ChakraView | Sumit Awasthi | SIR में नाम कटने वाले मतदाताओं से मिले राहुल गांधी #shorts #rahulgandhi
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मस्जिदों की आबादी और नई पीढ़ी की शिक्षा पर मौलाना अरशद मदनी ने दिया जोर
जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि मस्जिदें इस्लाम और मुस्लिम समाज की धार्मिक पहचान का अहम हिस्सा हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि आज जिन मस्जिदों को शहीद किया जा रहा है, वे इंशाअल्लाह फिर से आबाद होंगी. उन्होंने कहा कि इतिहास में कई बार इस्लाम को मिटाने की कोशिशें हुईं, लेकिन धर्म और आस्था लोगों के दिलों में कायम रहे.
मौलाना अरशद मदनी मंगलवार को दारुल उलूम देवबंद में आयोजित राब्ता-ए-मदारिस इस्लामिया के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने मदरसों की भूमिका, बच्चों की धार्मिक और नैतिक शिक्षा तथा नई पीढ़ी को सही दिशा देने की जरूरत पर विस्तार से बात की. मौलाना मदनी ने कहा कि मदरसे केवल पढ़ाई कराने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि धार्मिक शिक्षा और परंपराओं को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. उन्होंने कहा कि मदरसों के ऐतिहासिक योगदान को समझना जरूरी है. दारुल उलूम देवबंद के विद्वानों ने देश की आजादी की लड़ाई में भी योगदान दिया था. आज भी इन संस्थानों से जुड़े लोग धार्मिक शिक्षा और समाज सेवा के काम में लगे हुए हैं.
इतिहास को सही तरीके से समझने की जरूरत
उन्होंने मदरसों के बारे में गलत धारणाएं फैलाए जाने पर चिंता जताई. उनका कहना था कि इन संस्थानों के काम और इतिहास को सही तरीके से समझने की जरूरत है. मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण और उनके व्यवहार को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए. बच्चों की परवरिश पर जोर देते हुए मौलाना मदनी ने कहा कि उनकी धार्मिक और नैतिक शिक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ मदरसों की नहीं है. माता-पिता को भी बच्चों के संस्कार, आचरण और धार्मिक समझ पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के साथ सही और गलत की पहचान कराना भी जरूरी है. परिवार और शिक्षण संस्थान मिलकर इस दिशा में बेहतर काम कर सकते हैं.
कई देशों में मस्जिदें फिर से आबाद हुईं
अपने संबोधन में उन्होंने सोवियत संघ का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी लंबे समय तक धार्मिक गतिविधियों पर पाबंदियां लगाई गई थीं, लेकिन लोगों की आस्था खत्म नहीं हुई. बाद में वहां से अलग हुए कई देशों में मस्जिदें फिर से आबाद हुईं और धार्मिक गतिविधियां शुरू हुईं. उन्होंने कहा कि इतिहास से यह सीख मिलती है कि धर्म और आस्था लोगों के जीवन का गहरा हिस्सा होते हैं.
समझदारी और एकता बनाए रखना जरूरी
मौलाना मदनी ने कहा कि मस्जिदों की इमारतों को नुकसान पहुंचने के बावजूद लोगों का विश्वास कायम रह सकता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि आज जो मस्जिदें शहीद की जा रही हैं, वे भविष्य में फिर आबाद होंगी और वहां अजान की आवाज सुनाई देगी. अंत में उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि वे अपने बच्चों की शिक्षा, नैतिक मूल्यों और धार्मिक समझ पर विशेष ध्यान दें. साथ ही मदरसों को मजबूत बनाने और नई पीढ़ी को सही दिशा देने के लिए मिलकर काम करें. उन्होंने कहा कि मुश्किल हालात में भी धैर्य, समझदारी और एकता बनाए रखना जरूरी है.
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