Responsive Scrollable Menu

Akhilesh Yadav ने BJP को घेरा: Ayodhya मंदिर में राम धन चोरी करने वाले इस बार चुनाव नहीं जीतेंगे।

लखनऊ, पांच अगस्त समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को घेरते हुए बुधवार को कहा कि जिन्होंने ‘राम धन’ की चोरी की है, उन्हें प्रभु श्रीराम अब जीतने नहीं देंगे। अखिलेश ने यहां सपा मुख्यालय में आयोजित ‘ब्राह्मण सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए भाजपा पर चढ़ावा ‘चोरी’ मामले में छोटे कर्मचारियों को पकड़ने और ‘बड़े लोगों’ को बचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “भाजपा के लोग आजकल मुंह छिपाकर घूम रहे हैं।

दान पात्र के ऊपर तो ताला है, लेकिन उन्होंने नीचे से एक सुरंग बनाई है। भाजपा वालों ने महापाप किया है, उन्होंने प्रभु श्री राम का चढ़ावा तक चुरा लिया है।” अखिलेश ने कहा, “जिन्होंने ‘राम धन’ की चोरी की है, प्रभु श्रीराम इस बार उन्हें जीतने नहीं देंगे। उनके महापाप की सजा उन्हें मिलने जा रही है।” सपा प्रमुख ने भाजपा पर कथित चढ़ावा चोरी के बड़े दोषियों को बचाने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, “जब चोरी पकड़ी गई, तो छोटे-छोटे कर्मचारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। सच्चाई तो यह है कि चोरी इतनी बड़ी है कि हम-आप उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। ये छोटे कर्मचारी चोरी नहीं कर सकते।

चोरी हुई है, तो बड़े लोग इसमें जरूर शामिल होंगे।” अखिलेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर कटाक्ष करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री जी अयोध्या जाने का विश्व रिकॉर्ड बना रहे थे। उन्होंने अयोध्या की सबसे ज्यादा यात्रा की। इसके बावजूद उन्हें चंदा चोरी के बारे में कोई जानकारी नहीं हुई।” अखिलेश ने कहा कि भाजपा के लोग सपा के लोगों से राम मंदिर में चंदा देने की रसीद मांग रहे हैं।

उन्होंने कहा, “इससे ज्यादा घटिया बात और कोई नहीं हो सकती है, क्योंकि हिंदू परंपराओं में कभी दान की रसीद नहीं मिलती है।” अखिलेश ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पर निशाना साधते हुए कहा, “उन्हें रसीद इसलिए याद आ रही है, क्योंकि एक नकली रसीद घोटाला करने वाले भी उपमुख्यमंत्री ही हैं। उन्होंने नकली रसीद के जरिये कहीं पर चंदा लिया था। इसका उन्हें पाप लगा और जनता ने उन्हें चुनाव जीतने नहीं दिया।” अखिलेश ने ई20 पेट्रोल को लेकर मिल रही शिकायतों का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि ई20 के मामले में बड़ा खेल हो रहा है। सपा प्रमुख ने कहा भाजपा का एक फुल फॉर्म है, जिसमें बी का मतलब भ्रष्ट, जे का अर्थ जुल्मी और पी का मतलब पापी है, यानी भाजपा के लोग भ्रष्ट, जुल्मी और पापी हैं। अखिलेश ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।

उन्होंने भाजपा के शासनकाल में बने अन्य एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए। अखिलेश ने राज्य सरकार पर जनता के साथ अन्याय करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जनता के साथ इतना धोखा और इतना दुर्व्यवहार पहले कभी नहीं हुआ, जितना कि भाजपा के शासनकाल में हुआ है।

Continue reading on the app

Supreme Court का आदेश: Judicial Officers की सेवानिवृत्ति उम्र पर राज्य 2 हफ्ते में निर्णय लें

(फाइल फोटो के साथ) नयी दिल्ली, पांच अगस्त उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने का विरोध करने के लिए राज्य सरकारें वित्तीय बोझ का हवाला नहीं दे सकतीं। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने राज्य सरकारों को न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने के मुद्दे पर पुनर्विचार करने और दो सप्ताह के अंदर निर्णय लेने का निर्देश दिया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की खंडपीठ ने कहा कि वित्तीय बोझ की चिंताएं ‘गलतफहमी पर आधारित’ हैं।

खंडपीठ ने कहा, ‘‘हमारा सभी राज्य सरकारों से कहना है कि वे न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने के मुद्दे पर फिर से विचार करें, भले ही दूसरे सरकारी कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति की उम्र कुछ भी तय क्यों न हो।’’ शीर्ष अदालत ने कहा कि अनुभवी न्यायिक अधिकारियों को सेवा में बनाए रखने के कारण राजस्व पर पड़ने वाला बोझ सेवानिवृत्ति के कारण खाली हुई जगहों को भरने की तुलना में कम होगा। खंडपीठ ने कहा, ‘‘हमें इस बात पर संदेह का कोई कारण नजर नहीं आता कि अनुभवी और मंझे हुए न्यायिक अधिकारियों को सेवा में बनाए रखने से राज्य को उनकी सेवानिवृत्ति के बाद होने वाले खर्च की तुलना में कम वित्तीय बोझ उठाना पड़ेगा।’’ खंडपीठ ने कहा, ‘‘इसलिए सेवानिवृत्ति की उम्र न बढ़ाने के लिए राज्य सरकारों की ओर से बताई गई वजहें सही नहीं हैं। हालांकि, हमारा सुविचारित मत है कि इस बड़े मसले को आपसी सहमति से हल किया जाना चाहिए।’’ उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में त्वरित विचार किया जाए और दो हफ़्ते के अंदर एक स्वतंत्र और व्यावहारिक निर्णय लिया जाए।

शीर्ष अदालत ने पहले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा था कि वे न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र 60 से बढ़ाकर 61 साल करने पर विचार करें। यह खंडपीठ एक ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें देशभर में ज़िला न्यायपालिका के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल करने का अनुरोध किया गया था। खंडपीठ ने आदेश दिया, ‘‘सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया जाता है कि वे इस मामले पर अपने संबंधित अधिकार क्षेत्र वाले उच्च न्यायालय से सलाह-मशविरा करके कोई निर्णय लें।

अगर वे सहमत होते हैं, तो ऐसे राज्यों में न्यायिक अधिकारियों को 61 साल की उम्र तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी जाएगी। सेवा में बने रहने की यह अनुमति इन कार्यवाही के अंतिम नतीजों पर निर्भर करेगी।’’ उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की उम्र 65 साल है, जबकि उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश 62 साल की उम्र में सेवा से अवकाश ग्रहण करते हैं। यह मामला उच्चतम न्यायालय के 2002 के उस फ़ैसले के बाद उठा है, जिसमें उसने न्यायमूर्ति के. जगन्नाथ शेट्टी आयोग की सिफारिश मानने से इनकार कर दिया था।

आयोग ने ज़िला न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाकर 62 साल करने का प्रस्ताव दिया था। तब से, तेलंगाना और मध्यप्रदेश समेत कुछ राज्यों ने सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं।

Continue reading on the app

  Sports

IND-W vs SA-W: टीम इंडिया की सीरीज में जुड़े 3 नए मैच, इस बड़े टूर्नामेंट की तैयारी में आएंगे काम

भारतीय टीम ने इस साल के अंत में साउथ अफ्रीका का दौरा करना है, जहां उसे एक ऐतिहासिक टेस्ट मैच भी खेलना है. मगर अब ये दौरा सिर्फ 2 हफ्ते का न रहकर करीब 3 हफ्ते तक बढ़ गया है क्योंकि 2 मैच भी जुड़ गए हैं Fri, 07 Aug 2026 00:24:09 +0530

  Videos
See all

Yogi Adityanath Live Speech: 'ST समाज सिर्फ वोट बैंक नहीं', विपक्ष पर योगी का सीधा हमला | Hindi News #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-06T23:00:31+00:00

Punjab Election से पहले Harbhajan Singh ने CM Bhagwant Mann पर साधा निशाना.. दे दिया बड़ा बयान ! #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-06T22:56:29+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers