Stock Market: 6 अगस्त को कैसी रह सकती है बाजार की चाल
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भारत में प्लास्टिक के नोटों को लेकर आया RBI का अपडेट, बताया कब तक हो सकते हैं जारी
भारत में जल्द ही प्लास्टिक यानी पॉलीमर करेंसी नोट देखने को मिल सकते हैं. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया है कि अगर पॉलीमर नोटों का फील्ड ट्रायल सफल रहता है, तो अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में यानी तीमाही में इन्हें चलन में लाने की योजना है.
मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद मीडिया ब्रीफिंग में आरबीआई गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक इस दिशा में आगे बढ़ रहा है. फिलहाल 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलीमर नोटों का परीक्षण किया जाएगा. ट्रायल के नतीजों के आधार पर इनके नियमित इस्तेमाल पर फैसला लिया जाएगा.
क्यों लाए जा रहे हैं प्लास्टिक करेंसी नोट?
आरबीआई के अनुसार, पॉलीमर नोटों को लाने का मुख्य उद्देश्य करेंसी की उम्र बढ़ाना और बार-बार नोट बदलने की जरूरत को कम करना है. मौजूदा कागजी नोटों की तुलना में पॉलीमर नोट ज्यादा मजबूत और टिकाऊ होते हैं.
विशेष रूप से 10 रुपये और 20 रुपये जैसे छोटे मूल्य के नोटों का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है. रोजमर्रा के लेन-देन में ज्यादा हाथ बदलने के कारण ये नोट जल्दी खराब हो जाते हैं. ऐसे में पॉलीमर नोट लंबे समय तक चल सकते हैं और करेंसी प्रबंधन का खर्च भी कम हो सकता है.
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कम मूल्य वाले नोटों के लिए पॉलीमर तकनीक ज्यादा उपयोगी साबित हो सकती है, क्योंकि इनकी खपत और इस्तेमाल की गति अधिक होती है.
सरकार ने दी फील्ड ट्रायल की मंजूरी
केंद्र सरकार ने हाल ही में आरबीआई के उस प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसमें 10 रुपये और 20 रुपये के एक-एक अरब पॉलीमर नोटों के फील्ड ट्रायल की बात कही गई थी.
इस प्रक्रिया के तहत भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने ट्रायल नोटों की छपाई के लिए जरूरी पॉलीमर सबस्ट्रेट की व्यवस्था शुरू कर दी है. हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि अभी सभी कागजी नोटों को पॉलीमर नोटों से बदलने की कोई योजना नहीं है. यह कदम केवल परीक्षण के उद्देश्य से उठाया गया है, ताकि भारतीय परिस्थितियों में इन नोटों की उपयोगिता और मजबूती को परखा जा सके.
कागज की जगह प्लास्टिक नोट कितने अलग होंगे?
भारत में फिलहाल कॉटन आधारित पेपर पर करेंसी नोट छापे जाते हैं. इसके विपरीत पॉलीमर नोट विशेष प्रकार के प्लास्टिक सबस्ट्रेट से तैयार किए जाते हैं.
इन नोटों की खासियत यह है कि ये पानी, गंदगी और सामान्य टूट-फूट से ज्यादा सुरक्षित रहते हैं. हालांकि शुरुआत में इन्हें बनाने की लागत कागजी नोटों से अधिक हो सकती है, लेकिन लंबे समय तक चलने की वजह से कुल खर्च कम होने की संभावना रहती है. कम नोट खराब होने से नए नोटों की छपाई, परिवहन और वितरण पर होने वाला खर्च भी घट सकता है.
दुनिया के कई देशों में पहले से इस्तेमाल
पॉलीमर बैंकनोट दुनिया के कई देशों में पहले से इस्तेमाल किए जा रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया वर्ष 1988 में पॉलीमर नोट जारी करने वाला पहला देश बना था. इसके बाद ब्रिटेन, कनाडा, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड और वियतनाम समेत 60 से अधिक देशों ने इस तकनीक को अपनाया है.
अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार, पॉलीमर नोटों की उम्र सामान्य कागजी नोटों से अधिक होती है. इससे नोटों को बार-बार बदलने की जरूरत कम होती है और पर्यावरण पर पड़ने वाला प्रभाव भी घट सकता है.
क्या बंद हो जाएंगे पुराने कागजी नोट?
आरबीआई ने साफ किया है कि पॉलीमर नोट आने के बाद मौजूदा कागजी करेंसी तुरंत बंद नहीं होगी. नए पॉलीमर नोट शुरुआत में पुराने नोटों के साथ ही चलेंगे.
फील्ड ट्रायल का उद्देश्य केवल यह जांचना है कि भारतीय मौसम, इस्तेमाल और बैंकिंग व्यवस्था में पॉलीमर नोट कितना बेहतर प्रदर्शन करते हैं. अगर परीक्षण सफल रहता है, तो आने वाले समय में 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलीमर नोट नियमित रूप से जारी किए जा सकते हैं. भारत में करेंसी प्रबंधन को आधुनिक बनाने की दिशा में यह कदम एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है.
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