Congo में Ebola का प्रकोप हुआ भीषण, 10000 से अधिक पुष्ट मामलों में से करीब आधों की मौत
कांगो में इबोला का तेजी से फैल रहा प्रकोप 10,000 पुष्ट मामलों के आंकड़े को पार कर गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, स्वास्थ्य अधिकारी अफ्रीका के कई देशों में इस बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए तेजी से प्रयास कर रहे हैं। कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय के मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, इतिहास में इबोला का यह सबसे तेजी से बढ़ता प्रकोप है।
संक्रमण की पुष्टि वाले 10,060 लोगों में से करीब आधे लोगों की मौत हो चुकी है। यह कांगो के इतिहास में इस बीमारी का सबसे घातक प्रकोप भी है। मई में घोषित इस प्रकोप के लिए दुर्लभ बुंदिबुग्यो वायरस जिम्मेदार है।
इस वायरस के खिलाफ फिलहाल कोई स्वीकृत टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है। राहत एवं बचाव दल सशस्त्र संघर्ष, खराब सड़कों और अविश्वास तथा गलत सूचनाओं के कारण स्थानीय लोगों की हिंसा जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इन बाधाओं के चलते उन समुदायों में लोगों को बीमारी के लक्षणों की जानकारी देने और उपचार कराने के लिए राजी करना मुश्किल हो रहा है, जिन्होंने वर्षों तक हिंसा और बार-बार फैलने वाली महामारियों का सामना किया है।
2014 से 2016 के बीच पश्चिम अफ्रीका में फैले इबोला प्रकोप में 28,000 से अधिक मामले सामने आए थे और 11,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। वह इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे घातक इबोला प्रकोप था। हालांकि, मौजूदा प्रकोप की घोषणा के बाद से अब तक दर्ज मामलों और मौतों की संख्या उस अवधि के दौरान पश्चिम अफ्रीका में दर्ज आंकड़ों की तुलना में कम से कम तीन गुना है।
इबोला का मौजूदा प्रकोप पिछले किसी भी प्रकोप के मुकाबले अफ्रीका के अधिक हिस्सों में फैल चुका है। यह तीन क्षेत्रों तक पहुंच गया है और केन्या तथा नाइजीरिया में भी इसके मामले सामने आए हैं। अब तक युगांडा और फ्रांस समेत पांच देशों में संक्रमण दर्ज किया गया है।
हालांकि, इन दोनों देशों में फिलहाल कोई उपचाराधीन मामला नहीं है। अफ्रीका में संक्रमण के प्रसार की एक प्रमुख समस्या निगरानी व्यवस्था में ढिलाई दिखाई देना है। शुरुआती मामलों में से अधिकांश की पुष्टि लोगों में लक्षण दिखने या उनके यात्रा करने के काफी समय बाद हुई।
कांगो में बीमारी मई में पहली बार घोषित किए जाने के समय तीन स्वास्थ्य क्षेत्रों तक सीमित थी, लेकिन अब यह आठ प्रांतों के 66 स्वास्थ्य क्षेत्रों में फैल चुकी है। स्वास्थ्य अधिकारियों के सामने एक बड़ी चुनौती संक्रमित लोगों की समय पर पहचान करना है। दर्ज मामलों में करीब 80 प्रतिशत ऐसे लोगों से जुड़े हैं, जो पहले से निगरानी में रखे गए संक्रमितों के संपर्कों में शामिल नहीं थे।
अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र के अनुसार, प्रकोप को काफी हद तक नियंत्रण में मानने के लिए कम से कम 95 प्रतिशत मामले ज्ञात संपर्कों में सामने आने चाहिए। स्वास्थ्यकर्मियों को उपचार केंद्रों में मरीजों की बढ़ती संख्या, वेतन में देरी और स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। पिछले सप्ताह इटुरी प्रांत के निया निया स्वास्थ्य क्षेत्र में बकाया प्रोत्साहन राशि के भुगतान की मांग को लेकर कुछ कर्मचारियों ने हड़ताल की थी।
शनिवार को शोपो प्रांत के बाफवासेंदे में इबोला संक्रमण की सूचना पर कार्रवाई के दौरान एक नर्स की हत्या कर दी गई और एक अन्य स्वास्थ्यकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गया। दर्ज मौतों में से कम से कम आधी ऐसे लोगों की हुई हैं, जिन्हें उपचार केंद्रों में भर्ती नहीं कराया गया था। इससे कई क्षेत्रों में लक्षणों की जानकारी नहीं दिए जाने और समय पर उपचार नहीं मिलने की समस्या सामने आती है।
इबोला के प्रकोप से कांगो की पहले से दबाव में चल रही स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। इससे हैजा जैसी अन्य बीमारियों से निपटने के प्रयासों पर असर पड़ा है। संक्रमण के डर से गर्भवती महिलाएं अस्पताल जाने से बच रही हैं, जिसके कारण कुछ प्रांतों में मातृ मृत्यु दर दोगुनी हो गई है।
बच्चों के नियमित टीकाकरण और शिक्षा पर भी असर पड़ा है तथा प्रभावित परिवारों को सामाजिक कलंक और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
नीमच कृषि उपज मंडी में किसानों से खुली लूट, हम्माल-व्यापारी पर दोहरी राशि वसूलने का आरोप, प्रशासन पर उठे सवाल
प्रदेश की प्रमुख कृषि उपज मंडियों में शुमार नीमच कृषि उपज मंडी में किसानों के साथ दोहरी आर्थिक लूट का मामला सामने आता है। किसानों का कहना है कि मंडी परिसर में हम्माली के नाम पर किसानों से दो-दो जगह अवैध वसूली की जा रही है। जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस खुली लूट से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें एक पीड़ित किसान मंडी की पर्चियां दिखाते हुए अपनी व्यथा सुना रहा है।
कैसे हो रही है किसानों के साथ दोहरी लूट?
मंडी में अपनी उपज लेकर पहुंचे पीड़ित किसान ने पर्चियां दिखाते बताया कि मंडी में कदम रखते ही किसानों का शोषण शुरू हो जाता है। किसान के अनुसार, मंडी परिसर में मौके पर ही हम्मालों द्वारा प्रति बोरी (दाग) 5 रुपये नकद वसूले जा रहे हैं। लूट का यह सिलसिला यहीं नहीं थमता। जब किसान अपनी उपज के भुगतान के लिए व्यापारी के पास जाता है, तो व्यापारी द्वारा भी बिल में से प्रति बोरी 7 से 9 रुपये हम्माली के नाम पर अलग से काट लिए जाते हैं। इस प्रकार एक ही उपज पर किसान को दो बार हम्माली चुकानी पड़ रही है।
अन्य मंडियों में नहीं है ऐसी मनमानी
पीड़ित किसान ने बताया कि वह पिछले 14-15 सालों से नीमच मंडी में अपनी उपज बेचने आ रहा है और हम्मालों की यह मनमानी लगातार जारी है। किसान का स्पष्ट कहना है कि आस-पास की अन्य किसी भी मंडी में इस तरह दो जगह हम्माली वसूलने का नियम नहीं है। यह अंधेरगर्दी केवल नीमच मंडी में ही चल रही है।
शिकायत के बाद भी मंडी प्रशासन मौन
किसानों का आरोप है कि इस अवैध वसूली और मनमानी के खिलाफ जब भी आवाज उठाई जाती है या विरोध किया जाता है, तो मंडी में उनकी कोई सुनवाई नहीं होती। शिकायत करने पर मंडी प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी मौके पर आकर केवल औपचारिकता दिखाते हैं। लेकिन उनके जाते ही हम्माल और व्यापारी फिर से अपनी मनमानी शुरू कर देते हैं।
लगातार हो रही इस आर्थिक चोट से किसानों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। अन्नदाताओं ने जिला प्रशासन और मंडी बोर्ड के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि इस दोहरी वसूली पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर किसानों को इस लूट से राहत दिलाई जाए।
नीमच से कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट
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