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खबर हटके- गाय चराने के लिए सरकार दे रही नौकरी:ब्रिटेन में गायब होने लगीं चॉकलेट; बिना बच्चेदानी वाली महिला ने बेटे को जन्म दिया

राजस्थान के कोटा में गाय चराने के लिए ग्वालों को ₹10 हजार की नौकरी पर रखा गया है। वहीं ब्रिटेन के सुपरमार्केट से चॉकलेट गायब हो रही हैं। उधर एक बिना बच्चेदानी वाली महिला ने बेटे को जन्म दिया है। आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…

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बुक रिव्यू- नए पेरेंट्स के लिए एक जरूरी किताब:नए नन्हे मेहमान को कैसे पालें, पेरेंटिंग से जुड़े हर जरूरी सवाल का जवाब

किताब का नाम: बच्चों की डॉक्टर लेखक: डॉ. माधवी भारद्वाज अनुवाद: यामिनी रामपल्लीवार प्रकाशक: पेंगुइन मूल्य: 399 रुपए पेरेंटिंग एक बेहद खूबसूरत जर्नी है। हर शादीशुदा कपल इस पल का बेसब्री से इंतजार करता है। यह सिर्फ बच्चे की परवरिश नहीं, बल्कि खुद के सीखने, धैर्य रखने और भावनात्मक रूप से मैच्योर होने की प्रक्रिया भी है। इस सफर में खुशियां हैं, जिम्मेदारियां हैं और अनगिनत यादें हैं, जो परिवार को मजबूत बनाती हैं। हालांकि इसमें तमाम चुनौतियां भी हैं, जो न्यूली पेरेंट्स को इस जर्नी से डराती हैं, लेकिन घबराएं नहीं। डॉ. माधवी भारद्वाज की किताब ‘बच्चों की डॉक्टर’ नए पेरेंट्स के लिए एक गाइड की तरह है। ये किताब नए पेरेंट्स को डराती नहीं, समझाती है और जज करने की बजाय भरोसा देती है। डॉ. माधवी भारद्वाज जानी-मानी पीडियाट्रिशियन हैं। वह खुद दो बच्चों की मां हैं। वह इस बात को अच्छे से समझती हैं कि पहली बार पेरेंट्स बनने वाले लोग किन भावनाओं और चुनौतियों से गुजरते हैं। किताब का उद्देश्य और महत्व इस किताब का उद्देश्य न्यू पेरेंट्स को सही गाइड करना है। साथ ही उनको यह एहसास दिलाना है कि कन्फ्यूज होना बिल्कुल नॉर्मल है। खासकर ऐसे समय में जब तमाम तरह की पुरानी मान्यताएं, रिश्तेदारों की सलाह हावी होने लगती हैं। डॉ. माधवी इस उलझन को जॉइंट फैमिली की वास्तविकताओं, सांस्कृतिक मिथकों और रोजमर्रा की स्थितियों को सामने रखकर दूर करती हैं। यह किताब डर और गिल्ट पैदा करने के बजाय आत्मविश्वास बढ़ाती है। साथ ही किताब इंडियन पेरेंट्स की जरूरतों को ध्यान में रखकर लिखी गई है। इसी वजह से वे इससे जुड़ाव महसूस करते हैं और अनावश्यक चिंता कम होती है। बच्चे की देखभाल धीरे-धीरे बोझ नहीं बल्कि आसान प्रक्रिया लगने लगती है। किताब की खास बात ये है कि इसमें मिथकों को सम्मानजनक तरीके से चुनौती दी गई है। उनकी जगह वैज्ञानिक तथ्यों को सहज भाषा में लिखा गया है। किताब की खासियत किताब में डॉ. माधवी ने बच्चे के पहले साल के 10 अहम माइलस्टोन्स को बेहद व्यवस्थित तरीके से बताया है। यही इस किताब की सबसे बड़ी खासियत है। इससे नए माता-पिता को हर पड़ाव पर सही दिशा मिलती है। हर अध्याय में दिए गए रिलेटेबल इलस्ट्रेशन (जैसे ब्रेस्टफीडिंग की अलग-अलग पोजिशन) बातों को समझने में आसान बना देते हैं। किताब में रियल लाइफ केस स्टडीज शामिल की गई हैं। इसका मकसद पाठक को यह एहसास दिलाना है कि ये समस्याएं काल्पनिक नहीं, बल्कि रोजमर्रा की सच्चाई हैं। इसके साथ ही कॉमन मिथकों को तोड़ने वाला हिस्सा और FAQs सेक्शन परेंट्स की उन शंकाओं का समाधान करता है, जिनके जवाब वे अक्सर इधर-उधर ढूंढते रहते हैं। इससे अनावश्यक डर और भ्रम अपने-आप कम हो जाता है। किताब की थीम किताब का मूल विचार बहुत साफ है कि पेरेंटिंग ‘परफेक्ट होने का’ खेल नहीं है। डॉ. माधवी मानती हैं कि हर बच्चा अलग है और हर परिवार की परिस्थितियां अलग होती हैं। इसलिए किताब में न तो आदर्श पेरेंट्स बनने का दबाव दिया गया है और न ही हर बात पर डराया गया है। ब्रेस्टफीडिंग की दिक्कतें हों, नींद की कमी हो या फिर बच्चे के रोने को समझना हो किताब हर विषय पर सहानुभूति और बिना जजमेंट के बात करती है। साथ ही मां के खान-पान की गलत धारणाओं को भी दूर करती है। यह आपको यह भरोसा देती है कि आप अकेले नहीं हैं। डॉ. माधवी बिना जजमेंट के माता-पिता की भावनाओं को समझती हैं, उनकी दुविधा को स्वीकार करती हैं और कहती हैं, हम सब इस दौर में कन्फ्यूज होते हैं। पेरेंट्स के मेंटल हेल्थ पर भी बात करती है ये बुक किताब में सिर्फ बच्चे की सेहत की नहीं बल्कि माता-पिता की मेंटल हेल्थ पर भी बात की गई है। लगातार तुलना, डर और सलाहों के बोझ को यह किताब कम करती है। जब पेरेंट्स को यह समझ में आने लगता है कि बच्चे का हर बार रोना खतरे की घंटी नहीं है और हर समस्या का समाधान मौजूद है, तो पेरेंटिंग का डर धीरे-धीरे भरोसे में बदल जाता है। इसका असर यह होता है कि माता-पिता ज्यादा शांत रहते हैं, बेहतर फैसले लेते हैं और बच्चे के साथ ज्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं। आधुनिक साइकोलॉजी से जुड़े हैं विचार किताब भले ही भारी-भरकम मेडिकल शब्दों से भरी न हो, लेकिन इसका आधार पूरी तरह साइंटिफिक है। हर सलाह के पीछे वैज्ञानिक तर्क दिए गए हैं। पारंपरिक घरेलू नुस्खों जैसे- किताब में डॉ. माधवी भारद्वाज इन सबको तथ्यात्मक तरीके से गलत साबित करती है। इस किताब में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किन स्थितियों में डॉक्टर के पास जाना जरूरी है और किनमें घबराने की जरूरत नहीं। केस स्टडीज और QA (सवाल-जवाब) में साइंस को रोजमर्रा की भाषा में पिरोया है, ताकि माता-पिता को लगे कि यह एक्शनेबल है, न कि सिर्फ थ्योरी है। किताब का सार यह किताब शिशु के विकास के 10 अहम पड़ावों को कवर करती है। इसमें जन्म के बाद के पहले सात दिनों की घबराहट से लेकर सॉलिड फूड शुरू करने जैसे बड़े और थोड़े अस्त-व्यस्त लेकिन जरूरी पड़ाव तक की बात की गई है। इसकी विषय-सूची किसी नए माता-पिता की गूगल सर्च हिस्ट्री जैसी लगती है। हर अध्याय वही सवाल उठाता है, जो माता-पिता के मन में सबसे पहले आता है, और उन्हें सरल, व्यावहारिक जवाब देता है। यह किताब क्यों पढ़नी चाहिए अगर आप नए माता-पिता हैं और बच्चे की देखभाल से जुड़े सवाल आपको परेशान करते हैं, तो यह किताब आपको अकेलापन महसूस नहीं होने देगी। यह आपको ज्यादा आत्मविश्वासी, ज्यादा जागरूक बनाएगी। जो पेरेंट्स की घबराबट को कम करेगी। भारतीय घरों के लिए खासतौर पर उपयोगी, क्योंकि देसी रियलिटी को समझती है। किताब के बारे में मेरी राय ‘बच्चों की डॉक्टर’ एक टेक्स्ट बुक से ज्यादा एक साथी की तरह है। डॉ. माधवी की भाषा इम्पेथेटिक, ईमानदार और हल्के हास्य से भरी है, जो पढ़ते वक्त सुकून देती है। असली परिवारों से जुड़े केस स्टडी और सवाल-जवाब वाला सेक्शन इसे और भरोसेमंद बनाता है। किताब मूल रूप से शैशवावस्था (बच्चे का पहला साल) पर लिखी गई है। हालांकि, जो पाठक बहुत डीप मेडिकल डिटेल्स ढूंढ रहे हैं, उन्हें यह किताब थोड़ी हल्की लग सकती है। यह किताब एहसास दिलाती है कि पेरेंटिंग में परफेक्ट नहीं, समझदार होना ज्यादा जरूरी है। ………………… ये खबर भी पढ़ें… बुक रिव्यू- जिंदगी के पांच सबसे कीमती धन:पैसा, रिश्ता, स्वास्थ्य, दिमाग और आर्थिक आजादी, इस संपदा को कैसे बचाएं और बढ़ाएं 'द 5 टाइप्स ऑफ वेल्थ' एक ऐसी किताब है जो आपको बताती है कि जिंदगी में असली खुशी सिर्फ पैसे से नहीं आती। लेखक साहिल ब्लूम, जो एक इंस्पिरेशनल स्पीकर, एंटरप्रेन्योर और न्यूजलेटर राइटर हैं, कहते हैं कि हमें बचपन से ही सिखाया जाता है कि धन मतलब सिर्फ बैंक बैलेंस। पूरी खबर पढ़ें…

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  Sports

टी20 वर्ल्ड कप से आज बाहर हो जाएगी एक और टीम, श्रीलंका के बाद किसका टूटेगा खिताब का सपना?

India vs Zimbabwe losing side will eliminated from t20 world cup 2026: टी20 वर्ल्ड कप कप 2026 के सुपर-8 राउंड में आज चार मुकाबले खेले जाने हैं. ये सभी मुकाबले ग्रुप-1 में खेले जाएंगे, जिसमें भारतीय टीम है. पहला मुकाबला साउथ अफ्रीका और वेस्टइंडीज के बीच है, जबकि दूसरे मैच में भारत और जिम्बाब्वे की भिड़ंत होनी है. दिन के दूसरे मुकाबले की हारने वाली टीम टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगी. Thu, 26 Feb 2026 07:18:41 +0530

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