ईरान पर हमले से बढ़ी हलचल: दुनिया बोली 'संयम बरतें सभी पक्ष'
नई दिल्ली, 28 फरवरी (आईएएनएस)। ईरान पर हमले से पूरी दुनिया में हलचल मची हुई है। भारत में तमाम राजनीतिक दलों ने मध्य एशिया में रह रहे भारतीयों को लेकर फिक्र जाहिर की है। लगभग 12 देशों ने हवाई सेवाओं पर रोक लगा दी है और अपने-अपने देशवासियों को सतर्क रहने को भी कहा है।
यूके के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर कोबरा इमरजेंसी कमेटी की मीटिंग की अध्यक्षता कर रहे हैं, जहां ब्रिटेन यह तय कर रहा है कि ईरान पर यूएस-इजरायली बमबारी और खाड़ी में बेस पर तेहरान की जवाबी कार्रवाई का जवाब कैसे दिया जाए।
द गार्डियन के अनुसार एक सरकारी प्रवक्ता ने मीडिया से बातचीत में कहा, “ईरान को कभी भी न्यूक्लियर हथियार बनाने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए और इसलिए हमने बातचीत से समाधान तक पहुंचने की कोशिशों का लगातार समर्थन किया है। हमारी सबसे पहली प्राथमिकता इस इलाके में यूके के नागरिकों की सुरक्षा है और हम उन्हें 24/7 कॉन्सुलर मदद देंगे।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यूएन सिक्योरिटी काउंसिल की तत्काल बैठक बुलाने की मांग की है और कहा है कि उनका देश इस इलाके में अपने सबसे करीबी साझेदारों को “जरूरी संसाधन देने के लिए तैयार है।”
फ्रांस के मिडिल ईस्ट में कई मिलिट्री बेस हैं, खासकर कतर, यूएई, और जॉर्डन में; ये सभी देश ईरानी मिसाइलों के निशाने पर हैं।
उन्होंने कहा, जो तनाव बढ़ रहा है, वह सभी के लिए खतरनाक है। इसे रुकना चाहिए। ईरानी सरकार को यह समझना होगा और उनके बीच बातचीत के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। यह मिडिल ईस्ट में सभी की सिक्योरिटी के लिए बहुत जरूरी है।
यूरोपियन कमीशन की चीफ उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने संयम बरतने की अपील की और ईरान में हो रहे डेवलपमेंट को “बहुत चिंताजनक” बताया।
उन्होंने कहा: न्यूक्लियर सेफ्टी पक्का करनी चाहिए और ऐसे किसी भी काम को रोकने का प्रयास करना चाहिए जो तनाव को और बढ़ा सकता है या परमाणु अप्रसार प्रणाली को कमजोर कर सकता है।
रूसी विदेश मंत्रालय ने बताया कि रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ईरान के खिलाफ हमलों की निंदा की और अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से फोन पर बात की।
एक बयान में, मंत्रालय ने कहा, लावरोव ने ईरान पर यूएस और इजरायल के बिना उकसावे वाले हमले की निंदा की, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों और नियमों का उल्लंघन करता है।”
यूएन मानवाधिकार अध्यक्ष वोल्कर तुर्क ने बमबारी रोकने की अपील की और सभी पार्टियों से “तर्क” के आधार पर निर्णय लेने और बातचीत करने की गुजारिश की। उन्होंने कहा: बम और मिसाइलें मतभेदों को सुलझाने का तरीका नहीं हैं, बल्कि इनसे सिर्फ मौत, तबाही और इंसानी दुख ही होता है।
भारत दौरे पर आए कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी इस तनाव को कम करने की वकालत की है। एक बयान जारी कर कनाडा के रुख को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, कनाडा का रुख साफ है: इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का ह्यूमन राइट्स रिकॉर्ड दुनिया के सबसे खराब देशों में से एक है, और इसे कभी भी न्यूक्लियर हथियार हासिल करने या बनाने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत में माइक्रोन चिप प्लांट का ऐतिहासिक उद्घाटन, उद्योग जगत ने किया स्वागत
नई दिल्ली, 28 फरवरी (आईएएनएस)। भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (आईएसए) ने शनिवार को गुजरात के साणंद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अत्याधुनिक एटीएमपी (असेंबली, परीक्षण, मार्किंग और पैकेजिंग) सुविधा के उद्घाटन पर सरकार और अमेरिका स्थित माइक्रोन टेक्नोलॉजी को बधाई दी।
इस कार्यक्रम को भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताते हुए आईईएसए के अध्यक्ष अशोक चंदक, जो उद्घाटन समारोह में मौजूद थे, ने कहा कि यह केवल एक संयंत्र का उद्घाटन नहीं है, बल्कि उन्नत सेमीकंडक्टर डिजाइन और निर्माण में भारत के एक मजबूत और भरोसेमंद खिलाड़ी के रूप में उभरने की घोषणा है।
उन्होंने कहा, इतिहास को प्रत्यक्ष देखने का अवसर मिलना गर्व की बात है। प्रधानमंत्री के तीन शब्दों में - भारत तैयार है, भारत भरोसेमंद है और भारत परिणाम देता है - सब कुछ स्पष्ट हो गया। यह विश्व स्तरीय चिप इकोसिस्टम के निर्माण में राष्ट्र के आत्मविश्वास की एक सशक्त घोषणा थी।
माइक्रोन का 22,516 करोड़ रुपए (लगभग 2.75 अरब डॉलर) का निवेश भारत के विनिर्माण क्षेत्र में किसी वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनी द्वारा किए गए सबसे बड़े निवेशों में से एक है। इसके अलावा, कंपनी के भारत में डिजाइन केंद्र भी हैं।
यह संयंत्र डीआरएएम, एनएएनडी और सॉलिड-स्टेट ड्राइव (एसएसडी) जैसे उत्पादों का निर्माण करेगा। ये महत्वपूर्ण मेमोरी उपकरण एआई सिस्टम, उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग, स्मार्टफोन, डेटा सेंटर, ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स और अगली पीढ़ी के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को शक्ति प्रदान करते हैं।
मेमोरी निर्माण रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया के केवल कुछ ही देशों के पास यह क्षमता है।
एसोसिएशन ने कहा, एआई से जुड़ी मांग में तेजी और आपूर्ति संबंधी दबावों को देखते हुए, भारत में मेमोरी निर्माण की स्थापना समयानुकूल और परिवर्तनकारी कदम है।
इस मेमोरी प्लांट, माइक्रोन के मौजूदा डिजाइन केंद्रों और इस वर्ष शुरू होने वाली अन्य चिप असेंबली और परीक्षण सुविधाओं से भारत की सेमीकंडक्टर क्षमता कई गुना बढ़ेगी। इससे डिजाइन आधारित विनिर्माण और निर्यात संभावनाओं को भी मजबूती मिलेगी।
साणंद स्थित इस प्लांट से लगभग 5,000 प्रत्यक्ष और 15,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है, जिससे कुशल सेमीकंडक्टर कार्यबल तैयार होगा।
माइक्रोन के एटीएमपी संयंत्र की शुरुआत भारत की सेमीकंडक्टर नीति को व्यवहार में उतारने और निर्माण के लिए तैयार होने की दिशा में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
--आईएएनएस
डीबीपी/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation





















