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ब्राजील में Lula Da Silva की चौथी जीत, अमेरिकी महाद्वीप के वामपंथी नेताओं ने दी बधाई

अमेरिका महाद्वीप के नेताओं ने ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा को विपक्षी उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो को हरा कर अभूतपूर्व चौथी बार राष्ट्रपति निर्वाचित होने पर सोशल मीडिया पर बधाई दी। क्षेत्र के अन्य वामपंथी रुझान वाले नेताओं ने नतीजों पर विशेष रूप से तेजी से प्रतिक्रिया दी। लूला को लातिन अमेरिका के वामपंथी खेमे में एक सम्मानित नेता माना जाता है।

उन्होंने 2003 से 2010 तक ब्राजील का शासन संभाला था। उस समय क्षेत्र के कई देशों में वामपंथी नेता सत्ता में थे। वर्ष 2023 में दोबारा सत्ता में लौटने के बाद से लूला, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुखर आलोचक रहे हैं।

लूला की जीत पर मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम ने कहा, ‘‘लोकतंत्र जिंदाबाद, ब्राजील की जनता की जीत हुई है। राष्ट्रपति लूला को बधाई।’’ क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने कहा, ‘‘प्रिय भाई लूला, क्यूबा की सरकार और जनता की ओर से मैं आपको इस ऐतिहासिक जीत के लिए बधाई देता हूं। यह जीत आपके नेतृत्व में ब्राजील की जनता द्वारा अपनाए गए शांति, संप्रभुता और सामाजिक न्याय के मार्ग को जारी रखना सुनिश्चित करती है।’’ वहीं, अर्जेंटीना की पूर्व राष्ट्रपति क्रिस्टीना किर्चनर ने कहा, ‘‘कॉमरेड राष्ट्रपति लूला, आपको बधाई।

आपने अपने सातवें राष्ट्रपति चुनाव में अपने हमवतन लोगों के जोश और विवेक को जगाया और उन्हें इस लड़ाई में जीत दिलाई।’’ चिली के राष्ट्रपति जोस एंटोनियो कास्त ने कहा, ‘‘चिली और ब्राजील के सामने साझा भविष्य की व्यापक संभावनाएं हैं। हम अपने देशों के बीच आर्थिक एकीकरण और क्षेत्र में संगठित अपराध से मुकाबले के लिए संबंध मजबूत करने वाले एजेंडे पर काम जारी रखेंगे।’’ इक्वाडोर के राष्ट्रपति डैनियल नोबोआ ने कहा, ‘‘इस जीत के लिए लूला को बधाई। हमारे क्षेत्र के दुश्मन साझा हैं, चुनौतियां समान हैं और मिलकर काम करने पर हमें बहुत कुछ हासिल हो सकता है।’’ इस बीच, पेरू के राष्ट्रपति केइको फुजीमोरी और बोलीविया के राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज ने भी लूला को बधाई दी।

अमेरिका के सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने कहा, ‘‘लूला ने ब्राजील के श्रमिकों और लोकतंत्र के पक्ष में आवाज उठाई है तथा अगले चार वर्षों में भी ऐसा करते रहेंगे।’’

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Prabhasakshi NewsRoom: France में Macron के खिलाफ विद्रोह! Marine Le Pen ने ठोकी राष्ट्रपति पद की दावेदारी, कई और यूरोपीय देशों में भारी बवाल

फ्रांस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के खिलाफ गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। महंगाई, आर्थिक बदहाली और सरकार से बढ़ती नाराजगी के बीच देश हिंसा और अराजकता की चपेट में है। जगह-जगह आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट के बीच हजारों गिरफ्तारियां हो रही हैं। इसी उथल-पुथल ने राष्ट्रपति पद की दावेदार मरीन ले पेन को बड़ा सियासी मौका दे दिया है। उन्होंने मैदान में उतरकर कानून-व्यवस्था बहाल करने और फ्रांस को फिर मजबूत बनाने का दावा ठोक दिया है। उधर, फ्रांस से इटली, अल्बानिया, स्पेन और पुर्तगाल तक सड़कों पर उमड़ता जनाक्रोश बता रहा है कि यूरोप में संकट अब सिर्फ अर्थव्यवस्था का नहीं, सत्ता और सियासत का भी बन चुका है।

फ्रांस में जनाक्रोश, हिंसा और सत्ता के सामने चुनौती

हम आपको बता दें कि सप्ताहांत में फ्रांस समेत कई यूरोपीय देशों में महंगाई, आर्थिक संकट और सरकार की नीतियों के खिलाफ बड़े प्रदर्शन हुए। फ्रांस में शनिवार को सड़कों पर उतरे लोगों की संख्या को लेकर सरकार और प्रदर्शन आयोजकों के आंकड़ों में बड़ा अंतर रहा। सरकार ने करीब 4.10 लाख लोगों के प्रदर्शन में शामिल होने की बात कही, जबकि आयोजकों के मुताबिक यह संख्या लगभग आठ लाख थी। प्रदर्शनों के दौरान देशभर में 1,300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया।

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कई शहरों में प्रदर्शन हिंसक हो गए। पेरिस में पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, जबकि मार्सेई में सड़क पर अवरोधक जलाए गए और बोर्डो में दुकानों व इमारतों को नुकसान पहुंचाया गया। ल्योन में भी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए आंसू गैस छोड़ी। इससे पहले हुए प्रदर्शनों के दौरान लिमोज के ऐतिहासिक सिटी हॉल और ल्योन के पर्यटन कार्यालय में आग लगा दी गई थी। मार्सेई में नगर प्रशासन की इमारत पर हमला हुआ, जबकि पेरिस में कई महंगी दुकानों में लूटपाट और वाहनों में आगजनी की घटनाएं हुईं।

हालात पर काबू पाने के लिए सरकार ने करीब 70 हजार पुलिसकर्मियों को तैनात किया और कई शहरों में सख्त पाबंदियां लगाईं। अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार को हुई झड़पों में 53 पुलिसकर्मी घायल हुए। सरकार ने हिंसा के लिए कट्टरपंथी प्रदर्शनकारियों को जिम्मेदार ठहराया, जबकि वामपंथी नेता जां-लुक मेलांशों ने पुलिस की कार्रवाई और मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बढ़ते करों, महंगाई और आर्थिक दबाव ने आम लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। बेरोजगारी, गरीबी और भविष्य को लेकर चिंता से युवा भी परेशान हैं। लगातार बढ़ता यह असंतोष अब मैक्रों सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

ले पेन का दांव: अव्यवस्था को बनाया चुनावी मुद्दा

दूसरी ओर, फ्रांस में जारी अशांति के बीच दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपना अभियान शुरू करते हुए कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय आत्मविश्वास बहाल करने का वादा किया। उन्होंने आव्रजन पर सख्ती, सीमाओं पर नियंत्रण, विदेशी अपराधियों के निष्कासन और गिरोहों तथा मादक पदार्थों के कारोबार के खिलाफ कठोर कार्रवाई का संकल्प लिया।

ले पेन ने आर्थिक मोर्चे पर कारोबारियों के लिए करों में कटौती, नौकरशाही घटाने, उद्योग और नवाचार को बढ़ावा देने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता में निवेश का समर्थन किया। उन्होंने सेवानिवृत्ति की आयु में और वृद्धि का विरोध भी किया। हम आपको यह भी बता दें कि एक जनमत सर्वेक्षण में ले पेन को 32 से 33.5 प्रतिशत समर्थन के साथ आगे बताया गया, जबकि मेलांशों 17 प्रतिशत पर थे। हालांकि, ले पेन स्वयं यूरोपीय संसद की निधियों के गबन के मामले में दोषसिद्धि के बाद अपील कर रही हैं। उनकी पार्टी ने जॉर्डन बार्देला को दोबारा अध्यक्ष चुना है और उन्हें संभावित प्रधानमंत्री के रूप में पेश किया है।

इटली से अल्बानिया तक, सड़कों पर यूरोप का असंतोष

उधर, यूरोप के दूसरे देशों में भी सप्ताहांत के प्रदर्शन सरकारों के लिए चेतावनी बनकर उभरे। इटली के मिलान, रोम, ट्यूरिन, नेपल्स, बोलोनिया और फ्लोरेंस में हजारों युवा सड़कों पर उतरे। कुछ स्थानों पर पत्थर, बोतलें और पटाखे फेंके गए। पुलिस के मुताबिक, आठ शहरों में नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया और 371 लोगों को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया, जिनमें 110 नाबालिग थे।

प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने मिलान में 500 अतिरिक्त सैनिक भेजने और हिंसा में शामिल नाबालिगों के खिलाफ सख्त दंड का ऐलान किया। रोम में प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने कोलोसियम में घुसने की कोशिश की, जबकि एक अलग युद्ध-विरोधी मार्च के दौरान पुलिस से झड़प हुई। मेलोनी ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए, लेकिन नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।

वहीं अल्बानिया की राजधानी तिराना में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ छात्रों के नेतृत्व में प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग भी उठाई। पुलिस ने आंसू गैस, वाटर कैनन और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया। सरकारी इमारतों, बैंकों और दुकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें आईं। सरकार के समर्थन से जुड़े एक महंगे तटीय विकास प्रोजेक्ट को लेकर पहले से ही असंतोष बना हुआ था।

स्पेन और पुर्तगाल में पेंशन और मकानों का संकट

इसके साथ ही स्पेन में हजारों पेंशनभोगियों और अन्य प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक पेंशन व्यवस्था की सुरक्षा, महंगाई के अनुरूप पेंशन बढ़ाने और महिलाओं तथा पुरुषों के बीच पेंशन के अंतर को कम करने की मांग की। स्पेन में बढ़ती कीमतों के बीच आवास संकट भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। घरों की कीमतें और किराये आम लोगों की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं।

उधर, पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में हजारों लोगों ने महंगे किराये और आवास की कमी के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने रोसियो चौक पर 100 से अधिक तंबू लगाए, जिन्हें रविवार तड़के पुलिस ने हटा दिया। इस दौरान कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया और मामूली चोटें लगने की खबरें आईं। प्रदर्शनकारी उस प्रस्तावित कानून का विरोध कर रहे हैं, जिससे मकान मालिकों के लिए किरायेदारों को बेदखल करना आसान हो सकता है और नए किरायों पर लगी सीमाएं हट सकती हैं। हम आपको बता दें कि पुर्तगाल में 2017 के बाद से मकानों की कीमतें दोगुने से अधिक हो चुकी हैं और नए किरायों में भी लगभग इतनी ही वृद्धि दर्ज की गई है। बैंक ऑफ पुर्तगाल के अनुसार, देश में करीब तीन लाख मकानों की कमी है।

आर्थिक संकट से राजनीतिक विस्फोट तक

देखा जाये तो यूरोप की सड़कों पर उठती आवाजों का संदेश स्पष्ट है। जनता केवल सरकारों के खिलाफ नाराजगी जाहिर नहीं कर रही, बल्कि वह अपने भविष्य, रोजगार, शिक्षा, आवास और आर्थिक सुरक्षा को लेकर जवाब मांग रही है। फ्रांस में मैक्रों विरोधी असंतोष के बीच ले पेन और मेलांशों जैसे नेताओं की राजनीतिक दावेदारी तेज होना इसी गहरे ध्रुवीकरण का संकेत है।

बहरहाल, हिंसा और तोड़फोड़ को जनआक्रोश का पर्याय नहीं माना जा सकता। शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का अधिकार है, लेकिन आगजनी और लूटपाट आम नागरिकों की सुरक्षा तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाती हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि यूरोपीय सरकारों के समक्ष कानून-व्यवस्था बनाए रखना और आर्थिक-सामाजिक शिकायतों का ठोस समाधान करने की दोहरी चुनौती है। यदि इन शिकायतों और सवालों को केवल पुलिस कार्रवाई से दबाने की कोशिश हुई, तो मौजूदा असंतोष आने वाले चुनावों में सत्ता के समीकरण बदल सकता है।

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  Sports

Shadab Khan की सूझबूझ और Haris Rauf का धैर्य: England के जबड़े से Pakistan ने यूं छीनी रोमांचक जीत

25 अक्टूबर को गद्दाफी स्टेडियम में खेले गए वनडे ट्राई-सीरीज मैच में, शादाब खान ने शानदार नाबाद शतक जड़ा और पाकिस्तान को इंग्लैंड के खिलाफ एक विकेट से रोमांचक जीत दिलाई। 242 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तान की स्थिति काफी नाजुक थी और टीम 154 रनों पर 9 विकेट गंवा चुकी थी। ऐसे में शादाब खान ने हारिस रऊफ के साथ मिलकर आखिरी विकेट के लिए 89 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी की।

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क्रिकइन्फो के अनुसार, शादाब 113 रन बनाकर नाबाद रहे, जबकि रऊफ ने 19 गेंदों में नाबाद 7 रन बनाए। इस तरह पाकिस्तान ने 9 विकेट के नुकसान पर 243 रन बनाकर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। 10वें विकेट के लिए हुई यह 89 रनों की साझेदारी वनडे क्रिकेट में लक्ष्य का पीछा करते हुए अब तक की सबसे बड़ी साझेदारी है, जिसने पाकिस्तान को एक बेहद मुश्किल स्थिति से बाहर निकाला।

इंग्लैंड जीत के काफी करीब पहुंच गया था, लेकिन शादाब की संयमित बल्लेबाजी और रऊफ के जुझारूपन ने मेजबान टीम को एक बड़े पतन से बचा लिया। 97 रन के स्कोर पर शादाब उस समय मुश्किल में पड़ गए जब गस एटकिंसन की गेंद पर उन्हें एलबीडब्ल्यू (LBW) आउट दे दिया गया; हालांकि, रिव्यू में पता चला कि गेंद बल्ले के अंदरूनी किनारे (इनसाइड एज) से लगी थी, जिससे उन्हें अपनी पारी जारी रखने का मौका मिल गया। जीत के लिए 9 रन की जरूरत थी, तभी शादाब ने एटकिंसन की गेंद पर मिड-ऑफ के ऊपर से छक्का जड़ दिया। इसके बाद रऊफ ने इंग्लैंड के लिए डेब्यू कर रहे हेनरी क्रोकॉम्ब की एक फुल लेंथ गेंद को सीधे सामने की तरफ खेला। क्रोकॉम्ब इस कैच को पकड़ नहीं पाए और गेंद बाउंड्री पार कर गई, जिससे पाकिस्तान को जीत मिल गई और पूरी टीम खुशी से झूम उठी।

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इससे पहले, इंग्लैंड की पूरी टीम 49.3 ओवर में 241 रन पर ऑलआउट हो गई। बेन डकेट ने संयमित बल्लेबाजी करते हुए 105 रन बनाए और पारी को संभाले रखा। पाकिस्तान की गेंदबाजी की कमान शाहीन शाह अफरीदी ने संभाली, जिन्होंने 46 रन देकर चार विकेट लिए और इंग्लैंड के टॉप ऑर्डर को जल्दी पवेलियन भेज दिया। अफरीदी ने पहले ही ओवर में टॉम बैंटन को आउट किया, और अगले ओवर में जो रूट को भी पवेलियन भेज दिया। हैरी ब्रूक रन आउट हो गए, और जॉर्डन कॉक्स भी अफरीदी का शिकार बने, जिससे इंग्लैंड का स्कोर 53 रन पर 4 विकेट हो गया। इसके बाद डकेट और सैम करन ने पांचवें विकेट के लिए 92 रन की साझेदारी की। करन ने 42 रन बनाए, लेकिन फिर अफरीदी ने इस साझेदारी को तोड़ दिया।
 

Mon, 26 Oct 2026 12:44:00 +0530

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