भारत में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट अब केवल तकनीक और नवाचार का केंद्र नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक युद्ध का अखाड़ा बन गई है। यूथ कांग्रेस के सदस्यों द्वारा किए गए 'शर्टलेस प्रोटेस्ट' के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस ने इस अंतरराष्ट्रीय इवेंट की छवि खराब करने के लिए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पैसे देकर एक "नेगेटिव पीआर कैंपेन" चलाया है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे एक सुनियोजित साजिश करार दिया। पार्टी के मुताबिक, कांग्रेस PR टीम के सदस्यों ने इन्फ्लुएंसर्स से संपर्क किया और समिट को फेल दिखाने वाले कंटेंट के बदले 10,000 रुपये से 40,000 रुपये तक के पेमेंट का प्रस्ताव दिया।
BJP का दावा है कि AI समिट को बदनाम करने की साज़िश है
X पर बात करते हुए, BJP के नेशनल स्पोक्सपर्सन शहज़ाद पूनावाला ने दावा किया कि कांग्रेस ने AI समिट और भारत को बदनाम करने के लिए एक कैंपेन चलाया, जिसमें इन्फ्लुएंसर्स को इवेंट की "बदनामी" करने के लिए पैसे दिए गए। उन्होंने पोस्ट में लिखा, "कांग्रेस का पैसा लो, AI समिट, भारत बदनाम करो मॉडल। कांग्रेस इकोसिस्टम ने AI समिट की बुराई करने के लिए पैसे दिए? BJP विरोध में देश विरोध? शर्टलेस एक्ट के बाद, अब यह?"
इन्फ्लुएंसर्स ने AI समिट की बुराई करने के लिए कैंपेन चलाने का दावा किया
कई इन्फ्लुएंसर्स के पब्लिकली यह दावा करने के बाद विवाद और बढ़ गया कि उन्हें ऐसे ऑफर मिले थे। ऑनलाइन शेयर किए गए वीडियो में, उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस से जुड़े लोगों ने उनसे इवेंट की बुराई करने वाला स्क्रिप्टेड कंटेंट बनाने के लिए कहा था।
उनमें से कुछ ने कहा कि उनके पास कथित फाइनेंशियल डील के सबूत के तौर पर चैट मैसेज और ऑडियो रिकॉर्डिंग हैं।
शर्टलेस प्रोटेस्ट
पिछले शुक्रवार को, इंडियन यूथ कांग्रेस के वर्कर्स के एक ग्रुप ने AI इम्पैक्ट समिट के दौरान एक एग्जीबिशन हॉल के अंदर शर्टलेस प्रोटेस्ट किया। प्रोटेस्ट करने वाले लोग सरकार और इंडिया-US ट्रेड डील के खिलाफ नारे लिखी टी-शर्ट पकड़े हुए वेन्यू से गुजरे, जिसके बाद सिक्योरिटी वालों ने उन्हें बाहर निकाल दिया।
बाद में दिल्ली पुलिस ने इस घटना के सिलसिले में IYC के प्रेसिडेंट श्रीनिवास BV समेत 8 वर्कर्स को गिरफ्तार किया।
BJP ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस को "एंटी-इंडिया" बताया और उस पर पब्लिक प्लेटफॉर्म पर बार-बार देश की इमेज खराब करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने अभी तक इन आरोपों पर डिटेल में जवाब नहीं दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 8 की एनसीआरटी किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' नामक चैप्टर शामिल किए जाने पर सख्त नाराजगी जताई है। कोर्ट ने शिक्षा विभाग के सचिव और एनसीआरटी के डायरेक्टर डॉ. दिनेश प्रसाद सकलानी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अदालत ने पूछा है कि इस विवादित कंटेंट को तैयार करने वालों के खिलाफ अवमानना या अन्य कानूनी कार्रवाई क्यों न की जाए। बीजेपी सांसद और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने बताया कि कोर्ट इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है।
कक्षा 8 की किताब पर लगा पूर्ण प्रतिबंध, अवमानना की चेतावनी
भले ही एनसीआरटी ने इस चैप्टर के लिए माफी मांग ली है, लेकिन चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कक्षा 8 की उस किताब पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। बेंच ने साफ चेतावनी दी है कि इस आदेश को नजरअंदाज करने या किसी भी तरह से बाईपास करने की कोशिश को न्याय के काम में सीधा दखल और कोर्ट की अवमानना माना जाएगा।
विवादित चैप्टर पास करने वाली कमेटी तलब
सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआरटी को आदेश दिया है कि वह उस 'टीचिंग-लर्निंग मटीरियल्स कमेटी' की पूरी जानकारी रिकॉर्ड पर रखे जिसने इस चैप्टर को मंजूरी दी थी। कोर्ट ने चैप्टर बनाने वाली टीम के सभी सदस्यों के नाम, उनकी पढ़ाई-लिखाई और उनके अनुभव का पूरा ब्यौरा पेश करने का निर्देश दिया है, ताकि जिम्मेदारी तय की जा सके।
सीजेआई की सख्त टिप्पणी, न्यायपालिका आज खून से लथपथ है
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायपालिका पर सुनियोजित हमले हो रहे हैं। उन्होंने कहा, 'आज ज्यूडिशियरी खून से लथपथ है और कोई भी कुछ भी कह सकता है।' सीजेआई के मुताबिक, इंटरनेट और दुकानों पर ऐसा मटीरियल उपलब्ध कराना एक सोची-समझी साजिश है, ताकि पूरी शिक्षा व्यवस्था के जरिए समाज में गलत संदेश जाए। उन्होंने इसे भारतीय न्यायपालिका की छवि खराब करने की एक गहरी और सुनियोजित साजिश करार दिया।
सॉलिसिटर जनरल और बार काउंसिल ने की सख्त कार्रवाई की मांग
बीजेपी सांसद मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि बार काउंसिल इस कदम से बेहद गुस्से में है। कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल भी मौजूद थे और उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस मामले के दोषियों का पता लगाकर उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। उन्होंने मांग की है कि बाजार में मौजूद ऐसी सभी किताबों को तुरंत वापस लिया जाए। बार काउंसिल के नेताओं ने भी सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख का समर्थन किया है और इसे संस्थान की गरिमा बचाने के लिए जरूरी बताया है।
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