माइंड डिटॉक्स: बेहद जरूरी बेहतर नींद, अपनाएं ये आसान टिप्स
नई दिल्ली, 25 फरवरी (आईएएनएस)। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता और ओवरथिंकिंग आम बात बन गई हैं। ऐसे में मानसिक समस्याओं की राहत के लिए माइंड डिटॉक्स यानी मन की सफाई जरूरी है, जो मानसिक शांति, बेहतर फोकस और सेहतमंद रहने के लिए बेहद जरूरी है।
नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, माइंड डिटॉक्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण है अच्छी और समय पर नींद लेना। नींद के दौरान दिमाग खुद को डिटॉक्स करता है, तनाव कम होता है और अगले दिन ताजगी महसूस होती है। यही नहीं, शरीर के साथ इसके लिए कुछ सरल उपाय अपनाने चाहिए, जो रोजमर्रा की आदतों में आसानी से शामिल किए जा सकते हैं।
माइंड डिटॉक्स का मतलब है मन से नकारात्मक विचारों, तनाव और अनावश्यक चिंताओं को हटाना। यह शरीर की तरह मन को भी साफ रखता है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है। एनएचएम ने बताया कि बेहतर नींद के बिना माइंड डिटॉक्स पूरा नहीं होता, इसलिए शाम को तनाव मुक्त रहना और समय पर सोना बहुत जरूरी है।
ये छोटे बदलाव लंबे समय में मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाते हैं। अगर नियमित रूप से इन उपायों को अपनाया जाए तो तनाव कम होगा, नींद बेहतर होगी और दिमाग तरोताजा रहेगा।
माइंड डिटॉक्स के लिए सबसे पहले तनाव को नियंत्रित रखे, शाम को काम या चिंता की बातें छोड़ दें। परिवार के साथ हल्की बातचीत करें या कोई पसंदीदा काम करें। इससे मन शांत रहता है और नींद अच्छी आती है। स्क्रीन टाइम सीमित करें, सोने से कम से कम 1 घंटा पहले मोबाइल, टीवी या लैपटॉप बंद कर दें। नीली रोशनी नींद बिगाड़ती है और दिमाग को उत्तेजित रखती है।
माइंड डिटॉक्स के लिए पौष्टिक आहार भी बेहद जरूरी है। रात का खाना हल्का और पौष्टिक रखें। ज्यादा मसालेदार या भारी भोजन से बचें। कैफीन जैसे चाय-कॉफी शाम के बाद न लें। इससे नींद गहरी आती है और मन शांत रहता है। दिनचर्या में योग और मेडिटेशन को शामिल करें। सुबह के साथ ही शाम को कम से कम 10 या 15 मिनट योगासन, प्राणायाम या मेडिटेशन करें। गहरी सांस लेना या माइंडफुलनेस से मन की अशांति दूर होती है और गहरी नींद आती है।
--आईएएनएस
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ब्रिटेन जाने के लिए अब जरूरी हुआ e-Visa, ऐसे कर सकते हैं आवेदन
ब्रिटेन ने अपनी वीजा प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया है. बुधवार से नए नियम लागू हो गए हैं, जिनके तहत भारतीय यात्रियों के लिए ई-वीजा अनिवार्य कर दिया गया है. वहीं जिन देशों के नागरिकों को पहले वीजा की आवश्यकता नहीं होती थी, उन्हें अब इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन (ETA) लेना होगा. यह नई व्यवस्था पारंपरिक पेपर वीजा स्टिकर की जगह लेगी और पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट करेगी.
क्या है ई-वीजा और ईटीए व्यवस्था?
नई डिजिटल यात्रा प्रणाली का उद्देश्य वीजा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाना है. ई-वीजा एक डिजिटल दस्तावेज होगा, जो आवेदक की आव्रजन स्थिति को ऑनलाइन प्रमाणित करेगा. हालांकि बायोमीट्रिक रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन केंद्र पर व्यक्तिगत उपस्थिति अभी भी आवश्यक रहेगी, लेकिन अब पासपोर्ट जमा करने की बाध्यता समाप्त कर दी गई है.
दूसरी ओर, जिन देशों के नागरिकों को वीजा मुक्त प्रवेश मिलता था, उन्हें अब यात्रा से पहले ETA लेना होगा. इसका मतलब यह है कि बिना डिजिटल अनुमति के कोई भी यात्री विमान में सवार नहीं हो सकेगा. एयरलाइंस को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि ई-वीजा, ETA या अन्य वैध दस्तावेज न होने पर यात्रियों को बोर्डिंग से रोका जा सकता है.
सरकार का तर्क और सुरक्षा पहलू
ब्रिटेन सरकार का कहना है कि ई-वीजा प्रणाली अधिक सुरक्षित और पारदर्शी है. डिजिटल रिकॉर्ड होने के कारण इसे खोने या छेड़छाड़ की आशंका नहीं रहती. UK Home Office के अनुसार, यह प्रणाली वीजा धारकों को तुरंत और सुरक्षित तरीके से अपने आव्रजन अधिकार साबित करने की सुविधा देती है.
आव्रजन और नागरिकता मंत्री Mike Tapp ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले आवश्यक डिजिटल अनुमति सुनिश्चित करें ताकि उनकी यात्रा में कोई बाधा न आए.
किन देशों पर लागू होगा नियम?
अब तक अमेरिका, कनाडा और फ्रांस सहित 85 देशों के नागरिकों को ब्रिटेन यात्रा के लिए वीजा की आवश्यकता नहीं होती थी, लेकिन नई प्रणाली के तहत इन देशों के यात्रियों को भी ETA लेना अनिवार्य होगा.
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक एक करोड़ से अधिक ई-वीजा जारी किए जा चुके हैं. पिछले कुछ वर्षों से फिजिकल दस्तावेजों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जा रहा था, और अब यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल स्वरूप ले चुकी है.
यात्रियों के लिए क्या मायने?
इस बदलाव का सीधा असर उन भारतीय यात्रियों पर पड़ेगा, जो पढ़ाई, काम या पर्यटन के लिए ब्रिटेन जाते हैं. डिजिटल प्रणाली से प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होने की उम्मीद है, लेकिन यात्रियों को यात्रा से पहले सभी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी.
कुल मिलाकर, यह कदम ब्रिटेन की आव्रजन व्यवस्था को आधुनिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.
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