आंध्र प्रदेश: दूध में मिलावट से 15 लोग अभी भी बीमार, अस्पतालों में चल रहा इलाज
अमरावती, 26 फरवरी (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी में दूध में मिलावट से प्रभावित 15 लोग अभी भी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
दूध में मिलावट की इस घटना में पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि 15 लोग बीमार हैं और अलग-अलग छह अस्पतालों में उनका इलाज चल रहा है।
इलाज करा रहे लोगों में एक मरीज वेंटिलेटर पर है, छह मरीज डायलिसिस पर हैं और आठ मरीज वेंटिलेटर व डायलिसिस दोनों पर हैं।
गुरुवार को सरकार ने इस घटना की पूरी जानकारी दी, जिससे पहले काफी हंगामा हुआ था। एक आधिकारिक नोट में विभिन्न विभागों द्वारा उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया गया है।
अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। स्वास्थ्य आयुक्त और खाद्य सुरक्षा निदेशक सहित वरिष्ठ अधिकारियों को निगरानी के लिए तैनात किया गया है।
लैब की रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पहला मरीज 16 फरवरी को अस्पताल में भर्ती हुआ था। 24 फरवरी तक कुल 20 लोगों को भर्ती किया गया, जिनमें से पांच की मौत हो चुकी है।
मरने वालों में एक छह साल का बच्चा भी शामिल है। तीन मृतक 70 वर्ष से अधिक आयु के थे।
22 फरवरी को पूर्वी गोदावरी के जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को किम्स अस्पताल से सूचना मिली थी कि कई बुजुर्ग मरीज पेशाब न आना, उल्टी, पेट दर्द और गंभीर किडनी खराब होने जैसी समस्या के साथ भर्ती हुए हैं, जिन्हें डायलिसिस की जरूरत पड़ी।
जांच में पाया गया कि मरीजों के खून में यूरिया और सीरम क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ा हुआ था, जो जहरीले पदार्थ के संपर्क में आने की ओर इशारा करता है।
प्रारंभिक जांच में दूध के सेवन को इस बीमारी का संभावित कारण माना गया।
अधिकारियों ने पाया कि कोरुकोंडा मंडल के नरसापुरम गांव स्थित वरलक्ष्मी मिल्क डेयरी से 106 परिवारों को दूध की सप्लाई की गई थी।
इस डेयरी से दूध की सप्लाई तुरंत रोक दी गई। 25 फरवरी को घर-घर सर्वे कराया गया।
नौ मेडिकल टीमों ने 110 परिवारों को कवर किया और कुल 307 लोगों की जांच की। छह घर बंद मिले, लेकिन उनसे फोन पर संपर्क किया गया और उनमें कोई लक्षण नहीं पाए गए।
315 लोगों के खून के नमूने जांच के लिए लिए गए। इनमें से केवल दो में कुछ असामान्यता पाई गई, लेकिन उसका संबंध दूध मिलावट से नहीं था।
जिला निगरानी अधिकारी, जनरल मेडिसिन विशेषज्ञ, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ, फॉरेंसिक विशेषज्ञ, महामारी विशेषज्ञ और नेफ्रोलॉजिस्ट को शामिल कर त्वरित प्रतिक्रिया टीमें बनाई गईं।
14 फील्ड सर्विलांस टीमों ने 679 घरों का दौरा किया और 957 परिवारों की जांच की।
12 खून और तीन पेशाब के नमूने लेकर उन्हें नेफ्रॉन टॉक्सिन (किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले जहरीले तत्व) की जांच के लिए आईआईटी तिरुपति भेजा गया।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने नरसापुरम गांव की वरलक्ष्मी मिल्क डेयरी का निरीक्षण किया। वहां से दूध, पनीर, घी, पीने का पानी और सिरके के नमूने लिए गए। प्रभावित घरों से भी दूध और दही के नमूने लिए गए।
कुछ नमूने जेएनटीयू काकीनाडा और कुछ नमूने हैदराबाद स्थित विम्टा लैब भेजे गए।
नमूनों की माइक्रोबियल, रासायनिक और जहरीले मिलावट तत्वों की जांच की गई।
पुलिस ने एक मृतक के बेटे की शिकायत पर मामला दर्ज किया है।
संदिग्ध दूध विक्रेता अड्डाला गणेश्वरराव (33), निवासी नरसापुरम गांव, को हिरासत में लिया गया है।
पुलिस दूध सप्लाई चेन और प्रभावित लोगों की पहचान के लिए जांच कर रही है।
चार पशु चिकित्सकों की एक टीम भी मामले की जांच कर रही है। उन्होंने 41 दूध के नमूने लिए हैं।
जानवरों को दिए जाने वाले चारे, पानी और अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने भी जांच के लिए लिए गए हैं। ये नमूने विजयवाड़ा स्थित वीबीआरआई (वेटरनरी बायोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट) भेजे गए हैं।
मामले की जांच जारी है।
--आईएएनएस
एएमटी/डीएससी
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होली से पहले किसानों को तोहफा! जानें कब मिलेगी 22वीं किस्त की अगली मदद
देश के करोड़ों किसानों के लिए बड़ी खबर है. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त को लेकर सरकार तैयारी में जुटी है. उम्मीद जताई जा रही है कि मार्च महीने में 2,000 रुपये सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजे जा सकते हैं. हालांकि अभी तक आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है.
कब आएगा पैसा?
मिली जानकारी के अनुसार, होली के आसपास या मार्च के आखिरी हफ्ते तक किस्त जारी हो सकती है. पिछली किस्त नवंबर 2025 में जारी की गई थी. अब किसान अगली किस्त का इंतजार कर रहे हैं. केंद्र सरकार की ओर से तारीख की घोषणा होते ही स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी.
किसे मिलेगा 2,000 रुपये?
किस्त का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा जिनका सारा कागजी काम पूरा है. सरकार ने साफ किया है कि बिना e-KYC और जमीन सत्यापन के भुगतान रोका जा सकता है. योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये तीन बराबर किस्तों में दिए जाते हैं. हर चार महीने में 2,000 रुपये सीधे खाते में ट्रांसफर किए जाते हैं, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होती है.
ये तीन बातें जरूर जांच लें
- पहली, e-KYC पूरी होनी चाहिए. किसान ओटीपी या बायोमेट्रिक के जरिए यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं.
- दूसरी, जमीन का रिकॉर्ड सही होना चाहिए. आपके नाम पर दर्ज खेती की जमीन का सत्यापन होना जरूरी है.
- तीसरी, बैंक खाता आधार से लिंक हो और डीबीटी सक्रिय हो. अगर खाता लिंक नहीं है, तो पैसा अटक सकता है.
स्टेटस कैसे देखें?
किसान आधिकारिक पोर्टल PM Kisan pmkisan.gov.in पर जाकर ‘Know Your Status’ विकल्प चुनें. रजिस्ट्रेशन नंबर या मोबाइल नंबर डालकर अपनी किस्त की स्थिति देख सकते हैं. अगर स्टेटस में “FTO Processed - YES” दिखता है तो समझिए पैसा जारी होने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. अगर “NO” लिखा है तो नजदीकी कृषि कार्यालय या कॉमन सर्विस सेंटर पर संपर्क करना चाहिए.
क्या करें अभी?
किसान अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक वेबसाइट की जानकारी पर भरोसा करें. जिन किसानों ने अभी तक e-KYC या अन्य जरूरी काम पूरे नहीं किए हैं, वे तुरंत करा लें. अगर सभी दस्तावेज सही हैं तो 22वीं किस्त के 2,000 रुपये जल्द ही सीधे बैंक खाते में पहुंच सकते हैं. सरकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन तैयारियां अंतिम चरण में बताई जा रही हैं.
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