आलू की सैंडविच, आलू के पराठे, आलू की पूरी...अब बस और नहीं आलू, लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्राओं की परेशानी से हैरान हुए लोग
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित लखनऊ विश्वविद्यालय के गंगा हॉस्टल में छात्राओं ने मेस के खाने की गुणवत्ता को लेकर विरोध प्रदर्शन किया. धरने पर बैठी छात्राओं का कहना है कि हॉस्टल में लगातार बेहद खराब और एक जैसा भोजन परोसा जा रहा है, जिससे वे परेशान हो चुकी हैं.
प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने नाराजगी जताते हुए कहा, “आलू की सैंडविच, आलू के पराठे, आलू की पूरी, आलू की सब्जी... आखिर आलू कब तक खाएं.” छात्राओं का आरोप है कि मेन्यू में विविधता नहीं है और भोजन की गुणवत्ता भी बेहद खराब है.
खराब भोजन से बिगड़ी तबीयत
छात्राओं के अनुसार, लगातार खराब खाना खाने की वजह से कई छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई. उल्टियां होने की शिकायत सामने आई है. बताया जा रहा है कि एक विधि छात्रा उल्टी के बाद बेहोश भी हो गई. इस घटना के बाद साथी छात्राओं का गुस्सा और बढ़ गया और उन्होंने हॉस्टल परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि चाय में भी पानी की मात्रा अधिक होती है और खाने की गुणवत्ता बेहद निम्न स्तर की है. उनका कहना है कि यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है.
पहले भी की गई थीं शिकायतें
प्रदर्शन कर रही छात्राओं का कहना है कि उन्होंने पहले भी कई बार हॉस्टल प्रशासन और प्रोवोस्ट से मेस के खाने की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की थी. हालांकि, उनके मुताबिक अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. छात्राओं का आरोप है कि लगातार शिकायतों के बावजूद मेस संचालन में सुधार नहीं हुआ, जिससे उन्हें विरोध का रास्ता अपनाना पड़ा.
मेस संचालक पर कार्रवाई की मांग
धरने पर बैठी छात्राओं ने प्रोवोस्ट से मेस संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि जब तक खाने की गुणवत्ता में सुधार और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा. विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. हालांकि सूत्रों के अनुसार, मामले की जांच की बात कही जा रही है.
छात्र स्वास्थ्य और जवाबदेही का सवाल
यह मामला एक बार फिर छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है. छात्राओं का कहना है कि वे बेहतर और सुरक्षित भोजन की मांग कर रही हैं, जो उनका मूल अधिकार है.
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यात्रियों के लिए बड़ी राहत, डीजीसीए ने फ्री में टिकट रद्द करने के लिए दी 48 घंटों की विंडो; रिफंड नियमों में भी किया बदलाव
नई दिल्ली, 26 फरवरी (आईएएनएस)। नागर विमानन महानिदेशक (डीजीसीए) ने टिकट बुकिंग से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नियामक द्वारा एक 48 घंटों की फ्री विंडो दी गई है, जिसमें यात्री टिकट बुकिंग करने के बाद बिना किसी शुल्क के रद्द या फिर बिना कोई अतिरिक्त चार्ज दिए बदलाव कर सकते हैं।
डीजीसीए ने बयान में कहा, यात्री टिकट बुक करने के 48 घंटों के अंदर बिना किसी शुल्क के उसे रद्द कर सकते हैं या फिर उसमें बदलाव कर सकते हैं।
हालांकि, यदि टिकट किसी अन्य उड़ान के लिए बदला जाता है, तो यात्रियों को किराए में अंतर (यदि कोई हो) का भुगतान करना होगा।
यह सुविधा घरेलू उड़ानों के लिए प्रस्थान तिथि से कम से कम सात दिन और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए 15 दिन शेष रहने पर ही लागू होगी।
डीजीसीए ने स्पष्ट किया है कि बुकिंग के 48 घंटे बीत जाने के बाद सामान्य रद्दीकरण शुल्क लागू होंगे।
संशोधित नियम 24 फरवरी को जारी किए गए थे और 26 मार्च, 2026 से प्रभावी होंगे।
नियामक ने नाम सुधार और रिफंड की समयसीमा के संबंध में भी स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं।
यदि टिकट सीधे एयरलाइन की वेबसाइट से खरीदा गया हो और बुकिंग के 24 घंटे के भीतर नाम में गलती की सूचना दी जाती है, तो एयरलाइंस उसी यात्री के नाम में सुधार के लिए कोई शुल्क नहीं ले सकती हैं।
जिन मामलों में टिकट ट्रैवल एजेंटों या ऑनलाइन पोर्टलों के माध्यम से बुक किए जाते हैं, उनमें रिफंड जारी करने की जिम्मेदारी एयरलाइंस की होगी, क्योंकि एजेंट उनके प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हैं।
डीजीसीए ने कहा कि एयरलाइंस को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे मामलों में रिफंड की प्रक्रिया 14 कार्य दिवसों के भीतर पूरी हो जाए।
नई समयसीमा के अनुसार, क्रेडिट कार्ड से किए गए लेनदेन के लिए रिफंड सात दिनों के भीतर संसाधित किया जाना चाहिए, जबकि एयरलाइन कार्यालय में किए गए नकद भुगतान को उसी स्थान पर तुरंत वापस कर दिया जाना चाहिए।
नियामक ने एयरलाइंस के लिए यह भी अनिवार्य कर दिया है कि रद्द होने या न पहुंचने की स्थिति में सभी वैधानिक कर और यात्री-संबंधी शुल्क वापस किए जाएं, भले ही मूल किराया वापस न किया जा सके।
--आईएएनएस
एबीएस/
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