मिशन एड्स सुरक्षा के तहत दिसंबर 2027 तक एचआईवी पर काबू पाना भारत का लक्ष्य
गुवाहाटी, 25 फरवरी (आईएएनस)। नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (एनएसीओ) के डायरेक्टर जनरल राकेश गुप्ता ने बुधवार को बताया कि मिशन एड्स सुरक्षा के तहत भारत का लक्ष्य 1 दिसंबर, 2027 तक एचआईवी कंट्रोल हासिल करना है।
गुवाहाटी में नेशनल एड्स और एसटीआई कंट्रोल प्रोग्राम को लागू करने पर नॉर्थ-ईस्टर्न राज्यों की तीन दिन की रिव्यू मीटिंग के पहले सेशन में बोलते हुए, गुप्ता ने जोर दिया कि नेशनल एचआईवी रिस्पॉन्स में नॉर्थ-ईस्टर्न इलाका अभी भी एक प्रायोरिटी बना हुआ है, जिसमें देश के 219 हाई-प्रायोरिटी वाले जिलों में से 60 इसी इलाके में हैं, सिक्किम को छोड़कर।
उन्होंने कहा कि गुवाहाटी वर्कशॉप पूरे नॉर्थ-ईस्ट के हाई-प्रायोरिटी वाले जिलों में प्रोग्रेस को तेज करने के लिए एक इंटेंसिव, रीजन-फोकस्ड रिव्यू और एक्शन-प्लानिंग एक्सरसाइज की शुरुआत है।
राकेश गुप्ता, जो मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर के एडिशनल सेक्रेटरी भी हैं, ने कहा कि मीटिंग का मकसद नेशनल एचआईवी कंट्रोल टारगेट को तेजी से पूरा करने के लिए डिस्ट्रिक्ट-लेवल प्लानिंग और लागू करने की स्ट्रेटेजी को मजबूत करना है।
मेघालय राज्य इस रिव्यू में एक्टिवली हिस्सा ले रहा है, जिसमें उसके पहचाने गए हाई-प्रायोरिटी वाले जिलों- ईस्ट जैंतिया हिल्स, ईस्ट खासी हिल्स, री भोई और वेस्ट जैंतिया हिल्स में प्रोग्रेस को तेज करने पर फोकस्ड विचार-विमर्श किया जा रहा है।
तेज प्रयासों के तहत, फरवरी-मार्च 2026 के दौरान देश भर में सुरक्षा संकल्प कार्यशाला नाम से ग्यारह रीजनल वर्कशॉप आयोजित की जा रही हैं, जिसमें सभी 219 हाई-प्रायोरिटी वाले जिले शामिल होंगे।
गुवाहाटी वर्कशॉप इस सीरीज की पहली वर्कशॉप है और इसमें सात नॉर्थ-ईस्ट राज्यों: अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड और त्रिपुरा के 60 पहचाने गए हाई-प्रायोरिटी जिले शामिल हैं।
तीन दिन की मीटिंग के दौरान, जिला-लेवल के प्रतिनिधि अपने जिलों को ग्लोबल 95-95-99 टारगेट को पूरा करके सुरक्षित प्लस का स्टेटस पाने में मदद करने के लिए कस्टमाइज्ड स्ट्रेटेजी पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।
ये टारगेट यह पक्का करते हैं कि एचआईवी से पीड़ित 95 परसेंट लोगों को अपना एचआईवी स्टेटस पता हो, डायग्नोस हुए 95 परसेंट लोगों को लगातार एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी (एआरटी) मिले, और इलाज करा रहे 99 परसेंट लोगों को वायरल सप्रेशन मिले।
मीटिंग में नॉर्थ-ईस्ट इलाके में एनएसीपी को लागू करने का पूरा रिव्यू किया जा रहा है, जिसमें ज़िला-लेवल की ओनरशिप को मज़बूत करने, माइक्रो-लेवल परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स का आकलन करने, लागू करने में कमियों की पहचान करने और लोकल एपिडेमियोलॉजिकल ट्रेंड्स के हिसाब से सुधार के एक्शन प्लान बनाने पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
इस रिव्यू में सीनियर अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटीज के प्रोजेक्ट डायरेक्टर और पूरे इलाके के प्रोग्राम लीडर शामिल हैं। यह मीटिंग तीन बैच में हो रही है ताकि फोकस्ड, स्टेट-स्पेसिफिक बातचीत हो सके।
इस बातचीत से हर स्टेट के एपिडेमियोलॉजिकल प्रोफाइल के हिसाब से साफ, एक्शनेबल रोडमैप बनने की उम्मीद है, जिससे भारत सरकार एचआईवी/एड्स को पब्लिक हेल्थ के लिए खतरा मानने और मिशन एड्स सुरक्षा के मकसद को आगे बढ़ाने के अपने पक्के वादे को और पक्का करेगी।
--आईएएनएस
पीएसके
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
इजरायल की संसद में प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन, आतंकवाद के खिलाफ भारत-इजरायल के साझे संकल्प पर दिया जोर
यरूशलम, 25 फरवरी (आईएएनएस)। दो दिवसीय यात्रा में इजरायल पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को इजरायल की संसद को संबोधित किया। इजरायल की संसद में प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी का गजब उत्साह देखने को मिला। पीएम मोदी ने संसद को संबोधित करते हुए कहा कि नौ साल पहले मुझे इजरायल आने का पहली बार सौभाग्य मिला था। आज एक बार फिर यहां आकर मैं बहुत खुश हूं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में 7 अक्टूबर को हुए हमास हमले का जिक्र किया। उन्होंने हमास हमले में मारे गए लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। पीएम ने कहा कि हम आपका दर्द समझते हैं। हम आपके दुख में शामिल हैं। भारत पूरी तरह से इजरायल के साथ मजबूती से खड़ा है।
पीएम ने कहा कि कोई भी वजह आम लोगों की हत्या को सही नहीं ठहरा सकती। उन्होंने आतंकवाद पर हमला करते हुए कहा कि भारत ने भी लंबे समय तक आतंकवाद का दर्द सहा है। हमें 26/11 के मुंबई हमले और उसमें मारे गए बेगुनाह लोगों की जान याद है, जिसमें इजरायली नागरिक भी शामिल थे।
उन्होंने कहा कि यहूदी समुदाय भारत में बिना किसी जुल्म या भेदभाव के डर से रहते हैं। वे अपने धर्म को बनाए रखते हैं और समाज में पूरी तरह से हिस्सा लेते हैं। यह रिकॉर्ड हमारे लिए गर्व की बात है।
पीएम मोदी ने कहा कि आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए लगातार और मिलकर दुनिया भर में कार्रवाई करने की जरूरत है, क्योंकि कहीं भी होने वाला आतंक हर जगह शांति के लिए खतरा है। प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायल की जनता को विश्वास दिलाया कि शांति के लिए भारत सदैव आपके साथ खड़ा है।
उन्होंने आगे कहा कि इजरायल का मेरा पहला दौरा 2006 में गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर हुआ था। बाद में 2017 में प्रधानमंत्री के तौर पर इजरायल के मेरे दौरे के दौरान दोनों देशों ने इस रिश्ते को स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ाया। तब से मेरा जुड़ाव और बढ़ा है। हमने कई सेक्टर में इस रिश्ते को और मजबूत करने का वादा किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इजरायल को अक्सर स्टार्टअप नेशन कहा जाता है। हाल के वर्षों में हम अपने युवाओं के इनोवेशन और क्रिएटिविटी को बाहर लाने के लिए भी काम कर रहे हैं। मुझे याद है कि 2018 में पीएम नेतन्याहू और मैंने भारत में आई-क्रिएट टेक बिजनेस इनक्यूबेटर का उद्घाटन किया था। तब से इसने ऐसे 900 स्टार्टअप को सपोर्ट किया है। पिछले हफ्ते हमने 100 से ज्यादा देशों के रिप्रेजेंटेटिव के साथ दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा डेमोक्रेटाइज्ड एआई इम्पैक्ट समिट होस्ट किया।
उन्होंने कहा कि हम ट्रेड बढ़ाने, इन्वेस्टमेंट फ्लो को मजबूत करने और जॉइंट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पिछले साल साइन की गई बाइलेटरल इन्वेस्टमेंट ट्रीटी हमारे बिजनेस को कॉन्फिडेंस और प्रेडिक्टेबिलिटी देगी। पिछले कुछ सालों में भारत ने दूसरे देशों के साथ कई ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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