झड़ते और रूखे बालों के लिए वरदान है चावल का पानी, रूखेपन से मिलेगा छुटकारा
नई दिल्ली, 26 फरवरी (आईएएनएस)। आज के समय में केमिकल प्रोडक्ट्स बालों की समस्याओं को बढ़ा रहे हैं। ऐसे में लोग प्राकृतिक और घरेलू उपायों की ओर लौट रहे हैं। हमारे घरों में मौजूद कई ऐसी चीजें हैं, जिनका इस्तेमाल सदियों से आयुर्वेद में बालों की देखभाल के लिए किया जाता रहा है। इन्हीं में से एक है चावल का पानी।
अक्सर चावल पकाते समय या धोते समय इसका पानी फेंक दिया जाता है, लेकिन आयुर्वेद और विज्ञान दोनों मानते हैं कि यही पानी बालों के लिए अमृत समान हो सकता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व बालों को भीतर से ताकत देने का काम करते हैं और धीरे-धीरे उनकी सेहत सुधारते हैं।
आयुर्वेद के अनुसार, चावल का पानी शीतल और पोषण देने वाला होता है। यह सिर की त्वचा को ठंडक देता है, जलन कम करता है और बालों की जड़ों को मजबूती प्रदान करता है। वहीं, विज्ञान की मानें तो चावल के पानी में अमीनो एसिड, विटामिन बी, विटामिन ई और प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। ये तत्व बालों के टूटने को कम करते हैं, नमी बनाए रखते हैं और बालों को मजबूती देते हैं।
चावल का पानी बालों पर प्राकृतिक क्लींजर की तरह काम करता है। जब चावल को धोते समय निकला पानी या थोड़े समय के लिए भिगोए गए चावल का पानी बालों पर इस्तेमाल किया जाता है, तो यह बालों में जमा गंदगी को हटाने में मदद करता है और उन्हें रूखेपन से भी बचाता है। नियमित रूप से इस्तेमाल करने पर बालों में धीरे-धीरे मजबूती आने लगती है।
सिर की मालिश के लिए चावल का पानी इस्तेमाल करना भी फायदेमंद माना जाता है। जब हल्के हाथों से इस पानी से सिर की त्वचा की मालिश की जाती है, तो रक्त संचार बेहतर होता है। इससे बालों की जड़ों तक पोषण पहुंचता है और नई ग्रोथ होती है। आयुर्वेद में इसे वात और पित्त को संतुलित करने वाला उपाय माना गया है, जिससे बालों का झड़ना धीरे-धीरे कम हो सकता है।
चावल का पानी बालों की जड़ों को गहराई से पोषण देने में भी मदद करता है। इसे कुछ समय के लिए सिर पर लगाकर रखने से बालों में नमी बनी रहती है और रूखापन कम होता है। विज्ञान के अनुसार, इसमें मौजूद पोषक तत्व बालों की संरचना को मजबूत करते हैं, जिससे बाल जल्दी टूटते नहीं हैं और लंबे समय तक स्वस्थ बने रहते हैं।
बालों को मुलायम बनाने के लिए चावल का पानी बेहद असरदार है। अक्सर शैंपू करने के बाद बाल उलझ जाते हैं और कंघी करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में चावल के पानी से बाल धोने पर बालों की ऊपरी सतह स्मूद हो जाती है। आयुर्वेद मानता है कि इससे बालों की प्राकृतिक चिकनाहट बनी रहती है, जबकि विज्ञान इसे स्टार्च और अमीनो एसिड का असर मानता है, जो बालों को नरमी देता है।
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
राष्ट्रव्यापी एचपीवी टीकाकरण सार्वजनिक स्वास्थ्य में एक ऐतिहासिक कदम: पूर्व आईसीएमआर महानिदेशक
जयपुर, 26 फरवरी (आईएएनएस)। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के पूर्व महानिदेशक वीएम कटोच और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में पूर्व स्वास्थ्य अनुसंधान सचिव ने गुरुवार को देशभर में मानव पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) टीकाकरण की शुरुआत को भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम बताया।
उन्होंने इसे दूरदर्शी और बड़ा बदलाव लाने वाला कदम बताया और कहा कि राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में एचपीवी वैक्सीन को शामिल करने से सर्वाइकल कैंसर से लड़ने की कोशिशों को बड़ी मजबूती मिलेगी। यह भारत में महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में से एक है।
उन्होंने कहा कि एचपीवी संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का एक बड़ा कारण है। यह बीमारी खासकर कम उम्र और मध्यम आयु की महिलाओं की जान लेती रही है।
उन्होंने कहा, “सर्वाइकल कैंसर से बचाव संभव है, और टीकाकरण इसके लिए सबसे प्रभावी उपायों में से एक है।”
कटोच ने बताया कि एचपीवी वैक्सीन संक्रमण को रोकने और सर्वाइकल कैंसर के मामलों को काफी हद तक कम करने में विश्व स्तर पर प्रभावी साबित हुई है।
दुनिया के 160 से अधिक देश इसे अपने राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल कर चुके हैं, जो इसकी सुरक्षा, प्रभावशीलता और सार्वजनिक स्वास्थ्य में इसकी अहमियत को दर्शाता है।
भारत ने इस वैक्सीन को लगभग दो दशक पहले मंजूरी दे दी थी, लेकिन यह ज्यादातर निजी अस्पतालों तक ही सीमित रही, जहां वही लोग इसे लगवा सकते थे जो इसका खर्च उठा सकते थे।
इस वजह से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की कई लड़कियां इससे वंचित रह गईं।
कटोच ने कहा, “अब इसे राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल किए जाने से यह वैक्सीन उन लोगों तक भी पहुंचेगी जो सबसे ज्यादा जरूरतमंद हैं और इसका खर्च नहीं उठा सकते।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि बड़े पैमाने पर टीकाकरण से न केवल लड़कियों को वायरस के संपर्क में आने से पहले सुरक्षा मिलेगी, बल्कि समाज में संक्रमण के फैलाव को भी रोका जा सकेगा।
उन्होंने भरोसा जताया कि इस कार्यक्रम के लगातार और प्रभावी क्रियान्वयन से भविष्य में सर्वाइकल कैंसर को भारत में एक सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में खत्म करने में मदद मिलेगी। यह देश की रोके जा सकने वाली बीमारियों के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ा कदम साबित होगा।
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