाने की अपील की है। ऊर्जा बाजारों, हवाई यातायात और क्षेत्रीय स्थिरता पर इसका असर दिखने लगा है.
फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील है. आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह टकराव सीमित सैन्य कार्रवाई तक रहेगा या व्यापक क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है.
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खाड़ी में बढ़ते तनाव पर भारत की पैनी नजर, कहा- 'शांति ही रास्ता, बातचीत करें सभी देश'
ईरान और खाड़ी क्षेत्र में जिस तरह से हालात बिगड़ रहे हैं, उसने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं. अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई के बाद ईरान के जवाबी हमलों ने इस इलाके को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है. इस गंभीर स्थिति पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने अपना आधिकारिक बयान जारी किया है. भारत ने कहा है कि वह क्षेत्र में पल-पल बदलते घटनाक्रम पर बारीक नजर रखे हुए है. भारत के लिए यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि खाड़ी देशों के साथ हमारे गहरे आर्थिक और कूटनीतिक रिश्ते हैं.
संयम की बड़ी अपील
भारत सरकार ने युद्ध में शामिल सभी देशों और पक्षों से हाथ जोड़कर 'संयम' बरतने की अपील की है. विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह की उकसावे वाली कार्रवाई से बचना चाहिए, क्योंकि इससे स्थिति और भी बेकाबू हो सकती है. भारत का मानना है कि हिंसा से कभी किसी मसले का हल नहीं निकला है. सरकार ने जोर देकर कहा कि इस पूरे विवाद में आम नागरिकों की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा जाना चाहिए. युद्ध की आग में मासूम लोगों का खून नहीं बहना चाहिए.
भारतीयों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता
खाड़ी देशों में लाखों की संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं. ऐसे में उनकी सुरक्षा भारत सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि ईरान और उसके पड़ोसी देशों में मौजूद भारतीय मिशन (दूतावास) वहां रह रहे भारतीयों के साथ लगातार संपर्क में हैं. सभी भारतीयों को सलाह दी गई है कि वे फालतू बाहर न निकलें, स्थानीय प्रशासन के सुरक्षा निर्देशों का पालन करें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत भारतीय दूतावास से संपर्क करें. सरकार ने आश्वासन दिया है कि जरूरत पड़ने पर हर मुमकिन मदद और सुरक्षित वापसी के रास्ते तलाशे जाएंगे.
Our statement on the evolving situation in West Asia ⬇️
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) February 28, 2026
???? https://t.co/6aGR3mdDrb pic.twitter.com/qdKlTorVU4
कूटनीति ही असली समाधान
भारत की विदेश नीति हमेशा से "युद्ध नहीं, बुद्ध" के रास्ते पर चली है. मौजूदा संकट के बीच भी नई दिल्ली ने दुनिया को यही संदेश दिया है कि सैन्य टकराव किसी के भी हित में नहीं होता. सरकार का कहना है कि बड़े से बड़े विवाद को मेज पर बैठकर, बातचीत (संवाद) के जरिए हल किया जा सकता है. भारत ने सभी देशों से अपील की है कि वे एक-दूसरे की सीमाओं और सम्मान का ख्याल रखें और कूटनीतिक बातचीत को ही प्राथमिकता दें. सैन्य कार्रवाई केवल बर्बादी लाती है, समाधान नहीं.
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