मध्य पूर्व में उत्पन्न हो रही स्थिति और अंतरराष्ट्रीय हवाई संचालन पर इसके संभावित प्रभाव को देखते हुए, नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने सभी संबंधित हितधारकों के साथ तैयारियों और प्रतिक्रिया उपायों की व्यापक समीक्षा की है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा कि समीक्षा का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के कुछ हिस्सों में जारी किए गए कई हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों और नोटाम (अत्यावश्यक आपातकालीन सूचना आदेश) के मद्देनजर यात्रियों की सुरक्षा, परिचालन की निरंतरता और वास्तविक समय समन्वय सुनिश्चित करना था।
मंत्रालय ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सेवाएं संचालित करने वाली भारतीय एयरलाइनों को संबंधित अधिकारियों द्वारा जारी हवाई क्षेत्र संबंधी सलाह, नोटाम और मार्ग प्रतिबंधों की निरंतर निगरानी करने की सलाह दी गई है। एयरलाइनों को निर्देश दिया गया है कि वे वैश्विक सुरक्षा प्रोटोकॉल और स्थापित आकस्मिक योजना प्रक्रियाओं के अनुसार, जहां भी आवश्यक हो, उड़ानों का समय पर मार्ग परिवर्तन या डायवर्जन सुनिश्चित करें।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बताया कि भारतीय विमानन कंपनियों या विदेशों में मौजूद भारतीय नागरिकों से संबंधित किसी भी आपातकालीन स्थिति में सूचना के सुचारू प्रवाह और उचित समन्वय को सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय विदेश मंत्रालय के साथ भी निकट संपर्क में है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमले से पूरे पश्चिम एशिया सहित दुनिया के अन्य हिस्सों में हवाई यातायात प्रभावित हुआ है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएईए) और इजराइल ने शनिवार को अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। यूएई की एमिरेट्स और एतिहाद लंबी दूरी की उड़ानें संचालित करती हैं।
‘कतर एयरवेज ग्रुप’ ने कहा कि कतर का हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण उसने दोहा से आने-जाने वाली उड़ानें अस्थायी रूप से रद्द कर दी हैं। इजराइल जा रहे विमानों को अन्य हवाई अड्डों पर उतरने का निर्देश दिया गया और बेन गुरियन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ानों की प्रतीक्षा कर रहे यात्रियों को वापस भेज दिया गया। एमिरेट्स ने कहा कि यूएई के हवाई क्षेत्र के बंद होने से उसकी कई उड़ानें प्रभावित हुईं और यात्रियों से ऑनलाइन अपनी उड़ान की स्थिति जांचने का आग्रह किया। यह विमानन कंपनी दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से संचालित होती है, जो अंतरराष्ट्रीय यात्रा का सबसे व्यस्त केंद्र है।
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महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले मामले में दिवंगत उप मुख्यमंत्री अजित पवार और उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को बड़ी राहत मिली है। दरअसल, मुंबई की एक विशेष अदालत ने आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की उस रिपोर्ट को माना है, जिसमें महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक (शिखर बैंक) में लोन बांटते समय करीब 25,000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में अजित पवार और उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को क्लीन चिट मिली है। कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट को मंजूरी देकर कहा कि मामले में कोई भी सजा लायक अपराध साबित हुआ नहीं है।
खासतौर पर विशेष अदालत ने आर्थिक अपराध शाखा की दिवंगत उपमुख्यमंत्री की 'सी-समरी' रिपोर्ट को स्वीकार किया है। इससे अजित पवार सहित उन सभी राजनीतिक नेताओं को राहत की सांस मिली है, जिनका नाम इस घोटाले में आया था। आपको बता दें कि, अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट को मंजूरी देते हुए कहा कि कथित 25,000 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में कोई दंडनीय अपराध साबित नहीं हुआ है।
कई लोगों को क्लिन चिट मिली
मुंबई के विशेष अदालत ने आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा 5,000 करोड़ रुपये के महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (एमएससीबी) मामले में दायर की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया है, जिसके बाद से दिवंगत उपमुख्यमंत्री और उनकी पत्नी सुनेत्रा समेत अन्य 70 से अधिक लोगों को क्लीन चिट दी है।
कोई आपराधिक अपराध नहीं बनता
कोर्ट ने कहा है कि सहकारी चीनी कारखानों से जुड़े कथित लोन और वसूली अनियमितताओं में कोई आपराधिक अपराध नहीं बनता है। इस आदेश में ईओडब्ल्यू के इस निष्कर्ष का समर्थन किया है अजित पवार, सुनेत्रा पवार, उनके रिश्तेदारों और अन्य लोगों को इस संस्था से संबंधित लेन-देन में कोई आपराधिक अपराध नहीं था।
यह मामला 2019 में तब शुरू हुआ था जब बॉम्बे हाई कोर्ट ने एमएससीबी और जिला सहकारी बैंकों के खिलाफ लगे आरोपों के आधार पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। आरोप है कि इन बैंकों ने चीनी मिलों को ब्याज-मुक्त ऋण प्रदान किए, जिससे बैंक अधिकारियों और राजनेताओं से जुड़े व्यक्तियों के लिए विशेष ऋण खाते बनाए जा सकें। इसके अलावा, यह भी आरोप है कि बाद में कंपनियों ने अपनी इकाईयों की संपत्तियों को असाधारण रूप से कम कीमतों पर बेच दिया।
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