पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच 2600 किलोमीटर लंबी सीमा पर चल रहा तनाव अब खुले सैन्य टकराव का रूप ले चुका है। दोनों देशों ने एक दूसरे पर हवाई हमले, ड्रोन स्ट्राइक और सीमा चौकियों पर हमलों का आरोप लगाया है। इस तेजी से बिगड़ती स्थिति के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान की खुलकर प्रशंसा करते हुए उसके आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया है, जिससे क्षेत्रीय कूटनीति में नया मोड़ आ गया है।
तनाव की ताजा कड़ी उस समय शुरू हुई जब पाकिस्तान ने ऑपरेशन गजब लिल हक के तहत काबुल, कंधार और पक्तिया सहित कई स्थानों पर हवाई और मिसाइल हमले किए। पाकिस्तान का दावा है कि इन हमलों में 274 तालिबान लड़ाके और अधिकारी मारे गए। दूसरी ओर अफगान पक्ष ने कहा कि उसने जवाबी कार्रवाई में 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया, जबकि पाकिस्तान ने अपने 12 सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि की है। मीडिया रिपोर्टों में काबुल में हमलों के बाद कई स्थानों से काला धुआं उठता देखा गया और नागरिकों के हताहत होने की भी खबरें सामने आईं।
उधर, अफगानिस्तान में सत्ता पर काबिज तालिबान नेतृत्व ने हमलों के कुछ घंटों बाद संवाद की इच्छा जताई। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि इस्लामिक अमीरात हमेशा बातचीत के जरिये मसले सुलझाने की कोशिश करता रहा है और अब भी वह वार्ता के लिए तैयार है।
इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका की भूमिका विशेष ध्यान खींच रही है। अमेरिकी राजनीतिक मामलों की उप विदेश मंत्री एलिसन हुकर ने पाकिस्तान की विदेश सचिव आमना बलूच से बातचीत के बाद कहा कि अमेरिका स्थिति पर नजर रखे हुए है और तालिबान के हमलों के खिलाफ आत्मरक्षा करने के पाकिस्तान के अधिकार का समर्थन करता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तालिबान आतंकवाद विरोधी प्रतिबद्धताओं को निभाने में विफल रहा है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पाकिस्तान की नेतृत्व की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ उनके बहुत अच्छे संबंध हैं और वहां एक महान प्रधानमंत्री और महान जनरल हैं, जिनका वह सम्मान करते हैं। ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान बहुत बढ़िया प्रदर्शन कर रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने दोनों देशों के बीच खुले युद्ध जैसी स्थिति की बात कही है।
ट्रंप के इन बयानों को कूटनीतिक हलकों में पाकिस्तान के पक्ष में झुकाव के रूप में देखा जा रहा है। पहले जहां अमेरिका तालिबान के साथ समझौते और क्षेत्रीय स्थिरता की बात करता था, वहीं अब वह खुले तौर पर पाकिस्तान के आत्मरक्षा अधिकार का समर्थन कर रहा है। इससे यह संदेश जाता है कि वाशिंगटन इस संघर्ष में इस्लामाबाद के साथ खड़ा है। इससे अफगान तालिबान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पाकिस्तान के पक्ष में झुक सकता है।
इस टकराव का सामरिक महत्व बेहद गहरा है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा क्षेत्र पहले से ही उग्रवादी संगठनों की गतिविधियों का केंद्र रहा है। यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो इससे पूरे दक्षिण एशिया और मध्य एशिया में अस्थिरता फैल सकती है। चीन, ईरान और रूस जैसे देश भी इस क्षेत्र में अपने सामरिक हित रखते हैं। रूस ने सशस्त्र झड़पों में तेज वृद्धि पर चिंता जताते हुए दोनों देशों से वार्ता की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतरेस ने भी हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए तत्काल संघर्ष विराम और कूटनीतिक समाधान का आह्वान किया है।
यूरोपीय संघ ने भी अफगान क्षेत्र का उपयोग दूसरे देशों पर हमले के लिए न होने देने की बात दोहराई है। ब्रिटेन ने तनाव कम करने का आग्रह किया है, चीन ने युद्ध विराम की अपील की है और ईरान ने मध्यस्थता की पेशकश की है। इन प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि यह संघर्ष केवल द्विपक्षीय मामला नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक शक्तियां भी इसकी दिशा पर नजर रखे हुए हैं।
देखा जाये तो सामरिक दृष्टि से पाकिस्तान का काबुल और कंधार जैसे शहरों को निशाना बनाना महत्वपूर्ण संकेत है। यह पहली बार है जब उसने सीधे अफगान शासन संरचना को लक्ष्य बनाया है। वहीं अफगानिस्तान की जवाबी ड्रोन कार्रवाई यह दिखाती है कि वह भी सैन्य स्तर पर जवाब देने में सक्षम है।
बहरहाल, ट्रंप के बयानों ने इस पूरे संकट को और संवेदनशील बना दिया है। यदि अमेरिका खुलकर पाकिस्तान के साथ खड़ा रहता है तो यह तालिबान को और अलग थलग कर सकता है। दूसरी ओर, इससे क्षेत्रीय ध्रुवीकरण बढ़ सकता है और संघर्ष के और व्यापक होने का खतरा भी पैदा हो सकता है। फिलहाल स्थिति बेहद नाजुक है और संवाद ही एकमात्र रास्ता नजर आता है, लेकिन जमीनी हालात बताते हैं कि दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई काफी गहरी हो चुकी है।
शनिवार सुबह ईरान की राजधानी तेहरान में धमाकों की आवाजें सुनाई दीं, जिसके बाद इजरायल ने ईरान पर हमले की पुष्टि की। इजरायल भर में सायरन बजाए गए, क्योंकि सेना ने कहा कि 'जनता को इजरायल की ओर मिसाइल दागे जाने की संभावना के लिए तैयार करने के लिए एहतियाती चेतावनी जारी की गई है।' यह हमला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ईरान वार्ता से असंतुष्ट होने और एक बड़ा फैसला लिए जाने की बात कहने के कुछ घंटों बाद हुआ है।
Ranji Trophy Final: जम्मू-कश्मीर ने इतिहास रच दिया। 2025-26 रणजी ट्रॉफी फाइनल में उसने सितारों से सजी कर्नाटक टीम को हराकर पहली बार खिताब अपने नाम कर लिया। तेज गेंदबाज आकिब नबी की घातक गेंदबाज़ी और शुभम पुंडीर और कमरान इक़बाल के शतकों ने इस जीत की नींव रखी। यह वही टीम है, जिसे कभी ज़्यादातर प्रतिद्वंद्वी हल्के में लेते थे लेकिन इस बार उसने सबको जवाब दे दिया।
फाइनल में आकिब नबी ने गेंद से कमाल दिखाया। पहली पारी में शुभम पुंडीर ने शतक जड़कर टीम को मज़बूत स्थिति में पहुंचाया। दूसरी पारी में क़मरान इक़बाल ने सेंचुरी ठोक दी और कर्नाटक पर दबाव बना दिया। इन तीनों के प्रदर्शन ने मैच का रुख पूरी तरह जम्मू-कश्मीर की ओर मोड़ दिया।
जम्मू-कश्मीर पहली बार बना चैंपियन यह खिताब इसलिए भी खास है क्योंकि टीम का रणजी सफर आसान नहीं रहा। जम्मू-कश्मीर ने 1960 में अपना पहला मैच खेला था लेकिन पहली जीत उन्हें 1982 में 99वें मुकाबले में मिली। दिलचस्प बात यह है कि उसी साल कर्नाटक ने अपना तीसरा खिताब जीता था। 2025-26 का फाइनल उनके रणजी इतिहास का 346वां मैच था और यह सिर्फ 47वीं जीत थी।
इस सीज़न में टीम ने कमाल का प्रदर्शन किया। पूरे टूर्नामेंट में उन्हें सिर्फ एक हार मिली, जो श्रीनगर में मुंबई के खिलाफ आई थी। इसके अलावा उन्होंने लगातार शानदार क्रिकेट खेली और फाइनल तक का सफर तय किया। 66 साल के लंबे इंतज़ार के बाद आया यह खिताब सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि मेहनत, धैर्य और भरोसे की जीत है। जम्मू-कश्मीर ने दिखा दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो इतिहास बदला जा सकता है।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी इस ऐतिहासिक दिन को करीब से देखने के लिए शुक्रवार शाम को ही हुबली पहुंचे थे और टीम के पहले खिताब के गवाह भी बने। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'हम J&K क्रिकेट टीम को रणजी ट्रॉफी का फाइनल खेलने के लिए चीयर करने हुबली जा रहे। उन्होंने फाइनल में पहुंचकर लाखों लोगों को अपनी उपलब्धियों पर गर्व महसूस कराया है। मैं कल स्टैंड्स में उनका हौसला बढ़ाने के लिए सच में उत्सुक हूं।'
मैच का पूरा हाल रणजी ट्रॉफी फाइनल की पहली गेंद से ही जम्मू-कश्मीर ने इरादे साफ कर दिए थे। कप्तान पारस डोगरा ने अहम टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी चुनी। पिच को देखते हुए अंदाज़ा था कि चौथे-पांचवें दिन दरारें दिखेंगी, और डोगरा का दांव बिल्कुल सही बैठा।
पहली पारी में जम्मू-कश्मीर ने 584 रन ठोक दिए। कर्नाटक को करीब सात सेशन तक मैदान में पसीना बहाना पड़ा। नंबर-3 पर उतरे शुभम पुंडीर ने 121 रन की शानदार पारी खेली। डोगरा (70), यावर हसन (88), अब्दुल समद (61), कनहैया वाधवान (70) और साहिल लोटरा (72) ने अर्धशतक जमाकर स्कोर पहाड़ जैसा बना दिया। कर्नाटक के गेंदबाज़ पूरी तरह दबाव में दिखे।
आकिब नबी ने पहली पारी में 5 विकेट झटके मैच के दौरान दोनों टीमों के बीच तनातनी भी रही। एक विवादित पल में डोगरा ने सब्स्टीट्यूट फील्डर केवी अवनीश को हेड-बट कर दिया। बाद में उन्होंने इसे ‘हीट ऑफ द मोमेंट’ बताया, लेकिन 41 साल के कप्तान पर मैच फीस का 50 फीसदी जुर्माना लगा।
कहावत है कि पिच को तब तक मत आंकिए जब तक दोनों टीमें बल्लेबाज़ी न कर लें। तेज़ गेंदबाज़ आकिब नबी ने इसे सच कर दिखाया। इस सीज़न के सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले नबी ने कर्नाटक की कमर तोड़ दी। उन्होंने पहले राहुल (13) को आउट किया, फिर लगातार दो गेंदों पर करुण नायर (0) और स्मरण रविचंद्रन (0) को चलता किया। स्कोर 57/4 हो गया। मयंक अग्रवाल ने 160 रन बनाकर लड़ाई लड़ी, लेकिन नबी के आगे वो भी फीके पड़ गए। नबी ने सीज़न का सातवां फाइफर लिया, कुल 60 विकेट पूरे किए और इतिहास में तीसरे ऐसे तेज़ गेंदबाज़ बने जिन्होंने एक सीज़न में 60+ विकेट झटके।
291 रन की बढ़त के बाद दूसरी पारी में शुरुआत डगमगाई। प्रसिद्ध कृष्णा और विजयकुमार वैशाख ने यावर (1) और पुंडीर (4) को जल्दी आउट कर दिया। लेकिन क़मरान इक़बाल ने मोर्चा संभाला। उन्होंने 159* की नाबाद पारी खेली, वहीं साहिल लोटरा 101* पर डटे रहे। टीम ने 342/4 पर पारी घोषित की।
मैच ड्रॉ रहा था लेकिन 633 रन की विशाल बढ़त के दम पर ट्रॉफी जम्मू-कश्मीर के नाम रही। 2025–26 सीज़न में टीम को सिर्फ एक हार मिली- ओपनर में मुंबई के खिलाफ। नॉकआउट में मध्य प्रदेश और बंगाल को हराकर फाइनल में पहुंची इस टीम ने आखिरकार इतिहास रच दिया।
संक्षिप्त स्कोर: जम्मू-कश्मीर 584 और 342/4 घोषित; कर्नाटक 293। नतीजा: मैच ड्रॉ, लेकिन जम्मू-कश्मीर बना चैंपियन।