Mark Zuckerberg को 3 दिन में मांगनी होगी माफी, PM Modi का वीडियो हटाने पर संसदीय समिति सख्त
नयी दिल्ली, पांच अगस्त संसद की एक स्थायी समिति ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एक वीडियो फेसबुक से हटाए जाने के मामले में बुधवार को मेटा के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को माफी मांगने के लिए तीन दिन का समय दिया और ऐसा नहीं होने पर उन्हें प्राप्त छूट वापस लेने की चेतावनी दी। छूट वापस लिए जाने का अर्थ यह होगा कि मेटा के मंचों पर आपत्तिजनक सामग्री डाले जाने पर प्राथमिकी दर्ज हो सकती है और अभियोजन शुरू हो सकता है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव को लिखे पत्र में, लोकसभा सचिवालय की एक निदेशक ने कहा कि समिति ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस वीडियो को फेसबुक से 5-6 घंटे तक हटाए जाने के मामले को बहुत गंभीरता से लिया है, जिसमें उन्होंने परीक्षा से जुड़े विवादों और प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बारे में छात्रों और ‘जेन जेड’ को संबोधित किया था।
ए. ज्योतिर्मयी के हस्ताक्षर वाले पत्र में कहा गया है, ‘‘विचार-विमर्श के दौरान, समिति ने इस मामले पर मेटा के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग से माफी की मांग की। अगर वह यह पत्र मिलने के तीन दिन के भीतर बिना किसी शर्त के माफी नहीं मांगते हैं, तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3) के तहत उन्हें मिली सुरक्षा/छूट वापस ली जा सकती है और एक प्रकाशक के तौर पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।’’ भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने उन मध्यवर्ती (इंटरमीडियरी) मंचों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है जिन पर बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (सीएएसएम) डाली जाती है और महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक विषयवस्तु होती है। पत्र में कहा गया है, ‘‘अगर मध्यवर्ती मंच अपने पोर्टल से सीएएसएम सामग्री नहीं हटाते तो आईटी कानून की धारा 79 (3) के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।’’ समिति के अध्यक्ष दुबे ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘मार्क जुकरबर्ग को तीन दिन के अंदर माफी मांगनी होगी।
अगर वह माफी नहीं मांगते हैं, तो हम इन सोशल मीडिया मंचों को दी गई ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा वापस ले लेंगे, जिसका वे दुरुपयोग करते हैं। इसके बाद, सोशल मीडिया मंचों पर आने वाले हर अपशब्द वाली, हिंसक और आपत्तिजनक पोस्ट के लिए मेटा प्रमुख के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। पूरे देश में प्राथमिकियों की बाढ़ आ जाएगी और उसके बाद वह जेल की सलाखों के पीछे होंगे।’’ समिति ने धोखाधड़ी वाले ऐप्स के कारण निवेशकों के 48 लाख रुपये से ज्यादा गंवाने के मामले में गूगल इंडिया के प्रमुख के खिलाफ भारत सरकार से कार्रवाई की भी मांग की है।
पत्र में कहा गया, ‘‘समिति ने हैदराबाद साइबर पुलिस द्वारा गूगल इंडिया के प्रमुख पर साइबर धोखाधड़ी करने वालों के सह-आरोपी के रूप में कार्रवाई पर चर्चा की। इससे पहले शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि उन्होंने धोखाधड़ी वाले ऐप्स के जरिए निवेश करके 48 लाख रुपये से ज्यादा गंवा दिए। समिति चाहती है कि भारत सरकार भी गूगल इंडिया के खिलाफ वैसी ही कार्रवाई करे।’’ यह पत्र उस बैठक के दो दिन बाद भेजा गया है जिसमें समिति ने ‘सोशल और डिजिटल प्लेटफॉर्म और उनके विनियमन’ पर गृह मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ-साथ स्नैपचैट, गूगल, एक्स, मेटा (फेसबुक, व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम) तथा यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की थी।
संसद की कोई स्थायी समिति केवल सिफारिश कर सकती है, कार्रवाई सरकार को करनी होती है। बुधवार को मेटा की वैश्विक टीम ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। फेसबुक से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पोस्ट हटाए जाने के मामले में केंद्र सरकार ने कंपनी के अधिकारियों को तलब किया था।
बैठक में महत्वपूर्ण पोस्ट पर की गई गलत कार्रवाई, सोशल मीडिया मंच पर बाल यौन शोषण एवं उत्पीड़न सामग्री (सीएसएएम) पर प्रभावी रोक में चूक और अन्य नियामकीय मुद्दों पर चर्चा हुई। मेटा के वैश्विक मामलों के अधिकारी जोएल कैपलन समेत कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने आईटी सचिव एस. कृष्णन और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ करीब 45 मिनट तक बैठक की। सोमवार को हुई बैठक के बाद, समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा था कि यह पहली बार नहीं है जब मेटा ने कोई वीडियो हटाया है।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘2024 में मार्क जुकरबर्ग ने संसदीय चुनाव के नतीजों पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उनकी सोच देश को अस्थिर करने की है।’’ दुबे ने दावा किया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म गृह मंत्रालय और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालयों के निर्देशों को नहीं मानते हैं। समिति को संबोधित करते हुए दुबे ने कहा कि प्रधानमंत्री की आधिकारिक फेसबुक पोस्ट को कुछ समय के लिए हटाना एक गंभीर मामला है और समिति यह जानना चाहती है कि ऐसा क्यों किया गया।
उन्होंने कहा, ‘‘या तो सिस्टम में कोई बड़ी खराबी है या फिर मेटा और इंस्टाग्राम की तरफ से हमारे देश के प्रधानमंत्री की छवि खराब करने की जानबूझकर कोशिश की गई है। अगर मेटा प्रधानमंत्री की आधिकारिक पोस्ट के साथ ऐसा व्यवहार करता है, तो हमारे देश के आम आदमी की पोस्ट के बारे में क्या बात की जाए। ऐसी खराबी को सिर्फ तकनीकी त्रुटि कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।’’ मेटा ने इस घटना के पीछे तकनीकी खराबी की वजह बताई और खेद जताया।
कंपनी का मुख्यालय अमेरिका में है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को यह स्पष्टीकरण ‘नाकाफी’ लगा। कंपनी ने कहा कि सामग्री ‘गलती से’ हट गई थी और उसे प्लेटफॉर्म पर बहाल कर दिया गया।
आईटी अधिनियम की धारा 79 कुछ मामलों में मध्यवर्ती की जवाबदेही से छूट प्रदान करती है। हालांकि, धारा 79(3) में कहा गया है कि ‘सेफ हार्बर’ संरक्षण दो स्थितियों में खत्म हो जाएगा -- अगर इंटरमीडियरी ने अपने मंच पर गैर-कानूनी काम करने के लिए ‘‘साजिश रची हो, उकसाया हो, मदद की हो, या (धमकी, वादे या किसी और तरीके से) प्रेरित किया हो’’। इसमें यह भी कहा गया है कि ‘‘अगर मध्यवर्ती को इस बात की ‘पक्की जानकारी’ मिल जाती है कि किसी गैर-कानूनी काम के लिए सामग्री का इस्तेमाल हो रहा है, और फिर भी वह उस गैर-कानूनी सामग्री को तुरंत नहीं हटाता या उस तक पहुंच बंद नहीं करता, तो उसे मिली छूट खत्म हो जाती है।’’ ऐसे मामलों में, सरकार इंटरमीडियरी -- यानी इस मामले में मेटा और उसके अधिकारियों पर अभियोजन चला सकती है।
सोशल मीडिया कंपनियों के लिए ‘सेफ हार्बर’ एक ऐसा कानूनी संरक्षण है जो उन्हें अपने मंच पर उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए जिम्मेदार या उत्तरदायी होने से बचाता है।
Rahul Gandhi से मिले Kiren Rijiju; संसद गतिरोध खत्म करने में मांगा सहयोग
नयी दिल्ली, पांच अगस्त संसद के दोनों सदनों में जारी गतिरोध खत्म करने के प्रयास के तहत सरकार ने बुधवार को मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस से संपर्क साधा और मानसून सत्र के शेष दिनों में कार्यवाही सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सहयोग मांगा। मानसून सत्र की 20 जुलाई को शुरूआत होने के दिन से ही विपक्ष के लगातार विरोध प्रदर्शन के कारण संसद की कार्यवाही में बार-बार व्यवधान आया है। कुछ राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि स्वतंत्रता दिवस के बाद, संसद का एक विशेष सत्र बुलाकर पिछले सत्र में पारित नहीं हो सके परिसीमन विधेयक और नारी शक्ति वंदन (संशोधन) विधेयक को दोबारा पेश किया जा सकता है।
हालांकि, सरकार के सूत्रों ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई कदम उठाने की योजना नहीं है। सूत्रों ने बताया कि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि 13 अगस्त को मानसून सत्र संपन्न होने से पहले इसी सत्र में परिसीमन विधेयक लाया जाएगा या नहीं। हालांकि, विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए पेश किये जाने के दौरान गृह मंत्री अमित शाह के संसद में बोलने की संभावना है।
विपक्ष सदन की कार्यवाही के दौरान शाह की अनुपस्थिति को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। इस बीच, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। सूत्रों ने बताया कि संसद भवन परिसर में दोनों नेताओं के बीच हुई मुलाकात के दौरान संसद की कार्यवाही में बने गतिरोध को समाप्त करने से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब संसद के मानसून सत्र में अयोध्या स्थित राम मंदिर से कथित चढ़ावा चोरी और छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के मुद्दों को लेकर लगातार गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। मानसून सत्र शुरू होने के बाद से लोकसभा में अब तक एक भी दिन प्रश्नकाल नहीं हो सका है। हंगामे के बीच पांच विधेयक बिना चर्चा के पारित किए जा चुके हैं।
विपक्षी दलों ने शुरुआत में नीट प्रश्नपत्र लीक और राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। बाद में, उन्होंने नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर चर्चा की मांग की। विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री की सदन में मौजूदगी तथा उनके बयान की भी मांग की।
सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान रीजीजू ने संसद में जारी गतिरोध समाप्त करने के लिए राहुल गांधी से सहयोग मांगा। बुधवार को भी लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। बाद में सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।
लोकसभा की कार्यवाही आज पूर्वाह्न 11 बजे शुरू होने पर अध्यक्ष ओम बिरला ने जब प्रश्नकाल शुरू कराया तो विपक्ष के सदस्य हंगामा करने लगे। वे अयोध्या में राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठा रहे थे और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के बारे में गृह मंत्री अमित शाह के बयान की अपनी मांग दोहरा रहे थे। बिरला ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों से प्रश्नकाल चलने देने का आग्रह करते हुए कहा, ‘‘प्रश्नकाल महत्वपूर्ण होता है और इसमें सदस्यों को अवसर मिलना चाहिए।
मेरा आग्रह है कि प्रश्नकाल चलाने में सहयोग करें। प्रश्नकाल के बाद सभी मुद्दों पर आपसे चर्चा करुंगा।’’ उन्होंने आसन के पास आकर नारे लगा रहे और पोस्टर लहरा रहे सदस्यों से कहा, ‘‘सदन के अंदर या बाहर नारेबाजी लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। आप नियोजित तरीके से पोस्टरबाजी करके और प्रदर्शन करके सदन की गरिमा को गिराना चाहते हैं।
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