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डोनाल्ड डैश : महामंदी के बाद अमेरिकी लोगों का बड़ी संख्या में पलायन, डेटा में सामने आ रही सच्चाई

वॉशिंगटन, 26 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिका में एक बड़ा भौगोलिक बदलाव देखने को मिल रहा है। फाइनेंशियल डेली रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में अमेरिका के लोग अपना देश छोड़कर जा रहे हैं। महामंदी के बाद पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है।

ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन के अनुमान के अनुसार, पिछले साल अमेरिका से करीब 1.5 लाख लोगों का शुद्ध माइग्रेशन दर्ज किया गया, और 2026 में इस संख्या के बढ़ने की संभावना है।

वहीं, द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट बताती है कि 2025 में कुल इन-माइग्रेशन घटकर 26 से 27 लाख के बीच रह गया, जबकि 2023 में यह आंकड़ा करीब 60 लाख था।

द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने 15 देशों के 2025 के पूरे या आंशिक डेटा का विश्लेषण किया, जिसमें पाया कि कम से कम 1,80,000 अमेरिकी उन देशों में चले गए। पूरे आंकड़े आने के बाद यह संख्या और भी ज्यादा होने की संभावना है।

ऐसा कोई एक समग्र डेटासेट उपलब्ध नहीं है, जो विदेशों में रह रहे अनुमानित 40 से 90 लाख अमेरिकियों की पूरी तस्वीर पेश कर सके। अमेरिकी राज्य विभाग के अनुसार, 2022 में मेक्सिको में लगभग 16 लाख अमेरिकी निवास कर रहे थे, जबकि कनाडा में उनकी संख्या 2.5 लाख से अधिक थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ब्रिटेन में 3.25 लाख से ज्यादा अमेरिकी रहते हैं, जो यूरोप में बसे 15 लाख से अधिक अमेरिकियों का हिस्सा हैं।

पुर्तगाल में, कोरोना महामारी के बाद से अमेरिकी निवासियों की संख्या 500 फीसदी से ज्यादा बढ़ गई है। अकेले 2024 में यह 36 फीसदी बढ़ी। आयरलैंड ने 2025 में 10,000 अमेरिकियों का स्वागत किया, जो पिछले साल से लगभग दोगुना है। फाइनेंशियल डेली ने कहा कि पिछले साल जर्मनी से यूएस जाने वाले लोगों से ज्यादा का आंकड़ा अमेरिका में रहने वाले लोगों के जर्मनी जाने का है।

रिलोकेशन फर्मों का कहना है कि डिमांड बढ़ रही है। हाल ही में एक्सपैट्सी की तरफ से आयोजित किए गए एक कॉन्फ्रेंस कॉल में, लगभग 400 अमेरिकियों ने अल्बानिया में शिफ्ट होने का तरीका सीखने के लिए हामी भरी।

एक्सपैट्सी की फाउंडर जेन बार्नेट के हवाले से कहा गया, पहले, जो अमेरिकी देश छोड़कर जा रहे थे, वे सुपर-एडवेंचरस और अच्छे क्रेडेंशियल वाले थे। अब वे मेरी तरह आम लोग हैं।

उन्होंने कहा कि कंपनी का लक्ष्य 10 लाख अमेरिकियों को मूव कराना है। कुछ टिप्पणीकारों ने इस ट्रेंड को डोनाल्ड डैश नाम दिया है।

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में इन आंकड़ों में तेजी आई। इसलिए इसे डोनाल्ड डैश नाम दिया गया है। हालांकि, लोगों के अमेरिका से जाने का सिलसिला पहले से जारी है। इसका मुख्य कारण रिमोट वर्क, रहने का बढ़ता खर्च और लाइफस्टाइल की पसंद हैं।

व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था दूसरे विकसित देशों से बेहतर प्रदर्शन कर रही है और सरकार लाखों गैर-कानूनी इमिग्रेंट्स को डिपोर्ट कर रही है, जबकि “अनगिनत अल्ट्रा-हाई नेट वर्थ विदेशियों” को टारगेट भी बना रही है। जिन अल्ट्रा-हाई पैकेज वाले विदेशियों को निशाना बनाया जा रहा है, उनमें से कुछ अमेरिका में बसने के लिए गोल्ड कार्ड के लिए 1 मिलियन डॉलर का भुगतान कर रहे हैं।

अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग ने पिछले साल 6,75,000 डिपोर्टेशन और 2.2 मिलियन सेल्फ-डिपोर्टेशन की रिपोर्ट दी।

द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, अमेरिकी नागरिकता छोड़ने की अपील भी बढ़ रही है। अमेरिकी सरकार के पास एक महीने से ऐसे अमेरिकियों का बैकलॉग है, जो या तो विदेशी पासपोर्ट पाने के लिए या विदेश से होने वाली कमाई पर टैक्स से बचने के लिए नागरिकता छोड़ना चाहते हैं। इमिग्रेशन फर्म का कहना है कि 2024 में नागरिकता छोड़ने की अपील 48 फीसदी बढ़ गई और 2025 में और बढ़ने की संभावना है।

रिलोकेशन कंपनियों का कहना है कि आज के माइग्रेंट्स में परिवार और मिड-करियर प्रोफेशनल शामिल हैं। बर्लिन में शिफ्ट हुए क्रिस फोर्ड ने कहा, “आपको अपने 5 साल के बच्चे के किंडरगार्टन में जाकर एक्टिव शूटर ड्रिल करने की संभावना का सामना नहीं करना पड़ता। अमेरिका में सैलरी ज्यादा है, लेकिन यूरोप में जीवन की गुणवत्ता ज्यादा है।”

स्पेन में, अधिकारी इस इनफ्लो को मानते हैं। स्पेनिश सरकार की प्रवक्ता एल्मा सैज डेलगाडो ने कहा, “कई अमेरिकी आते हैं, और कई प्रेम कहानियां हैं। चार ग्लास वाइन के बाद, वे रुक जाते हैं।”

एजुकेशन ट्रेंड्स भी इस बदलाव को दिखाते हैं। अमेरिका आने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों में भी 17 फीसदी की कमी आई। इसके और भी कम होने की उम्मीद है। ज्यादा अमेरिकी यूरोपीय विश्वविद्यालयों में एडमिशन ले रहे हैं। मार्च 2025 तक ब्रिटिश नागरिकता के लिए एप्लीकेशन 6,600 तक पहुंच गए। अमेरिकियों को जारी किए गए आयरिश पासपोर्ट 2024 में 31,825 तक पहुंच गए और पिछले साल लगभग 40,000 थे।

न्यूयॉर्क से आई केली मैककॉय ने कहा, “अल्बानिया में, आप अभी बहुत आसानी से 1,000 डॉलर हर महीने में गुजारा कर सकते हैं।”

इससे पहले 1935 में ऐसा देखने को मिला था, जब अमेरिका में आने से ज्यादा लोगों ने अमेरिका छोड़ दिया था। 1935 में महामंदी के दौरान कई अमेरिकियों ने सोवियत यूनियन में काम की तलाश की थी। फाइनेंशियल डेली ने बताया कि सेंसस के पुराने डेटा में उस घटना को एक बहुत कम होने वाले पल के तौर पर दर्ज किया गया है, जब अमेरिका नेट इमिग्रेशन वाला देश बन गया था।

--आईएएनएस

केके/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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SA vs WI: साउथ अफ्रीका ने टॉस जीतकर चुनी फील्डिंग, वेस्टइंडीज करेगी पहले बैटिंग, देखें दोनों प्लेइंग-11

SA vs WI: आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 का 47वां मुकाबला साउथ अफ्रीका और वेस्टइंडीज के बीच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम में खेला जा रहा है. इस मैच में टॉस के लिए मैदान पर वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप और साउथ अफ्रीका के कप्तान एडन मार्कराम आए. इस दौरान साउथ अफ्रीका ने टॉस जीता और पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया. इसके साथ ही मार्कराम ने वेस्टइंडीज को पहले बैटिंग करने का न्योता दिया.

टॉस पर क्या बोले दोनों कप्तान

टॉस जीतने के बाद साउथ अफ्रीका के कप्तान एडेन मार्करम ने कहा, 'हम पहले बॉलिंग करेंगे. विकेट काफी अच्छा लग रहा है, हमने यहां कुछ गेम खेले हैं. यह थोड़ा मुश्किल लग रहा है और हम इसका पूरा फायदा उठाने की कोशिश करेंगे. हम लकी रहे हैं कि हमें यहां कुछ गेम खेलने को मिले, कंडीशन अलग रही हैं और हम इसका इंतजार कर रहे हैं. वही टीम है हमने अपनी टीम में कोई बदलाव नहीं किया है'.

टॉस हारने के बाद वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप ने कहा, 'हम टॉस जीत जाते तो हम भी पहले बॉलिंग करते. हमने एक बदलाव किया है. रोस्टन चेस ने अकील होसेन की जगह ली है. यह बस एक टैक्टिकल बदलाव है, उसे ड्रॉप नहीं किया गया है क्योंकि उसने बहुत अच्छा खेला है. हमने अब तक अच्छा क्रिकेट खेला है और लड़के इस गेम के लिए तैयार हैं'.

वेस्टइंडीज और साउथ अफ्रीका की प्लेइंग-11

वेस्ट इंडीज: ब्रैंडन किंग, शाई होप (विकेट कीपर), शिमरॉन हेटमायर, रोवमैन पॉवेल, शेरफेन रदरफोर्ड, रोस्टन चेज़, रोमारियो शेफर्ड, जेसन होल्डर, मैथ्यू फोर्ड, गुडाकेश मोटी, शमर जोसेफ.

साउथ अफ्रीका: एडेन मार्करम (कप्तान), क्विंटन डी कॉक (विकेट कीपर), रयान रिकेल्टन, डेवाल्ड ब्रेविस, डेविड मिलर, ट्रिस्टन स्टब्स, मार्को जेनसन, कॉर्बिन बॉश, कगिसो रबाडा, केशव महाराज, लुंगी एनगिडी.

ये मुकाबला वेस्टइंडीज और दक्षिण अफ्रीका के अलावा भारत के लिए मायने रखता है. वेस्टइंडीज की हार से भारत को फायदा मिलेगा, जबकि साउथ अफ्रीका हारी तो उसके लिए सेमीफाइनल में पहुंचने का रास्ता पेंचीदा हो जाएगा.

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