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बैटरी की टेंशन खत्म! 8 साल तक वारंटी वाले टॉप 5 EV स्कूटर, ओला से लेकर एथर तक शामिल

अगर आप पहली बार इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने की सोच रहे हैं, तो भरोसेमंद होना आपकी प्राथमिकता में सबसे ऊपर होना चाहिए. बाजार में कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन कुछ मॉडल अपनी लंबी वारंटी के कारण खास पहचान बनाते हैं. खासकर बैटरी पैक, जो स्कूटर का सबसे महंगा और अहम हिस्सा होता है, उस पर ज्यादा वारंटी मिलना बड़ी राहत देता है.

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15 करोड़ की गाड़ी छुड़ाने के लिए जमा करने होंगे 8 करोड़… कानपुर के लैंबॉर्गिनी कार मामले में कोर्ट का फैसला

कानपुर के चर्चित लैंबॉर्गिनी एक्सीडेंट मामले में कोर्ट ने आखिरकार गाड़ी रिलीज करने का आदेश दे दिया है. सीजेएम सूरज मिश्रा की कोर्ट ने ₹8.3 करोड़ के पर्सनल बॉन्ड और सख्त शर्तों पर यह फैसला सुनाया. गाड़ी न बेचने, न ट्रांसफर करने और न ही उसका रंग-रूप बदलने की शर्त रखी गई है.

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  Sports

Ranji Trophy Final: 346 मैच और 66 साल का सूखा खत्म, जम्मू-कश्मीर ने पहली बार जीती रणजी ट्रॉफी

Ranji Trophy Final: जम्मू-कश्मीर ने इतिहास रच दिया। 2025-26 रणजी ट्रॉफी फाइनल में उसने सितारों से सजी कर्नाटक टीम को हराकर पहली बार खिताब अपने नाम कर लिया। तेज गेंदबाज आकिब नबी की घातक गेंदबाज़ी और शुभम पुंडीर और कमरान इक़बाल के शतकों ने इस जीत की नींव रखी। यह वही टीम है, जिसे कभी ज़्यादातर प्रतिद्वंद्वी हल्के में लेते थे लेकिन इस बार उसने सबको जवाब दे दिया।

फाइनल में आकिब नबी ने गेंद से कमाल दिखाया। पहली पारी में शुभम पुंडीर ने शतक जड़कर टीम को मज़बूत स्थिति में पहुंचाया। दूसरी पारी में क़मरान इक़बाल ने सेंचुरी ठोक दी और कर्नाटक पर दबाव बना दिया। इन तीनों के प्रदर्शन ने मैच का रुख पूरी तरह जम्मू-कश्मीर की ओर मोड़ दिया।

जम्मू-कश्मीर पहली बार बना चैंपियन
यह खिताब इसलिए भी खास है क्योंकि टीम का रणजी सफर आसान नहीं रहा। जम्मू-कश्मीर ने 1960 में अपना पहला मैच खेला था लेकिन पहली जीत उन्हें 1982 में 99वें मुकाबले में मिली। दिलचस्प बात यह है कि उसी साल कर्नाटक ने अपना तीसरा खिताब जीता था। 2025-26 का फाइनल उनके रणजी इतिहास का 346वां मैच था और यह सिर्फ 47वीं जीत थी।

इस सीज़न में टीम ने कमाल का प्रदर्शन किया। पूरे टूर्नामेंट में उन्हें सिर्फ एक हार मिली, जो श्रीनगर में मुंबई के खिलाफ आई थी। इसके अलावा उन्होंने लगातार शानदार क्रिकेट खेली और फाइनल तक का सफर तय किया। 66 साल के लंबे इंतज़ार के बाद आया यह खिताब सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि मेहनत, धैर्य और भरोसे की जीत है। जम्मू-कश्मीर ने दिखा दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो इतिहास बदला जा सकता है।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी इस ऐतिहासिक दिन को करीब से देखने के लिए शुक्रवार शाम को ही हुबली पहुंचे थे और टीम के पहले खिताब के गवाह भी बने। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'हम J&K क्रिकेट टीम को रणजी ट्रॉफी का फाइनल खेलने के लिए चीयर करने हुबली जा रहे। उन्होंने फाइनल में पहुंचकर लाखों लोगों को अपनी उपलब्धियों पर गर्व महसूस कराया है। मैं कल स्टैंड्स में उनका हौसला बढ़ाने के लिए सच में उत्सुक हूं।'

मैच का पूरा हाल
रणजी ट्रॉफी फाइनल की पहली गेंद से ही जम्मू-कश्मीर ने इरादे साफ कर दिए थे। कप्तान पारस डोगरा ने अहम टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी चुनी। पिच को देखते हुए अंदाज़ा था कि चौथे-पांचवें दिन दरारें दिखेंगी, और डोगरा का दांव बिल्कुल सही बैठा।

पहली पारी में जम्मू-कश्मीर ने 584 रन ठोक दिए। कर्नाटक को करीब सात सेशन तक मैदान में पसीना बहाना पड़ा। नंबर-3 पर उतरे शुभम पुंडीर ने 121 रन की शानदार पारी खेली। डोगरा (70), यावर हसन (88), अब्दुल समद (61), कनहैया वाधवान (70) और साहिल लोटरा (72) ने अर्धशतक जमाकर स्कोर पहाड़ जैसा बना दिया। कर्नाटक के गेंदबाज़ पूरी तरह दबाव में दिखे।

आकिब नबी ने पहली पारी में 5 विकेट झटके
मैच के दौरान दोनों टीमों के बीच तनातनी भी रही। एक विवादित पल में डोगरा ने सब्स्टीट्यूट फील्डर केवी अवनीश को हेड-बट कर दिया। बाद में उन्होंने इसे ‘हीट ऑफ द मोमेंट’ बताया, लेकिन 41 साल के कप्तान पर मैच फीस का 50 फीसदी जुर्माना लगा।

कहावत है कि पिच को तब तक मत आंकिए जब तक दोनों टीमें बल्लेबाज़ी न कर लें। तेज़ गेंदबाज़ आकिब नबी ने इसे सच कर दिखाया। इस सीज़न के सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले नबी ने कर्नाटक की कमर तोड़ दी। उन्होंने पहले राहुल (13) को आउट किया, फिर लगातार दो गेंदों पर करुण नायर (0) और स्मरण रविचंद्रन (0) को चलता किया। स्कोर 57/4 हो गया। मयंक अग्रवाल ने 160 रन बनाकर लड़ाई लड़ी, लेकिन नबी के आगे वो भी फीके पड़ गए। नबी ने सीज़न का सातवां फाइफर लिया, कुल 60 विकेट पूरे किए और इतिहास में तीसरे ऐसे तेज़ गेंदबाज़ बने जिन्होंने एक सीज़न में 60+ विकेट झटके।

291 रन की बढ़त के बाद दूसरी पारी में शुरुआत डगमगाई। प्रसिद्ध कृष्णा और विजयकुमार वैशाख ने यावर (1) और पुंडीर (4) को जल्दी आउट कर दिया। लेकिन क़मरान इक़बाल ने मोर्चा संभाला। उन्होंने 159* की नाबाद पारी खेली, वहीं साहिल लोटरा 101* पर डटे रहे। टीम ने 342/4 पर पारी घोषित की।

मैच ड्रॉ रहा था लेकिन 633 रन की विशाल बढ़त के दम पर ट्रॉफी जम्मू-कश्मीर के नाम रही। 2025–26 सीज़न में टीम को सिर्फ एक हार मिली- ओपनर में मुंबई के खिलाफ। नॉकआउट में मध्य प्रदेश और बंगाल को हराकर फाइनल में पहुंची इस टीम ने आखिरकार इतिहास रच दिया।

संक्षिप्त स्कोर: जम्मू-कश्मीर 584 और 342/4 घोषित; कर्नाटक 293।
नतीजा: मैच ड्रॉ, लेकिन जम्मू-कश्मीर बना चैंपियन।

Sat, 28 Feb 2026 14:39:07 +0530

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