क्रिकेट की दुनिया में अब सिर्फ बड़े नाम ही नहीं, बल्कि उभरते हुए सितारे भी अपनी चमक बिखेर रहे हैं। साल 2026 की शुरुआत हॉन्गकॉन्ग में होने वाली रोमांचक टी20 सीरीज से हो रही है, और इसके लिए कुवैत की नेशनल क्रिकेट टीम ने अपनी कमर कस ली है। कुवैत ने अपनी टीम का ऐलान कर दिया है, जिसमें अनुभव का तड़का भी है और युवाओं का जोश भी।
कुवैत के लिए यह दौरा सिर्फ एक सीरीज नहीं, बल्कि इंटरनेशनल क्रिकेट के नक्शे पर अपनी धाक जमाने का एक सुनहरा मौका है। आइए देखते हैं कि इस बार कुवैत की टोली में कौन-कौन से 'मैच विनर' शामिल हैं। कुवैत के सिलेक्टर्स ने इस बार काफी सोच-समझकर ऐसी टीम चुनी है जो किसी भी परिस्थिति में गियर बदल सके। यहाँ उन 5 खिलाड़ियों का जिक्र जरूरी है जो गेम पलट सकते हैं:
कैप्टन अहमद अल-अजीज (Ahmad Al-Aziz): टीम की कमान अहमद के हाथों में है। अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और चतुर कप्तानी के लिए मशहूर अहमद दबाव में निखरना जानते हैं। टीम को उनसे एक कप्तानी पारी की उम्मीद रहेगी।
फैसल अल-सालेम (Faisal Al-Salem): विकेट के पीछे मुस्तैद और बल्ले से विस्फोटक! फैसल टी20 फॉर्मेट के माहिर खिलाड़ी हैं। मुश्किल वक्त में रन चुराना और मैच को फिनिश करना उनकी खासियत है।
तारिक अल-खाल्दी (Tariq Al-Khaldi): हर टीम को एक ऐसे ऑलराउंडर की तलाश होती है जो गेंद और बल्ले दोनों से कमाल कर सके। तारिक टीम को वो बैलेंस देते हैं जिसकी टी20 में सख्त जरूरत होती है।
ज़ैद अल-मंसूरी (Zaid Al-Mansoori): रफ्तार के सौदागर! ज़ैद अपनी स्विंग और पेस से विपक्षी बल्लेबाजों के स्टंप्स बिखेरने के लिए तैयार हैं। डोमेस्टिक क्रिकेट में आग उगलने के बाद अब वे इंटरनेशनल लेवल पर जलवा दिखाने को बेताब हैं।
ओमर अल-फहद (Omar Al-Fahad): स्पिन का जादूगर। अगर हॉन्गकॉन्ग की पिच ने थोड़ा भी साथ दिया, तो ओमर अपनी फिरकी में बड़े-बड़े बल्लेबाजों को फंसा सकते हैं। उनका कंट्रोल और वेरिएशन टीम के लिए ट्रंप कार्ड साबित हो सकता है।
इस दौरे का क्या है महत्व?
कुवैत के लिए हॉन्गकॉन्ग जाना सिर्फ मैच खेलना नहीं है। यह एक प्लेटफॉर्म है जहाँ वे दुनिया को दिखा सकते हैं कि उनकी क्रिकेट किस लेवल पर पहुँच चुकी है। अंतरराष्ट्रीय टीमों के खिलाफ खेलकर जो अनुभव मिलता है, वह खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को सातवें आसमान पर ले जाता है।
टीम पिछले कई हफ्तों से कड़े ट्रेनिंग सेशन से गुजर रही है। कोच और सपोर्ट स्टाफ का पूरा जोर फिटनेस, नई रणनीतियों और टीम बॉन्डिंग पर है। टी20 जैसे तेज फॉर्मेट में 'एडैप्टेबिलिटी' (तालमेल बिठाना) ही जीत की कुंजी है।
क्रिकेट फैंस और कुवैत के समर्थक उम्मीद लगाए बैठे हैं कि यह दौरा कुवैती क्रिकेट के इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगा। अगर खिलाड़ी अपनी योजना के मुताबिक खेल पाए, तो हॉन्गकॉन्ग में कुवैत का झंडा बुलंद होना तय है।
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न्यूजीलैंड के आलराउंडर रचिन रविंद्र ने टी20 विश्व कप के सुपर आठ मैच में अपनी टीम की श्रीलंका पर 61 रन से जीत के बाद अपने कप्तानमिचेल सैंटनर की जमकर प्रशंसा करते हुए कहा कि वह अपने साथी खिलाड़ियों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह हैं और उन्हें दमदार महसूस कराने का तरीका ढूंढ लेते हैं।
रविंद्र ने इस मैच में 32 रन बनाए और 19 रन देकर चार विकेट भी लिए। उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार मिला। कप्तान सैंटनर की 26 गेंदों पर खेली गई 47 रन की पारी से न्यूजीलैंड 84 रन पर छह विकेट गंवाने के बावजूद सात विकेट पर 168 रन बनाने में सफल रहा।
इसके जवाब में श्रीलंका आठ विकेट पर 107 रन ही बना सका।
रविंद्र ने मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘‘हम सभी जानते हैं कि सैंटनर कितने शांत स्वभाव के हैं, लेकिन उनका सोचने का तरीका भी कमाल का है, जैसे कि किस छोर से कौन सी गेंद फेंकनी है। लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि वह अच्छा प्रदर्शन करके आगे बढ़कर नेतृत्व करते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘वह हमेशा आपके साथ खड़े रहते हैं और आपका हौसला बढ़ाते हैं। मुझे लगता है कि उनके जैसा कप्तान होना टीम के लिए बहुत अच्छा है। उनके नेतृत्व में मैदान पर उतरते ही आपको ऐसा अहसास होता है जैसे आप 10 फीट लंबे हों और आप अभेद्य महसूस करते हैं। टीम में उनकी मौजूदगी से बहुत फायदा मिलता है।’’
यह केवल खिलाड़ियों को प्रेरित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उपमहाद्वीप की पिचों पर गेंदबाजी करने का सैंटनर का अनुभव भी स्पिन गेंदबाजी इकाई के लिए मददगार साबित होता है।
रविंद्र ने कहा, ‘‘हमारे पास सैंटनर हैं, जो सीमित ओवरों की क्रिकेट में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ स्पिनरों में से एक हैं। वह हमें बताते हैं कि कैसी गेंदबाजी करनी है। इससे मदद मिलती है और हमारे पास काफी अनुभवी खिलाड़ी हैं।
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