UP में दौड़ेगी विकास की रफ्तार, योगी कैबिनेट ने दी 17 हजार करोड़ से ज्यादा के चार लिंक एक्सप्रेसवे को हरी झंडी
UP News: सड़क नेटवर्क के मामले में उत्तर प्रदेश लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है. प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों को आपस में जोड़ने और यात्रा को सरल बनाने के लिए योगी सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है. मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई अहम कैबिनेट बैठक में राज्य के भीतर चार नए लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण से जुड़े प्रस्तावों को औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी गई है. इस पूरे प्रोजेक्ट पर सरकार 17542 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च करने जा रही है. सरकार का मानना है कि इस कदम से राज्य के प्रमुख औद्योगिक और ग्रामीण इलाके सीधे मुख्य सड़क तंत्र से जुड़ जाएंगे.
4 नए लिंक एक्सप्रेसवे से बदलेगी प्रदेश की सूरत
कैबिनेट बैठक में जिन 4 महत्वपूर्ण लिंक एक्सप्रेसवे को मंजूरी दी गई है, वे प्रदेश के अलग-अलग कोनों को जोड़ने का काम करेंगे. इनमें फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे, जेवर लिंक एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाला लिंक एक्सप्रेसवे मुख्य रूप से शामिल हैं. सरकार ने काम की गति और गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए फर्रुखाबाद, झांसी और जेवर लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण को दो अलग-अलग पैकेजों में बांटने का फैसला किया है. पैकेज एक और पैकेज दो के तहत काम होने से इन मार्गों का निर्माण कार्य समयबद्ध तरीके से तेजी से पूरा हो सकेगा.
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेश की चार लिंक एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं के लिए डेवलपर्स के चयन के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। इन परियोजनाओं पर ₹17,542.06 करोड़ का संभावित व्यय होगा, जिससे प्रदेश में सड़क संपर्क और आधारभूत ढांचे को नई… pic.twitter.com/93zMfWHqiV
— Government of UP (@UPGovt) October 27, 2026
5 साल तक देखरेख की जिम्मेदारी
इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे खास बात इसका निर्माण मॉडल है. कैबिनेट के फैसले के अनुसार, इन सभी परियोजनाओं का विकास EPC यानी इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन पद्धति के आधार पर कराया जाएगा. निर्माण एजेंसियों के लिए कार्य पूरा करने की समय सीमा तीन साल तय की गई है. इतना ही नहीं, निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अगले 5 साल तक सड़क की मरम्मत और नियमित रखरखाव की जिम्मेदारी भी संबंधित विकासकर्ता कंपनी की ही होगी. इस कड़े नियम से सड़कों की गुणवत्ता लंबे समय तक बेहतरीन बनी रहेगी और जनता को सुरक्षित व आरामदायक यात्रा का लाभ मिलेगा.
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सड़क तंत्र को आपस में जोड़ने की बड़ी योजना
उत्तर प्रदेश में पहले से ही कई विश्वस्तरीय एक्सप्रेसवे काम कर रहे हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण जिले और क्षेत्र अब भी इन मुख्य मार्गों से थोड़ी दूरी पर हैं. नए लिंक एक्सप्रेसवे की यह परियोजना दरअसल उन सभी छूटे हुए रास्तों को एक मजबूत जाल में पिरोने का काम करेगी. जेवर में बन रहे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक सीधी पहुंच बनाना हो या फिर बुंदेलखंड के झांसी और मध्य यूपी के फर्रुखाबाद को जोड़ना हो, यह नया नेटवर्क हर लिहाज से गेम चेंजर साबित हो सकता है. आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को सीधे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ देने से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश का सफर भी बेहद आसान हो जाएगा.
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आर्थिक गतिविधियों और विकास को मिलेगा भारी बढ़ावा
17 हजार करोड़ रुपये से अधिक का यह भारी निवेश न केवल प्रदेश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के नए रास्ते भी खोलेगा. जब किसी क्षेत्र में आधुनिक एक्सप्रेसवे पहुंचते हैं, तो वहां नए उद्योग, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स पार्क और व्यापारिक केंद्र तेजी से पनपने लगते हैं. हालांकि यात्रा के समय में होने वाली सटीक कमी को लेकर विस्तृत आंकड़े आने बाकी हैं, लेकिन इतना तय है कि इस मजबूत सड़क नेटवर्क से प्रदेश के व्यापार और आम जनजीवन में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा.
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