Holi Vastu Tips: होली से पहले घर से तुरंत निकाल दे ये 5 बेकार चीजें, वरना बढ़ा सकती हैं राहु दोष
Holi Vastu Tips: वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल होली का त्योहार 4 मार्च 2026 को पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाएगा. हालांकि इस रंगों के त्योहार की तैयारियां कई दिन पहले से ही शुरू हो जाती है. हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लोग होली से पहले घर की सफाई सजावट और व्यवस्था पर विशेष ध्यान देते हैं ताकि त्योहार के दिन घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रही. वास्तु शास्त्र के अनुसार, होली से पहले की जाने वाली सफाई केवल धूल-मिट्टी हटाने तक सीमित नहीं है बल्कि इसका उद्देश्य घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करना भी होता है.
मान्यता है कि घर में मौजूद कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिनका लंबे समय तक जमा रहना अशुभ माना जाता है. ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि होली के दिन की गई पूजा और शुभ कार्यों का पूरा लाभ मिले और घर में सुख-शांति बनी रहे तो होली से पहले इन अशुभ मानी जाने वाली चीजों को घर से बाहर निकाल देना बेहद जरूरी माना जाता है. आइए जानते हैं वे कौन सी चीजें हैं जिन्हें होली से पहले हटा देना चाहिए.
होली से पहले घर से कौन सी चीजें निकालनी चाहिए
टूटा शीशा और चटके हुए बर्तन
वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर आपके घर में कोई टूटा हुआ शीशा या दरार वाले बर्तन हैं तो उन्हें तुरंत घर से निकाल दें. टूटा हुआ शीशा मानसिक अशांति पैदा करता है और सकारात्मक ऊर्जा के बहाव को रोकता है. रसोई में चटके हुए बर्तन रखने से घर की बरकत रुक जाती है इसलिए उन्हें बदलना बेहद जरूरी है.
टूटी हुई मूर्तियां
अगर आपके घर में देवी-देवताओं की टूटी हुई मूर्तियां रखी है तो होली से पहले उसे हटा दें. वास्तु शास्त्र के अनुसार, ऐसी मूर्तियों की पूजा करने से पूरा फल नहीं मिलता. होली आने से पहले इन मूर्तियों को सम्मान के साथ किसी पवित्र नदी में विसर्जित कर दें या मिट्टी में दबा दें. मंदिर साफ रखने से मन को शांति मिलती है.
खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान
इसके अलावा होली से पहले पुराने बंद मोबाइल, बिजली का कोई भी टूटा सामान या फिर खराब घड़ी कबाड़ बढ़ाता है. वास्तु में कहा गया है कि खराब मशीनें राहु दोष बढ़ाती हैं जिससे अचानक धन की हानि हो सकती है. होली पर अपने घर को इस कबाड़ से मुक्त करें और नई ऊर्जा के स्वागत के लिए तैयार रहें.
टूटे जूते और चप्पल
वास्तु शास्त्र के अनुसार, पुराने और फटे हुए जूते-चप्पल घर के किसी कोने में पड़े रहना शुभ नहीं होता. माना जाता है कि ये हमारी तरक्की में बाधा डालते हैं और आर्थिक तंगी लाते हैं. होली की सफाई के दौरान ऐसे सभी जूतों को घर से बाहर निकाल दें. इससे आपको जीवन के संघर्ष कम होंगे और रास्ते आसान होंगे.
सूखे और मुरझाए पौधे
अक्सर हम बालकनी में रखे सूखे पौधों को अनदेखा कर देते हैं. वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि सूखे पौधे दुख और रुके हुए काम का संकेत माने जाते हैं. ये घर की सकारात्मकता को सोख लेते हैं. होली से पहले इन सूखे गमलों को साफ करें और उनकी जगह नए, हरे-भरे पौधे लगाएं ताकि घर में खुशहाली आए.
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. न्यूज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
पीएम मोदी आज साणंद में 22,516 करोड़ रुपये के सेमीकंडक्टर संयंत्र का उद्घाटन करेंगे
नई दिल्ली, 28 फरवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को साणंद में एक एडवांस सेमीकंडक्टर असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (एटीएमपी) फेसेलिटी का उद्घाटन करेंगे। इस उद्घाटन को राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर मिशन के तहत भारत की सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग महत्वाकांक्षाओं में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
माइक्रोन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की साणंद इकाई को 22,516 करोड़ रुपये के निवेश से विकसित किया गया है। यह सुविधा वैश्विक बाजारों के लिए लक्षित सॉलिड स्टेट ड्राइव (एसएसडी), रैम-प्रकार के डीआरएएम और नैंड उपकरणों सहित सेमीकंडक्टर मेमोरी प्रोडक्टों की असेंबली, परीक्षण, मार्किंग और पैकेजिंग का काम करेगी।
अधिकारियों ने जानकारी दी है कि मौजूदा वक्त में इस संयंत्र में 2,000 कर्मचारियों की एक टीम कार्यरत है। उन्होंने बताया कि आने वाले वर्षों में कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे लगभग 5,000 लोगों को रोजगार मिलेगा। कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि इस संयंत्र में दिव्यांगजनों को भी ऑपरेटर और टेक्नीशियन के रूप में रोजगार दिया गया है और कौशलयुक्त व्यक्तियों के लिए मौका उपलब्ध है।
यह परियोजना निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्यान्वित की गई है, और राज्य सरकार का कहना है कि गुजरात भारत में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। माइक्रोन टेक्नोलॉजी के अध्यक्ष और सीईओ, संजय मेहरोत्रा ने उभरती टेक्नोलॉजी मेमोरी और स्टोरेज के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कहा कि आज के तकनीकी युग में, विशेष रूप से एआई में, मेमोरी और स्टोरेज की महत्वपूर्ण भूमिका है। मजबूत मेमोरी और स्टोरेज सपोर्ट के बिना, एआई सिस्टम ठीक से काम नहीं कर सकते। उन्होंने आगे कहा कि जैसे-जैसे एआई के प्रयोग तेज और वास्तविक समय में प्रतिक्रियाएं देने और एडवांस मेमोरी सॉल्यूशंस की आवश्यकता बढ़ती जा रही है।
बता दें कि एटीएमपी संयंत्र में उपयोग होने वाली सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया रेत से शुरू होती है, जिससे शुद्ध सिलिकॉन निकाला जाता है। इस सिलिकॉन को पिघलाकर लंबे बेलनाकार आकार (इंगट) में ढाला जाता है, जिन्हें पतली वेफर्स में काटा जाता है।
फेब्रिकेशन प्लांट में इन वेफर पर खास इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन बनाए जाते हैं और फोटोलिथोग्राफी के माध्यम से कई परतें चढ़ाई जाती हैं, जिससे ट्रांजिस्टर बनते हैं और मेमोरी स्ट्रक्चर तैयार होती हैं। इसके बाद वेफर्स को अलग-अलग चिप्स में काटा जाता है। इन चिप्स को साणंद स्थित एटीएमपी संयंत्र में भेजा जाता है। वहां इनकी असेंबली की जाती है और फिर इनकी गुणवत्ता की जांच होती है। जांच के दौरान चिप की गति, मेमोरी क्षमता और भरोसेमंद काम करने की क्षमता को परखा जाता है।
सभी टेस्ट पूरे होने के बाद चिप पर जरूरी जानकारी दर्ज की जाती है और उसे पैक करके बाजार में भेजने के लिए तैयार किया जाता है।
साणंद की यह फैक्ट्री कंपनी की दुनिया भर में स्थित इकाइयों में बने एडवांस डीआरएएम और नैंड वेफर को प्रोसेस करेगी और उन्हें तैयार मेमोरी उत्पाद में बदलेगी।
कंपनी ने कहा कि यह उत्पादन अंतरराष्ट्रीय बाजारों की जरूरतों को पूरा करेगा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम में उपयोग किए जाने वाले मेमोरी और स्टोरेज समाधानों सहित बढ़ती मांग को पूरा करने में सहायक होगा।
--आईएएनएस
एसडी/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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