Israel Election: 1981 के बाद पूर्वाह्न 10 बजे तक सर्वाधिक 16.68 प्रतिशत मतदान दर्ज
(हरिंदर मिश्रा) यरूशलम, 27 अक्टूबर इजराइल में मंगलवार को संसदीय चुनावों में पूर्वाह्न 10 बजे तक 16.68 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो 1981 के बाद इस समय तक दर्ज किया गया सबसे अधिक मतदान है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी और सेना के पूर्व प्रमुख गादी आइजेनकोट के बीच कड़ा मुकाबला होने का संकेत मिला है।
देशभर में मतदान केंद्र स्थानीय समयानुसार सुबह सात बजे खुल गए और रात 10 बजे इन्हें बंद किया जाएगा। देशभर के 12,018 मतदान केंद्रों पर कुल 73,31,981 पात्र मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं। केंद्रीय निर्वाचन समिति (सीईसी) के कार्यवाहक महानिदेशक डिन लिवनेह ने बताया कि पूर्वाह्न 10 बजे तक 16.68 प्रतिशत पात्र मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर चुके थे, जबकि पिछले चुनाव में इस समय (पूर्वाह्न 10 बजे) तक 15.9 प्रतिशत मतदान हुआ था।
उन्होंने कहा कि अब तक 12 लाख से अधिक पात्र मतदाता मतदान कर चुके हैं। यह 1981 के बाद इस समय तक दर्ज किया गया सबसे अधिक मतदान है। उस वर्ष मेनाखेम बेगिन दोबारा प्रधानमंत्री निर्वाचित हुए थे।
इजराइल के इतिहास में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा ने मतदान के दिन यरूशलम के एक मतदान केंद्र पर अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। उनके कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई। नेतन्याहू ने हिब्रू भाषा में मतदाताओं से आग्रह किया, ‘मतदान करने जाइए!’’ सेना के अनुसार, पूर्वाह्न 10 बजे तक इजराइली सैनिकों के बीच मतदान प्रतिशत 30 प्रतिशत के पार पहुंच गया था।
वर्ष 2022 में हुए पिछले चुनाव में इस समय तक 25.7 प्रतिशत सैनिकों ने मतदान किया था। हालांकि, चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, छोटे इलाकों, अस्पतालों, कारागारों और नर्सिंग होम में मतदान केंद्र रात आठ बजे बंद हो जाएंगे। आधिकारिक नतीजे चार नवंबर को घोषित किए जाएंगे, जबकि चुनाव के संभावित परिणामों से जुड़े अनुमान बुधवार तक सामने आने की उम्मीद है।
चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के अनुसार, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन में करीबी मुकाबला है। दोनों में से किसी भी पक्ष को सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत मिलने नहीं मिलने की आशंका है। नेतन्याहू (77 वर्ष) सात अक्टूबर, 2023 के हमले को लेकर जवाबदेही तय करने की बढ़ती मांगों और तीन साल से जारी युद्ध के बाद भी सत्ता में बने रहने की कोशिश कर रहे हैं।
मोरक्को के यहूदी मूल के परिवार से ताल्लुक रखने वाले आइजेनकोट प्रमुख प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरे हैं, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट अब यायर लैपिड के साथ एक अलग विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व कर रहे हैं। आइजेनकोट (66 वर्ष) को युद्ध के दौरान निजी क्षति के कारण लोगों की सहानुभूति मिली है। गाजा में संघर्ष के दौरान सेना में सेवा देते हुए उनके बेटे और दो भतीजों की मौत हो गई थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव से पहले सार्वजनिक रूप से नेतन्याहू का समर्थन किया। उन्होंने रविवार को एक और बयान जारी कर इजराइली लोगों से नेतन्याहू के पक्ष में मतदान करने की अपील की। अरब नागरिक, जो इज़राइल की आबादी का लगभग 21 प्रतिशत हैं, चुनाव के बाद के समीकरणों में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
नेतन्याहू के हारते ही ईरान में तबाही, इजरायल का क्या है सीक्रेट प्लान?
दुनिया में इस वक्त बहुत सारी आश्चर्यजनक चीजें हो रही हैं। जैसे कि ब्राजील में चौथी बार लूला डिसिल्वा राष्ट्रपति का चुनाव जीत जाते हैं। आज 27 अक्टूबर है। चुनाव इजराइल में भी चल रहा है और कहा जा रहा है कि नेतन्याहू का इस बार वापसी करना मुश्किल है। तीसरी तरफ़ इस ईरान के ऊपर एक बहुत बड़ी स्ट्राइक करने का प्लान किया जा रहा हैरा। दावा किया जा रहा है कि इस बार प्लान ऐसा है कि इस बार रिजीम चेंज करवा कर रहेंगे। वहीं अमेरिका में मिड टर्म के चुनाव होने वाले हैं। तो सारी चीजें जिस तरीके से दुनिया में चल रही हैं उनके बीच ये अपने आप में एक बहुत बड़ी खबर बन जाती है कि क्या जो काम पहले अमेरिका और इजराइल मिलकर करना चाहते थे नहीं कर पाए थे अब जब ईरान की ताकत का अंदाजा हो गया है अब कर पाएंगे।
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इजराइल कोई बड़ा हमला कर करेगा
ईरान की जो सैन्य क्षमता है पहले से कमजोर हुई है। भले ही ईरान दावा कर रहा हो कि नहीं हम अभी भी लड़ने के लिए तैयार हैं। लेकिन ईरान की अंदरूनी स्थिति बहुत कमजोर है। लोगों को बहुत दिक्कतें हो रही हैं। चाहे महंगाई की बातें हो, जरूरत की जो चीजें हैं, वह भी मिलने में दिक्कत हो रही है। अब ऐसे में अगर कोई बड़ा हमला होता है तो सरकार के लिए यह बहुत बड़ी चिंता का विषय बन सकता है। ऐसे में ही कहीं ना कहीं रिजीम चेंज करने की बात जो की जा रही है इजराइल के द्वारा वो संभव हो सकती है। लेकिन बड़ी बात यह है कि जनता को यह बात पहुंचाई कैसे जाए। कहीं ऐसा ना हो कि इजराइल का यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर ईरान की जनता को प्रेजेंट सरकार के साथ में खड़ा कर दे। यह भी एक घटना हो सकती है। इजराइल इस प्रकार की योजना पर काम कर रहा होगा कि जब हम बड़ा हमला करें तो बड़े हमले के साथ-साथ प्रेजेंट गवर्नमेंट के जो विरोधी गुट है उनको भी कह दे पूरा समर्थन दे ताकि वो भी एक बड़ी मुखर आवाज उठाएं कि अगर ये प्रेजेंट सरकार हट जाए तो ईरान की जो बदहाल अवस्था है चाहे वो अर्थव्यवस्था हो या अन्य और तरीके से उसमें बदलाव लाया जा सकता है।
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रिपोर्ट्स दावा करती है कि इराकी मलेशिया ने 400 लोगों को मारा था। ट्रंप ने कहा था कि मदद रास्ते में मदद आ रही है। 15 दिन बाद वो मदद पहुंची थी तब तक हजारों लोग मारे जा चुके थे ईरान में। ईरान की जो प्रेजेंट गवर्नमेंट है उसका उतना लाओ लश्कर नहीं रहा और ऑलरेडी जब बाहरी हमला होगा तो अंदरूनी आवाजों को रोक पाना ईरान के लिए दो मोर्चों पर दो फ्रंट वॉर हो जाएगा ना। इन दोनों से लड़ने के लिए ईरान की क्षमता आज नहीं है। उस समय थी लेकिन अब इतने लंबे समय से वोट चलते हुए ईरान की कैपेबिलिटी में कैपेसिटी में काफी कमजोरी आई है। तो अब देखना ये होगा कि इजराइल और अमेरिका उन प्रेजेंट गवर्नमेंट के जो विरोधी लोग हैं उनको कैसे साधते हैं। अगर ईरान की जनता को ये लगा कि ये हमारे देश को खत्म करने की बात है। तो हो सकता है दाव उल्टा पड़ जाए और अगर सरकार ने यानी कि जनता ने यह मान लिया कि सरकार को बदलने की बात है तो हो सकता है कि पॉसिबिलिटीज बन जाए।
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