‘ना जाने कौन आ गया’ सादगी भरी प्रेम कहानी:जतीन सरना, मधुरिमा रॉय और प्रणय पचौरी ने प्यार, आत्ममंथन और सादगी पर खुलकर की बात
6 मार्च को रिलीज हो रही फिल्म ‘ना जाने कौन आ गया’ एक सादगी भरी लव स्टोरी है, जो रिश्तों की जटिलताओं, आत्ममंथन और प्यार की मासूमियत को बड़े पर्दे पर पेश करती है। पहाड़ों की खूबसूरत वादियों में फिल्माई गई यह कहानी आज के दौर के टॉक्सिक माहौल में प्यार और संवेदनशीलता की बात करती है। फिल्म में जतीन सरना, मधुरिमा रॉय और प्रणय पचौरी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म की रिलीज से पहले दैनिक भास्कर ने स्टारकास्ट से खास बातचीत की। कलाकारों ने अपने किरदार, शूटिंग के अनुभव और फिल्म के संदेश को लेकर खुलकर बातें की हैं। स्क्रिप्ट पढ़ते ही ऐसा कौन-सा पहलू था जिसने आपको महसूस कराया कि यह फिल्म आपको जरूर करनी चाहिए? जतीन सरना- मेरे किरदार की सादगी ने मुझे सबसे ज्यादा आकर्षित किया। वो एक आम इंसान है, जो जिंदगी को जीने के बजाय सिर्फ सर्वाइव करने में फंसा रहता है। ऐसे लोगों का दर्द, उनकी मासूमियत और जिंदगी को बस जी लेने की चाह यही मुझे छू गया। एक अभिनेता के तौर पर मुझे लगा कि यह एक नया और अनछुआ किरदार है। निर्देशक विकास ने जिस तरह कहानी सुनाई, उसी वक्त तय कर लिया कि यह फिल्म करनी है। ट्रेलर में हेट, लव और बिट्रेयल की झलक दिखती है। क्या आप इससे रियल लाइफ में रिलेट करते हैं? जतीन सरना- जहां प्यार होगा, वहां नफरत भी होगी, धोखा भी और अफसोस भी। लेकिन जिंदगी की खूबसूरती इन्हीं भावनाओं को समझकर आगे बढ़ने में है। यही जीवन का चक्र है। इस फिल्म में आपका किरदार पहले निभाए गए रोल्स से किस तरह अलग है, और उसे पर्दे पर उतारना आपके लिए कितना चुनौतीपूर्ण रहा? मधुरिमा रॉय- मेरे पिछले किरदारों में डार्क शेड्स ज्यादा थे, लेकिन इस फिल्म में मेरा किरदार बहुत मासूम और पॉजिटिव है। वह कमरे में आती है तो माहौल बदल देती है। उसकी सरलता और बचपना निभाना आसान नहीं था। सादगी को निभाना, नेगेटिव किरदारों से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है। आज के युवाओं के लिए फिल्म क्या संदेश देती है? मधुरिमा रॉय- आज सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स के दौर में रिश्ते बहुत कॉम्प्लिकेटेड हो गए हैं। हम हर चीज को ‘लव बॉम्बिंग’, ‘घोस्टिंग’ जैसे टर्म्स में बांट देते हैं। हमारी फिल्म कहती है थोड़ा रुकिए, खुद को समझिए। हर गलती सामने वाले की नहीं होती, कभी-कभी हमें भी खुद में झांकने की जरूरत होती है। प्यार में पवित्रता और सादगी को फिर से महसूस कीजिए। स्क्रिप्ट सुनते ही आपके मन में पहली प्रतिक्रिया क्या थी, और किस बात ने आपको इस फिल्म का हिस्सा बनने के लिए सबसे ज्यादा उत्साहित किया? प्रणय पचौरी- मुझे बताया गया कि सोचिए अगर ओशो पहाड़ों में एक आम इंसान की तरह रहते तो कैसे होते। यह सुनकर मैं उत्साहित हो गया। एक पहाड़ी लड़का, जो जीप चलाता है, बच्चों को पढ़ाता है और एक लव ट्रायंगल का हिस्सा है यह कॉम्बिनेशन दिलचस्प लगा। साथ ही पहाड़ों में शूटिंग का अनुभव बेहद खास रहा। ठंड, मौसम और लोकेशन की चुनौतियों के बावजूद सेट पर परिवार जैसा माहौल था। रिलीज से पहले दर्शकों के लिए आपका एक संदेश आखिर 6 मार्च को वे आपकी फिल्म देखने सिनेमाघर क्यों जाएं? जतीन सरना- हमने दिल से फिल्म बनाई है। अब इसे पार लगाने की जिम्मेदारी दर्शकों की है। बस एक मौका दीजिए 6 मार्च को सिनेमाघरों में जाकर फिल्म देखिए। मधुरिमा रॉय- आज के टॉक्सिक माहौल में प्यार ही एक ऐसी चीज है जो दुनिया को सॉफ्ट बना सकती है। यह फिल्म उसी सादगी और मासूमियत की बात करती है। प्रणय पचौरी- बहुत समय बाद एक सिंपल लव स्टोरी आई है। यह फिल्म प्यार को समझने और सेलिब्रेट करने की कोशिश है। उम्मीद है दर्शक इसे अपनाएंगे।
NCERT किताब में ‘ज्यूडीशियल करप्शन’ चैप्टर पर आज सुनवाई:सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया; CJI बोले- न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं देंगे
सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को NCERT के क्लास 8 की सोशल साइंस की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े चैप्टर को लेकर विवाद पर सुनवाई करेगा। कोर्ट ने बुधवार को मामले पर खुद संज्ञान लिया था। CJI सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच सुनवाई करेगी। बुधवार को CJI ने इस मामले पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने या उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी। इससे पहले सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने अभिषेक सिंघवी के साथ मामले का जिक्र करते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर स्वत: संज्ञान लिया। सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद बुधवार शाम NCERT ने अपनी वेबसाइट से किताब को हटा लिया। सूत्रों के अनुसार, किताब से विवादित चैप्टर हटाया जा सकता है। सरकार ने भी किताब में ज्यूडीशियल करप्शन शामिल करने पर आपत्ति जताई है। सरकार ने कहा- शासन के तीनों अंगों को जोड़ना चाहिए था NCERT चेयरमैन दिनेश प्रसाद सकलानी का इस मुद्दे पर कोई जवाब नहीं आया है। काउंसिल के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि मामला अब कोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए वे इस मुद्दे पर कुछ भी नहीं बोंलेंगे। इस बीच सरकारी सूत्रों ने कहा कि भले ही NCERT एक ऑटोनॉमस संस्था है, लेकिन चैप्टर जोड़ने से पहले अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए था। सरकारी सूत्रों ने कहा कि अगर भ्रष्टाचार का मुद्दा शामिल करना था, तो उसमें शासन के तीनों अंगों- कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका को भी जोड़ा जाना चाहिए था। सरकारी सूत्रों ने कहा कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित आंकड़े संसदीय अभिलेखों और नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड में मौजूद हैं, लेकिन फैक्ट्स के क्रॉस वेरिफिकेशन के लिए केंद्र से परामर्श नहीं लिया गया। विवादित चैप्टर NCERT की नई सोशल साइंस टेक्स्टबुक में था NCERT ने 23 फरवरी को क्लास 8 के स्टूडेंट्स के लिए सोशल साइंस की नई टेक्स्टबुक जारी की थी। किताब का नाम ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2’ है। इसमें ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी इन अवर सोसायटी’ चैप्टर के अंदर ‘करप्शन इन द ज्यूडिशियरी’ का टॉपिक जोड़ा गया है। इसमें कहा गया है कि भ्रष्टाचार, बड़ी संख्या में पेंडिंग मामले और जजों की भारी कमी ज्यूडिशियल सिस्टम के सामने प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं। जज आचार संहिता से बंधे होते हैं, जो न केवल कोर्ट में उनके व्यवहार को कंट्रोल करता है, बल्कि कोर्च के बाहर उनके आचरण को भी तय करती है। एक टॉपिक का टाइटल- इंसाफ में देरी इंसाफ न मिलने जैसा किताब के एक सेक्शन का टाइटल ‘Justice delayed is justice denied’ है। इसका मतलब है- इंसाफ में देरी इंसाफ न मिलने जैसा है। यहां सुप्रीम कोर्ट में 81 हजार, हाईकोर्ट्स में 62 लाख 40 हजार, डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट के 4 करोड़ 70 लाख पेंडिंग केस की संख्या भी बताई गई है। ये किताब एकेडमिक सेशन 2026-27 से स्कूलों में पढ़ाई जानी थी। इसका पहला पार्ट जुलाई 2025 में रिलीज किया गया था। NCERT ने नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क यानी NCF और NEP-2020 के तहत सभी क्लासेज की नई किताबें तैयार की हैं। कोरोना महामारी के बाद पुरानी किताबों के टॉपिक्स को बदलकर नए टॉपिक्स किताबों में जोड़े जा रहे हैं। पहली से 8वीं क्लास तक की नई किताबें 2025 में ही पब्लिश की जा चुकी हैं। किताब का वो हिस्सा जिसमें करप्शन और पेंडिंग केस का जिक्र… नई किताब में ज्यूडीशियरी से जुड़े अहम पॉइंट्स… किताब में पूर्व CJI बीआर गवई का भी जिक्र किताब में भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई का भी जिक्र है, जिन्होंने जुलाई 2025 में कहा था कि ज्यूडिशियरी के अंदर करप्शन और गलत कामों के मामलों का पब्लिक ट्रस्ट पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा था, “हालांकि, इस ट्रस्ट को फिर से बनाने का रास्ता इन मुद्दों को सुलझाने के लिए उठाए गए तेज, निर्णायक और ट्रांसपेरेंट एक्शन में है... ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी डेमोक्रेटिक गुण हैं।” ------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… NCERT ने 8वीं क्लास की सोशल साइंस की किताब में जोड़ा न्यायपालिक से जुड़ा सेक्शन नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने पहली बार 8वीं के बच्चों के लिए ज्यूडीशियरी में करप्शन के बारे में पढ़ाने का फैसला लिया गया। यह पिछले एडिशन के मुकाबले बड़ा बदलाव था। पिछले चैप्टर में ज्यादातर कोर्ट के स्ट्रक्चर और रोल पर फोकस किया गया था। बदले हुए चैप्टर का नाम ‘हमारे समाज में ज्यूडिशियरी की भूमिका’ रखा गया। पढ़ें पूरी खबर…
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 























