ईरान नीति पर अमेरिका में सियासी घमासान, ट्रंप के समर्थन में रिपब्लिकन तो सैन्य कार्रवाई सीमित करने पर अड़े डेमोक्रेट
वॉशिंगटन, 26 फरवरी (आईएएनएस)। ईरान के मुद्दे पर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट नेताओं के बीच मतभेद बढ़ते जा रहे हैं। सीनेट मेजोरिटी लीडर जॉन थ्यून राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति का समर्थन कर रहे हैं, तो वहीं हाउस डेमोक्रेट्स ने किसी भी मिलिट्री एक्शन को सीमित करने वाले प्रस्ताव पर मतदान कराने की पहल की।
फॉक्स न्यूज पर बोलते हुए थ्यून ने कहा, “यह राष्ट्रपति सुरक्षित सड़कों, अमेरिकी लोगों की जेब में अधिक पैसे और अमेरिकियों के आगे बढ़ने के नए अवसरों के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
विदेश नीति पर उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि राष्ट्रपति हमें उस क्षेत्र और देश के भीतर अमेरिका के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए तैयार कर रहे हैं। हम परमाणु हथियारों से लैस ईरान को बर्दाश्त नहीं कर सकते। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह बात कल रात अपने भाषण में स्पष्ट की थी। मुझे लगता है कि इस पर अमेरिकी जनता का बड़ा बहुमत सहमत है।”
थ्यून ने यह भी कहा कि अमेरिका के उस इलाके में जरूरी हित हैं और राष्ट्रपति शक्ति के माध्यम से शांति की नीति अपना रहे हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका के पास सही समय और सही स्थान पर उचित संसाधन उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि इसकी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। अगर ईरान वार्ता की मेज पर आता है, तो संभव है कि कोई समझौता हो सके।
इसी बीच, हाउस में डेमोक्रेट नेताओं ने घोषणा की कि जब कांग्रेस अगले सप्ताह फिर से बैठक करेगी, तो वे द्विदलीय खन्ना-मासी ईरान वॉर पावर्स प्रस्ताव पर पूर्ण सदन में मतदान कराएंगे।
संयुक्त बयान में डेमोक्रेट नेताओं ने कहा, “जैसे ही कांग्रेस अगले सप्ताह दोबारा बैठक करेगी, हम प्रतिनिधि सभा में द्विदलीय खन्ना-मासी वॉर पावर्स प्रस्ताव पर मतदान कराने के लिए बाध्य करेंगे।”
उन्होंने कहा, “यह कानून राष्ट्रपति को ईरान के खिलाफ सैन्य बल प्रयोग के लिए कांग्रेस के समक्ष अपना पक्ष रखने की आवश्यकता देगा।”
उन्होंने यह भी कहा, “हमारा मानना है कि कांग्रेस से परामर्श और उसकी अनुमति के बिना ऐसी कोई भी कार्रवाई असंवैधानिक होगी। अगले सप्ताह हर सदस्य को यह दर्ज कराने का अवसर मिलेगा कि वे कांग्रेस की मंजूरी के बिना ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का समर्थन करते हैं या नहीं।”
सीनेट में डेमोक्रेट नेता चक शूमर ने प्रशासन से अधिक स्पष्टता की मांग की, जबकि अमेरिकी और ईरानी अधिकारी जिनेवा में वार्ता कर रहे थे।
सीनेट में शूमर ने कहा, “प्रशासन को स्पष्ट रूप से अमेरिकी जनता को बताना चाहिए कि ईरान में उसका लक्ष्य क्या है। मैंने हमेशा कहा है कि ईरान का सामना करने और उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोकने के लिए रणनीति, स्पष्टता और पारदर्शिता जरूरी है। लेकिन अब तक हमें प्रशासन से इनमें से कुछ भी नहीं मिल रहा है। अमेरिकी जनता जवाब की हकदार है।”
इस बीच, सीनेटर जैकी रोसेन और डेव मैककॉर्मिक ने इंटरनेट ब्लैकआउट और विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई के बाद तेहरान पर दबाव बढ़ाने के लिए बाइपार्टिसन ईरान ह्यूमन राइट्स, इंटरनेट फीडम और अकाउंटेबिलिटी एक्ट पेश किया।
रोसेन ने कहा, “ईरान के लोगों को एक दबाने वाले शासन के तहत रहने के लिए मजबूर किया गया है, जिसने अपने लोगों की लड़ाई की कोशिशों को कमजोर करने के लिए सेंसरशिप और इंटरनेट ब्लैकआउट का इस्तेमाल किया है।”
“ईरान का भविष्य उसके लोगों को बनाना चाहिए, जो अपने अधिकारों की सुरक्षा और जानकारी तक मुफ़्त पहुंच के हकदार हैं।”
मैककॉर्मिक ने कहा कि यह कानून “आर्थिक, सैन्य और नैतिक रूप से दिवालिया शासन के खिलाफ ईरानी लोगों के साथ खड़े होने की अमेरिका की कोशिशों पर आधारित है।”
--आईएएनएस
एवाई/एमएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
स्वाद और सेहत का खजाना: पाचन तंत्र को मजबूत कर वजन नियंत्रण में कारगर इमली
नई दिल्ली, 26 फरवरी (आईएएनएस)। खट्टी-मिठी इमली न केवल खाने का जायका बढ़ाती है, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है। यह पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने के साथ ही बढ़ते वजन की समस्या को भी कंट्रोल करने में कारगर है।
बिहार सरकार के पर्यावरण एवं वन विभाग के अनुसार, इमली सिर्फ एक बड़ा और छायादार वृक्ष नहीं है, बल्कि स्वाद और सेहत का खजाना भी है। यह प्रकृति की अनमोल देन है, जो घने जंगलों, खेतों और सड़कों के किनारे आसानी से दिखती है। इसकी झुकी हुई शाखाएं और खुरदरी भूरी छाल इसे पहचानने में आसान बनाती हैं। इमली का खट्टा-मीठा गूदा भोजन में स्वाद बढ़ाता है और चटनी, सांभर जैसे पारंपरिक व्यंजनों का मुख्य हिस्सा है।
इमली के औषधीय गुण पारंपरिक चिकित्सा में सदियों से इस्तेमाल होते आ रहे हैं। यह एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है, जो शरीर में सूजन कम करती है और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाती है। इसमें मैग्नीशियम, कैल्शियम, फाइबर और विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इमली पाचन सुधारती है, कब्ज दूर करती है और लैक्सेटिव प्रभाव से पेट साफ रखती है। यह कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करती है, खराब कोलेस्ट्रॉल कम करती है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल बढ़ाती है, जिससे हृदय स्वस्थ रहता है।
इमली में पॉलीफेनॉल्स और फ्लेवोनॉइड्स सूजन कम करते हैं और लीवर की सुरक्षा करते हैं। यह ब्लड शुगर लेवल संतुलित रखने में मददगार हो सकती है और वजन नियंत्रण में सहायक है।
इमली की पत्तियां, छाल और बीज भी औषधीय गुणों से युक्त होते हैं। यह एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुणों वाली होती है, जो बैक्टीरिया और फंगस से लड़ने में मदद करती है। इमली का नियमित सेवन सेहत के लिए फायदेमंद है, लेकिन संतुलित मात्रा में ही लें।
इमली बहुत ज्यादा खाने से दस्त या पेट दर्द हो सकता है। वहीं, डायबिटीज के मरीजों को सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। एसिडिक होने से दांतों की इनेमल को नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए पानी से कुल्ला करें। गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं, किडनी रोगी या दवाएं लेने वाले लोग डॉक्टर की सलाह से ही इस्तेमाल करें। एलर्जी वाले लोगों में खुजली या रैश हो सकते हैं। हमेशा संतुलित मात्रा में खाएं और ज्यादा सेवन से बचें।
--आईएएनएस
एमटी/डीकेपी
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