चांदी ₹5,927 बढ़कर ₹2.25 लाख किलो पर पहुंची:10 ग्राम सोने का दाम ₹2,760 बढ़कर ₹1.46 लाख हुआ, इस साल 13 हजार महंगा हो चुका
सोने-चांदी की कीमत में आज यानी 5 अगस्त को बढ़त रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी की कीमत 5,927 रुपए बढ़कर 2.25 लाख रुपए पर पहुंच गई है। 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 2,760 रुपए बढ़कर 1.46 लाख रुपए पर पहुंच गया है। इस साल सोने में अब तक तेजी रही इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 13 हजार रुपए महंगा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए के ऊपर था, जो अब 1.46 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी की कीमत में 5 हजार रुपए की गिरावट है। चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.25 लाख रुपए पर है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। सोना इस साल 1.60 लाख तक जा सकता है कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने-चांदी के दाम अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में निवेशक इसमें निवेश कर सकते हैं, हालांकि इनमें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। अजय केडिया के अनुसार साल के आखिर तक सोना एक बार फिर 1.60 लाख और चांदी 2.80 लाख रुपए तक जा सकती है। सोने-चांदी में ETF के जरिए कर सकते हैं निवेश एक्सचेंज ट्रेडेड फंड सोने और चांदी के गिरते-चढ़ते भावों पर बेस्ड होते हैं। गोल्ड ETF या सिल्वर ETF की खरीद-बिक्री शेयर की ही तरह BSE और NSE पर की जा सकती है। हालांकि, इसमें आपको सोना या चांदी नहीं मिलता। आप जब इससे निकलना चाहें तब आपको उस समय के सोने-चांदी के भाव के बराबर पैसा मिल जाएगा। इसमें 500 रुपए से भी कम में निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। इसमें कैसे कर सकते हैं निवेश? ETF खरीदने के लिए आपको अपने ब्रोकर के माध्यम से डीमैट अकाउंट खोलना होता है। इसमें NSE पर उपलब्ध ETF के यूनिट आप खरीद सकते हैं और उसके बराबर की राशि आपके डीमैट अकाउंट से जुड़े बैंक अकाउंट से कट जाएगी। आपके डीमैट अकाउंट में ऑर्डर लगाने के दो दिन बाद ETF आपके अकाउंट में डिपॉजिट हो जाते हैं। ट्रेडिंग खाते के जरिए ही ETF को बेचा जाता है।
लोकसभा में 'बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल 2026' पास:डिजिटल और वर्चुअल बैंकिंग रिकॉर्ड कोर्ट में सबूत माने जाएंगे, अंग्रेजों के जमाने का कानून खत्म होगा
लोकसभा ने आज यानी 5 अगस्त को 'बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026' को मंजूरी दे दी। इस नए कानून के लागू होने के बाद अब बैंकिंग के डिजिटल और वर्चुअल रिकॉर्ड्स को अदालत में ठोस सबूत माना जाएगा। यह बिल अंग्रेजों के जमाने के पुराने कानून की जगह लेगा। इसका मुख्य मकसद देश के तेजी से बदलते डिजिटल बैंकिंग सिस्टम को कानूनी सुरक्षा और मान्यता देना है। हंगामे के बीच पास हुआ बिल दोपहर 2 बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने अलग-अलग मुद्दों पर नारेबाजी जारी रखी। भारी हंगामे और शोर-शराबे के बीच ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बिल को विचार और पास कराने के लिए सदन के सामने रखा, जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। अंग्रेजों का 135 साल पुराना कानून बदलेगा यह नया बिल बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891 को रिप्लेस करेगा। पुराना कानून उस दौर का था जब सारा बैंकिंग काम कागजों और बही-खातों में होता था। समय के साथ बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह बदल चुका है और अब कोर बैंकिंग, मोबाइल ऐप, यूपीआई और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का जमाना है। ऐसे में पुराने कानून में डिजिटल डेटा को सबूत के तौर पर पेश करने में कानूनी अड़चनें आती थीं। आम लोगों और बैंकों को क्या फायदा होगा? नॉलेज बॉक्स: क्या था 1891 का कानून और क्यों पड़ी बदलने की जरूरत?
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