COP31 से पहले भारत ने लू को प्राकृतिक आपदा माना, NDMA ने उठाई फंड की मांग
(अपर्णा बोस) नयी दिल्ली, 25 अक्टूबर तुर्किये में होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (सीओपी31) से लगभग तीन महीने पहले, भारत ने आधिकारिक तौर पर ‘लू’ को प्राकृतिक आपदा घोषित किया है। अधिकारियों और विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम वैश्विक जलवायु वित्त प्रणाली की एक कड़वी सच्चाई को सामने लाता है, जो जोखिम का सामना कर रहे देशों को अपने अस्तित्व को बचाने के लिए आवश्यक जलवायु संबंधी खर्चों का पूरा बोझ खुद उठाने पर मजबूर करती है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सदस्य और विभाग प्रमुख, के. एस. वत्स ने ‘पीटीआई वीडियो’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘अगर हमें अच्छी-खासी अंतरराष्ट्रीय मदद मिली होती, जिससे हम अनुकूलन के विभिन्न उपायों के लिए निधि जुटा पाते, तो यह काम काफी आसान हो जाता।’’ यह रेखांकित करते हुए कि अनुकूलन के लिए उपलब्ध संसाधन ‘‘अपर्याप्त और अनिश्चित‘‘ हैं, वत्स ने उच्च प्रौद्योगिकी तक पहुंच बेहतर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें शीतलन के लिए जरूरी तकनीकें भी शामिल हैं।
वर्ष 2023 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन (सीओपी28) में भारत द्वारा प्रस्तुत पहले अनुकूलन संचार के अनुसार, अकेले भारत को 2030 तक अनुकूलन कार्यों पर कुल 56 लाख 68 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी। भारत सरकार के 2025 के आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि भारत के अनुकूलन वित्त का 98 प्रतिशत हिस्सा घरेलू स्रोतों से आता है। एनडीएमए के विभागाध्यक्ष ने बताया, ‘‘वित्त और प्रौद्योगिकी, दोनों ही मामलों में हम थोड़े पिछड़े हुए हैं।
तापमान का बढ़ना हमारे लिए एक बहुत बड़ी चिंता का विषय है, इसलिए हमने अपने राष्ट्रीय और राज्य आपदा न्यूनीकरण कोष के जरिए भीषण गर्मी के प्रभावों से निपटने का फैसला किया है। हम राज्यों को भीषण गर्मी से निपटने की कार्ययोजना बनाने और उन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए जरूर प्रोत्साहित करना चाहेंगे।’’ वत्स ने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय अनुकूलन वित्त राष्ट्रीय प्रयासों का पूरक बन सकता है और कार्यान्वयन के पैमाने तथा गति में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। भारत में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के कूल कोअलिशन कार्यक्रम का नेतृत्व करने वाले बेंजामिन हिकमैन ने बताया कि सर्वाधिक जरूरतमंद लोगों तक वित्तीय मदद पहुंचाने का मतलब सिर्फ निधि की उपलब्धता सुनिश्चित करना नहीं है, बल्कि सरकारों के साथ मिलकर काम करना और ऐसे व्यावहारिक प्रस्ताव तैयार करना भी है, जिनसे वित्तीय प्रवाह सुचारू रूप से हो सके।
हिकमैन ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘हम विभिन्न देशों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि वे जलवायु वित्त के लिए तैयार हो सकें और इसके लिए आवेदन करने हेतु अपनी संस्थागत क्षमता विकसित कर सकें।’’ उन्होंने कहा कि असल में, जलवायु वित्त के दायरे को बढ़ाने की जरूरत है, इसके लिए हमें ऐसी प्रायोगिक परियोजनाओं की भी आवश्यकता है, जो वित्त प्रणाली के तरीकों को परख सके। साथ ही, ऐसे उपाय खोजने होंगे जिनसे लोगों को आर्थिक प्रोत्साहन मिल सके या उनके पास पैसे पहुंच सके, ताकि वे इन चीजों का खर्च उठा सकें -- चाहे अपने घर को भीषण गर्मी के दौरान शीतल रखना हो या अधिक दक्ष वातानुकलन खरीदना हो। यूएनईपी की एमिशन्स गैप रिपोर्ट 2026 का हवाला देते हुए, ‘क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क साउथ एशिया’ के निदेशक संजय वशिष्ठ ने इस बात पर जोर दिया कि हर देश के लिए अनुकूलन एक अत्यंत जरूरी प्राथमिकता बन गई है।
उन्होंने कहा कि विकसित देशों को साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों और संबंधित क्षमताओं के तहत जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। वशिष्ठ ने तर्क दिया कि विकसित देश पीछे हट रहे हैं—जबकि वे पहले भी कभी जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते थे—भले ही जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अब उनकी अपनी दहलीज तक पहुंच चुके हैं। सीओपी31 का आयोजन 9 नवंबर से 20 नवंबर तक तुर्किये के अंताल्या में होगा।
Krishna Nagar के स्कूल में छात्रा की जलकर मौत, Delhi Police ने खंगाले CCTV फुटेज
पूर्वी दिल्ली के कृष्णा नगर स्थित एक स्कूल के परिसर में 12वीं कक्षा की छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में जलकर हुई मौत के मामले में पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगालने, शिक्षकों और स्कूल कर्मचारियों से पूछताछ करने के साथ-साथ प्रेम संबंध टूटने के संदेह समेत व्यक्तिगत कारणों की भी जांच कर रही है। सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी। यह घटना शनिवार को सर्वोदय कन्या विद्यालय में उस समय हुई जब स्कूल में निरीक्षण कार्य जारी था।
सूत्रों के मुताबिक, छात्रा सातवें पीरियड की कक्षा में मौजूद थी, जब उसने पानी पीने के बहाने अपने शिक्षक से बाहर जाने की अनुमति मांगी। पुलिस सूत्र ने कहा, ‘‘पुलिस की टीम इस मामले में कई पहलुओं से जांच कर रही हैं। लड़की के संदिग्ध ‘ब्रेकअप’ का पहलू भी जांच के दायरे में है।
टीम उसके सहपाठियों, परिवार और दोस्तों से पूछताछ कर रही हैं।’’ अधिकारियों के अनुसार, शनिवार को छात्रा पानी की बोतल लेकर कक्षा से बाहर निकली और सुरक्षा गार्ड के कमरे के पीछे स्थित उस इलाके में चली गई जहां पानी की टंकी रखी है। वहां उसने खुद पर कोई ज्वलनशील पदार्थ डाला और कथित तौर पर खुद को आग लगा ली। पुलिस इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि वह सुरक्षाकर्मियों या शिक्षकों की नजरों में आए बिना उस जगह तक कैसे पहुंची और इस कदम को अंजाम दे दिया।
इसके अलावा, स्कूल की निगरानी व्यवस्था और उन परिस्थितियों की भी जांच की जा रही है जिनमें छात्रा कक्षा छोड़कर बाहर निकली थी। चीख-पुकार सुनने के बाद स्कूल के कर्मचारी मौके पर पहुंचे, जहां उन्होंने छात्रा को बेहद बुरी तरह से झुलसी हालत में औंधे मुंह पड़े देखा। उन्होंने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी।
शाहदरा के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) आर पी मीणा ने बताया कि पूर्वाह्न 11 बजकर 58 मिनट पर एक छात्रा के जलने की सूचना मिली, जिसके तुरंत बाद कृष्णा नगर थाना पुलिस की एक टीम स्कूल पहुंची। उन्होंने कहा कि छात्रा को आनन-फानन में डॉ. हेडगेवार अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने स्कूल के सीसीटीवी डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (डीवीआर) को जब्त कर लिया है और पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए फुटेज का विश्लेषण कर रही है।
घटना के वक्त सुरक्षा गार्ड कहां था, यह पता लगाने के लिए उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने हाजिरी रजिस्टर की भी जांच की है। छात्रा के स्कूल बैग से बरामद तीन पन्नों का कथित ‘सुसाइड नोट’ इस मामले में एक महत्वपूर्ण सबूत है।
सूत्रों ने बताया कि इसमें उसके परिवार और एक दोस्त का जिक्र है। उन्होंने कहा कि एक पन्ने पर कथित तौर पर परिवार से माफी मांगी गई है, जबकि दूसरे पन्ने पर लिखा है कि उसके दोस्त को परेशान न किया जाए। पुलिस इस पत्र की विषय-सामग्री की जांच कर रही है और इस बात का पता लगा रही है कि क्या छात्रा किसी व्यक्तिगत परेशानी या प्रेम संबंध से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रही थी।
हालांकि, पुलिस अभी तक मौत की असली वजह पता नहीं कर पाई है। पुलिस परिवार के उन आरोपों की भी जांच कर रही है जिसमें उन्होंने किसी साजिश की आशंका जताई है। छात्रा के परिवार ने आत्महत्या की बात पर अविश्वास जताते हुए सवाल उठाया है कि स्कूल के समय के दौरान ऐसी घटना कैसे हो सकती है?
परिवार ने इसमें स्कूल प्रशासन और कर्मचारियों की लापरवाही का आरोप लगाया है।
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