अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने सभी फेडरल एजेंसियों को एआई कंपनी एंथ्रोपिक की बनाई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल तुरंत बंद करने का ऑर्डर दिया है। साथ ही, सीईओ सैम ऑल्टमैन ने अनाउंस किया कि ओपनएआई ने क्लासिफाइड सरकारी नेटवर्क पर अपने एआई मॉडल्स को डिप्लॉय करने के लिए अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ़ वॉर के साथ एक नया एग्रीमेंट साइन किया है।
यह झगड़ा इस बात पर शुरू हुआ कि एआई टूल्स का इस्तेमाल लड़ाई में कैसे किया जा सकता है। एंथ्रोपिक ने अपने एआई सिस्टम को पूरी तरह से ऑटोनॉमस हथियारों या बड़े पैमाने पर घरेलू निगरानी के लिए इस्तेमाल करने की इजाज़त देने के खिलाफ साफ स्टैंड लिया है। कंपनी का कहना है कि उसकी टेक्नोलॉजी में पहले से ही सेफ्टी लिमिट हैं जिन्हें हटाया नहीं जाना चाहिए। हालांकि, इस बात की खबर है कि इस रुख से पेंटागन के साथ तनाव पैदा हो गया। डिपार्टमेंट ऑफ़ वॉर पहले से ही एंथ्रोपिक को “सप्लाई-चेन रिस्क” के तौर पर लेबल करने पर विचार कर रहा था, जिससे उसे भविष्य के डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट से रोका जा सकता था। स्थिति तब और बिगड़ गई जब ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर घोषणा की कि सभी फेडरल एजेंसियों को एंथ्रोपिक की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए। ट्रंप ने लिखा कि हमें इसकी ज़रूरत नहीं है, हम इसे नहीं चाहते हैं, और हम उनके साथ दोबारा बिज़नेस नहीं करेंगे।" उन्होंने कंपनी पर मिलिट्री पर दबाव बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया और दावा किया कि उसके कामों से अमेरिकी सैनिकों और नेशनल सिक्योरिटी को खतरा हो सकता है। जो डिपार्टमेंट अभी इसके प्रोडक्ट्स इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें छह महीने का ट्रांज़िशन पीरियड दिया गया है। एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने कंपनी की बात का बचाव करते हुए कहा कि यह अपने क्लाउड एआई सिस्टम में बने सेफ्टी प्रोटेक्शन को कमज़ोर नहीं करेगी।
OpenAI ने नई डिफेंस डील की शुरुआत की
ट्रंप के निर्देश के तुरंत बाद, OpenAI ने कन्फर्म किया कि उसका डिपार्टमेंट ऑफ़ वॉर के साथ एक एग्रीमेंट हो गया है। सैम ऑल्टमैन ने कहा कि OpenAI अपने AI सिस्टम को कड़े नियमों के तहत सुरक्षित, क्लासिफाइड नेटवर्क पर डिप्लॉय करेगा। उन्होंने बताया कि यह एग्रीमेंट दो खास प्रिंसिपल्स पर आधारित है:
घरेलू लेवल पर कोई मास सर्विलांस नहीं
इंसानों को ताकत के इस्तेमाल से जुड़े किसी भी फैसले के लिए ज़िम्मेदार रहना होगा, जिसमें ऑटोनॉमस हथियार भी शामिल हैं। ऑल्टमैन ने कहा कि ये प्रिंसिपल्स कॉन्ट्रैक्ट में साफ तौर पर लिखे गए हैं और मौजूदा US कानूनों के मुताबिक हैं। ऑल्टमैन के मुताबिक, OpenAI डिपार्टमेंट ऑफ़ वॉर के अंदर स्पेशल इंजीनियर्स को रखेगा ताकि यह मॉनिटर किया जा सके कि AI मॉडल्स का इस्तेमाल कैसे किया जाता है और यह पक्का किया जा सके कि सेफ्टी स्टैंडर्ड्स का पालन किया जा रहा है।
तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश सरकार ने एक सप्ताह के भीतर सेना में दूसरी बार व्यापक फेरबदल करते हुए स्पष्ट संकेत दिया है कि सत्ता और सुरक्षा ढांचे में किसी भी तरह के बाहरी प्रभाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम आपको बता दें कि पूर्व की अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस के कार्यकाल में पाकिस्तान समर्थक अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया गया था, जबकि नये प्रधानमंत्री अब चुन चुन कर ऐसे अधिकारियों को पदों से हटाकर बाहर का रास्ता दिखा रहे हैं। बताया जा रहा है कि हालिया तबादलों में वह उच्च स्तरीय अधिकारी भी शामिल हैं जिनकी भूमिका को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे।
तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश सरकार ने एक सप्ताह के भीतर सेना में दूसरी बार जो व्यापक फेरबदल किया है उनमें वह अधिकारी शामिल हैं जो पाकिस्तान समर्थक और जमात समर्थक भूमिका को लेकर आलोचना का सामना कर रहे थे। कुछ पर यह आरोप भी था कि वह सेना प्रमुख वेकर उज जमान पर पूर्व मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के समर्थन से दबाव बनाए हुए थे।
सूत्रों का कहना है कि इस कदम से सेना प्रमुख वेकर उज जमान की स्थिति और मजबूत हुई है। यह फेरबदल केवल सेना तक सीमित नहीं है, बल्कि तारिक नेतृत्व वाली सरकार प्रशासनिक ढांचे में भी व्यापक बदलाव कर रही है। अंतरिम सरकार के दौरान संविदा पर नियुक्त कई अधिकारियों की सेवाएं समाप्त की जा रही हैं। इसे सत्ता संरचना में स्थायित्व लाने और पुराने प्रभाव तंत्र को समाप्त करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
सूत्रों ने दावा किया कि इस कार्रवाई से सेना के भीतर पुराने जमात समर्थक और पाकिस्तान समर्थक उच्च स्तरीय अधिकारियों की श्रृंखला टूट गई है। अन्य सेवाओं में भी विपक्षी जमात-ए-इस्लामी से निकटता रखने वाले कई अधिकारियों को हटाया गया है। इनमें अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण के मुख्य अभियोजक ताजुल इस्लाम का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है।
सेना प्रमुख वेकर उज जमान को हालिया आम चुनावों के संचालन में सशस्त्र बलों के व्यापक समर्थन का श्रेय दिया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना 2024 में अपनी सरकार के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शनों के बीच सैन्य हेलिकॉप्टर से भारत चली गई थीं। वेकर उज जमान को उनका रिश्तेदार भी बताया जाता है। इस राजनीतिक पृष्ठभूमि के चलते सेना के भीतर शक्ति संतुलन का प्रश्न और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
जहां तक बांग्लादेश में हुए फेरबदल की बात है तो आपको बता दें कि 26 फरवरी को रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद शाहीनुल हक, जो राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के कमांडेंट थे, उनको क्वार्टरमास्टर जनरल नियुक्त किया गया है। वहीं मेजर जनरल हुसैन अल मोर्शेद, जो 19वीं इन्फैंट्री डिवीजन और घाताइल क्षेत्र के जनरल आफिसर कमांडिंग थे, उनको सेना मुख्यालय में नया एडजुटेंट जनरल बनाया गया है। उन्होंने मेजर जनरल एमडी हकीमुज्जमान का स्थान लिया है, जिन्हें अब सैन्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान का कमांडेंट बनाया गया है।
इससे पहले 22 फरवरी को हुए फेरबदल में चीफ आफ जनरल स्टाफ, प्रिंसिपल स्टाफ आफिसर और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फोर्सेस इंटेलिजेंस के प्रमुखों को बदला गया था। इससे पूर्व प्रधानमंत्री कार्यालय के सचिव सहित 13 अधिकारियों को उनके पदों से हटाया गया था। इनमें से आठ अधिकारी अंतरिम सरकार द्वारा संविदा के आधार पर नियुक्त किए गए थे।
देखा जाये तो बांग्लादेश की सैन्य पुनर्संरचना के गहरे सामरिक निहितार्थ हैं। किसी भी देश की सुरक्षा नीति में सेना प्रमुख की निर्णायक भूमिका होती है। यदि शीर्ष स्तर पर मतभेद या वैचारिक विभाजन हो तो राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। इस फेरबदल से नेतृत्व के प्रति निष्ठा सुनिश्चित करने की कोशिश समझी जा रही है। साथ ही बांग्लादेश की भौगोलिक स्थिति उसे दक्षिण एशिया में सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। भारत, म्यांमार और बंगाल की खाड़ी से घिरा यह देश क्षेत्रीय संतुलन में अहम भूमिका निभाता है। सेना के भीतर पाकिस्तान समर्थक प्रभाव को समाप्त करने का प्रयास क्षेत्रीय कूटनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है, विशेषकर भारत बांग्लादेश संबंधों के संदर्भ में।
बहरहाल, विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह फेरबदल बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति, नागरिक सैन्य संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य को नई दिशा दे सकता है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि ढाका में सत्ता के केंद्र में बैठी सरकार सेना के भीतर अपने विश्वासपात्र नेतृत्व को स्थापित कर स्थायित्व और नियंत्रण सुनिश्चित करना चाहती है।
T20 WC Semi-Final Scenario: आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 में सेमीफाइनल की 2 सीटें पक्की हो चुकी लेकिन बाकी दो के लिए अभी रस्साकशी जारी है। सुपर-8 चरण में 8 टीमें दो ग्रुप में बंटी हैं और हर ग्रुप से टॉप-2 टीमें ही सेमीफाइनल में जाएंगी। भारत, साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे ग्रुप-ए में हैं जबकि ग्रुप-ए में इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, श्रीलंका और पाकिस्तान हैं।
अब जानते हैं कि ग्रुप-ए में कैसा समीकरण बन रहा। ग्रुप 1 का हाल साउथ अफ्रीका (4 अंक, +2.890 नेट रनरेट) 2024 के फाइनलिस्ट दक्षिण अफ्रीका ने सेमीफाइनल में जगह पक्की कर ली है। पहले भारत की 12 मैचों की अजेय लय तोड़ी, फिर वेस्टइंडीज को 9 विकेट से हराया। वेस्टइंडीज ने 176/8 बनाए लेकिन साउथ अफ्रीका ने 16.1 ओवर में 1 विकेट खोकर इस लक्ष्य को हासिल कर लिया। कप्तान एडेन मार्करम ने नाबाद 82 ठोके। अब जिम्बाब्वे पर जीत उन्हें ग्रुप-1 में टॉप पर पहुंचा देगी।
वेस्टइंडीज का हाल (2 अंक, +1.791 नेट रनरेट) 2 बार की चैंपियन टीम की अजेय लय दक्षिण अफ्रीका ने तोड़ी। अब समीकरण साफ है कि रविवार को ईडन गार्डन्स में भारत को हराओ, तो सेमीफाइनल; हार गए तो बाहर। जिम्बाब्वे पर जीत से उन्होंने सुपर-8 की शुरुआत की थी लेकिन अब सब कुछ भारत मैच पर टिका है।
भारत की स्थिति (2 अंक, -0.100 नेट रनरेट) जिम्बाब्वे पर जीत से भारत की उम्मीद जिंदा है। गणित आसान है कि वेस्टइंडीज को हराओ और सेमीफाइनल में पहुंचो; हारो और बाहर। अगर भारत क्वालिफाई करता है तो ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहने की संभावना है और सेमीफाइनल में ग्रुप-2 की टॉप टीम से उसकी टक्कर होगी। यानी इंग्लैंड से भिड़ने की ज्यादा संभावना है।
जिम्बाब्वे (0 अंक, -4.475 नेट रनरेट) वेस्टइंडीज और भारत से हार के बाद जिम्बाब्वे की सेमीफाइनल की राह बंद हो गई। अब जिम्बाब्वे का आखिरी मैच दक्षिण अफ्रीका से दिल्ली में है, सिर्फ सम्मान की लड़ाई।
ग्रुप 2 का हाल
इंग्लैंड की स्थिति (6 अंक, +1.096 नेट रनरेट) इंग्लैंड ने ग्रुप-2 में टॉप करते हुए सेमीफाइनल पक्का कर लिया। श्रीलंका और पाकिस्तान को हराने के बाद न्यूजीलैंड पर जीत ने उनकी बढ़त मजबूत की। विल जैक्स ने फिर कमाल किया, 2 विकेट और 18 गेंदों पर नाबाद 32, टूर्नामेंट में चौथी बार प्लेयर ऑफ द मैच बने।
न्यूजीलैंड (3 अंक, +1.390 नेट रनरेट) न्यूजीलैंड दूसरे स्थान पर है लेकिन पाकिस्तान-श्रीलंका मैच पर उनकी नजर रहेगी। पाकिस्तान की बड़ी जीत उन्हें बाहर कर सकती। इंग्लैंड से हार ने ब्लैककैप्स को दबाव में ला दिया, हालांकि श्रीलंका पर 61 रन की जीत से उन्होंने वापसी की थी।
पाकिस्तान के लिए करो या मरो वाली स्थिति (1 अंक, -0.461 नेट रनरेट) पाकिस्तान के पास एक ही रास्ता है- शनिवार को श्रीलंका को 65+ रन से हराए या लक्ष्य करीब 13 ओवर में हासिल करें, ताकि नेट रन रेट में न्यूजीलैंड से आगे निकल सकें। सटीक ओवर-रन का हिसाब पहली पारी के स्कोर पर निर्भर करेगा।
उदाहरण के तौर पर 140 के लक्ष्य को 13 ओवर में, 145 को 13.3 ओवर में और 146 को 13.4 ओवर में हासिल करना होगा। न्यूजीलैंड के साथ मैच धुल गया था, वहीं इंग्लैंड से करीबी हार ने मामला पेचीदा कर दिया। अच्छी खबर यह कि साहिबजादा फरहान (283 रन) को एक एडिशन में सबसे ज्यादा रन के रिकॉर्ड के लिए 37 रन चाहिए- यह रिकॉर्ड फिलहाल 319 रन के साथ विराट कोहली के नाम है।
श्रीलंका की स्थिति (0 अंक, -2.800 नेट रनरेट) ऑस्ट्रेलिया को हराने के बाद टीम लय नहीं पकड़ सकी। जिम्बाब्वे, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड से हारकर बाहर हो चुकी है। अब पाकिस्तान के खिलाफ मैच सिर्फ इज्जत की लड़ाई है। कुल मिलाकर, दो सीटें तय- दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड। बाकी दो के लिए भारत-वेस्टइंडीज और पाकिस्तान-श्रीलंका मुकाबले असली फैसला करेंगे। नेट रन रेट का खेल है, हर रन की कीमत है।