एक-दूजे के हुए रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा, तेलुगु रीति-रिवाजों से की शादी
Rashmika Mandanna Vijay Deverakonda Wedding: रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा शादी के बंधन में बंध गए हैं. जी हां, 36 साल के विजय देवरकोंडा और 29 साल की रश्मिका मंदाना ने पारंपरिक तेलुगू रीति-रिवाजों के अनुसार शादी की. इसके बाद दोनों कोडवा परंपरा के अनुसार भी शादी संपन्न करेंगे, जो रश्मिका के परिवार की सांस्कृतिक मान्यताओं के मुताबिक होगी.
24 फरवरी से शुरू हुईं शादी की रस्में
आपको बता दें कि शादी की रस्में 24 फरवरी से शुरू हुईं. इस समारोह की खास बात यह रही कि पारंपरिक हल्दी और मेहंदी जैसी रस्मों के साथ-साथ फ्रेंडली क्रिकेट मैच और स्विमिंग पूल में वॉलीबॉल जैसे मजेदार खेलों का भी आयोजन किया गया. विजय और रश्मिका ने अपनी हल्दी सेरेमनी की झलक साझा की है, हालांकि अब तक शादी की आधिकारिक तस्वीरें सामने नहीं आई हैं. संभावना है कि कोडवा वेडिंग के बाद दोनों कुछ खास तस्वीरें साझा करें.
क्या होती है कोडवा वेडिंग?
भारत के विभिन्न क्षेत्रों की तरह कर्नाटक के कोडगु (कूर्ग) क्षेत्र का कोडवा समुदाय भी अपनी अनोखी परंपराओं और विवाह संस्कारों के लिए मशहूर है. कोडवा समुदाय अपनी समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक व्यंजनों और सदियों पुरानी रीति-रिवाजों के लिए जाना जाता है, जिनकी झलक उनकी शादियों में साफ दिखाई देती है.
कोडवा समुदाय में विवाह को स्थानीय भाषा में “मंगला” कहा जाता है. यह समारोह रंग-बिरंगा, आनंदमय और उत्साह से भरपूर होता है. कोडवा शादियां केवल भोजन, संगीत और नृत्य तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि यह परिवार और मित्रों के मिलन और खुशियां साझा करने का महत्वपूर्ण अवसर भी होती हैं.
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गर्भाशय को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये 4 आसान उपाय, हार्मोन संतुलन से प्रजनन क्षमता तक मिलेगा लाभ
नई दिल्ली, 26 फरवरी (आईएएनएस)। गर्भाशय किसी भी महिला के शरीर का सबसे जरूरी अंग है, जो हॉर्मोन बनाने से लेकर उन्हें संतुलित करने का काम करता है। अगर गर्भाशय में किसी भी प्रकार की परेशानी है तो सबसे पहले महिला की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। आयुर्वेद से लेकर विज्ञान तक में गर्भाशय की विशेष देखभाल के तरीके बताए गए हैं।
अगर गर्भाशय में किसी भी प्रकार की परेशानी होती है तो थायरायड और मोटापे के अलावा महिलाओं को सिस्ट, मासिक चक्र में बदलाव और प्रजनन क्षमता में कमजोरी की शिकायत होती है। ऐसे में हर महिला को गर्भाशय की विशेष देखभाल करनी चाहिए।
आयुर्वेद से लेकर विज्ञान तक में गर्भाशय की विशेष देखभाल के तरीके बताए गए हैं, जिससे प्रजनन तंत्र को भी सुरक्षित रखा जा सकता है। पहला तरीका है सोने से पहले शांति और हल्की गर्मी का वातावरण। सोने से पहले आस-पास के वातावरण को शांत करें और हल्की लाइट में मन और शरीर दोनों को शांत करने की कोशिश करें। रात के समय शरीर खुद की मरम्मत के काम पर लग जाता है और आम यानी टॉक्सिन को निकालने का काम करता है। ऐसे में गर्भाशय के हीलिंग का काम भी शुरू हो जाता है।
दूसरा तरीका है गर्माहट देना। मासिक चक्र के दौरान गर्भाशय का संकुचन तेजी से होता है और वापस सामान्य होने में समय लगता है। ऐसे समय में हॉर्मोन परिवर्तन के साथ हल्के दर्द और सूजन का अनुभव होता है। इसके लिए हफ्ते में कम से कम दो बार गर्भाशय पर पानी की गर्म बोतल से सिकाई जरूर करें। इससे गर्भाशय की मांसपेशियों को आराम मिलता है और ऐंठन भी कम होती है।
तीसरा तरीका है खाना खाने के बाद खुद को शांत रखना। खाने के बाद शरीर की ऊर्जा को पाचन तंत्र और गर्भाशय की तरफ भेजने की कोशिश करें और शरीर की हर सांस को महसूस करें। इससे यूट्रस में जमा हो रही गंदगी निकलती है और रक्त का प्रवाह भी तेज होता है। इसके लिए खाने के कुछ समय बाद व्रजासन में बैठें।
चौथा तरीका है पीठ के निचले हिस्से और पेल्विक एरिया में सर्कुलर मोशन में मसाज करना। मसाज के लिए बादाम या जैतून का तेल ले सकते हैं। रोजाना रात को हल्के हाथ से पीठ के निचले हिस्से और पेल्विक एरिया में हल्की मसाज करें। इससे रक्त का प्रवाह कम होगा और मांसपेशियों को आराम मिलेगा।
--आईएएनएस
पीएस/वीसी
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