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FSSAI के नोटिस पर डाबर का जवाब, कहा- उत्पादों के दावे नियमों के अनुरूप; ‘100 प्रतिशत’ शब्द हटाने की प्रक्रिया शुरू

डाबर इंडिया लिमिटेड ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की ओर से जारी नोटिस और उत्पादों पर किए गए कुछ दावों को लेकर उठे सवालों पर अपना पक्ष रखा है.  कंपनी ने कहा है कि उसके उत्पादों के लेबल पर दर्ज दावे मौजूदा कानूनी और नियामक प्रावधानों के अनुरूप हैं. डाबर के मुताबिक, इन दावों को लंबे समय से उद्योग में अपनाई जा रही प्रथाओं को ध्यान में रखते हुए इस्तेमाल किया जाता रहा है.

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने अपने उत्पादों को लेकर कभी किसी उपभोक्ता को भ्रमित करने वाला दावा नहीं किया. हालांकि, नियामक संस्था के पत्र में उठाई गई आपत्तियों के बाद कंपनी ने संबंधित उत्पादों के लेबल और विज्ञापनों में आवश्यक बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है. 

'100 प्रतिशत' वाले दावों में किया जा रहा बदलाव

डाबर ने बताया कि FSSAI के पत्र में जिन उत्पादों और प्रचार सामग्री का उल्लेख किया गया था, उनमें '100 प्रतिशत' से जुड़े दावों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. कंपनी के अनुसार, नए लेबल और संशोधित विज्ञापन तैयार किए जा रहे हैं, ताकि नियामक निर्देशों के अनुरूप आवश्यक बदलाव लागू किए जा सकें. 

कंपनी ने कहा कि आदेश में शामिल अधिकांश उत्पादों के लेबल, विज्ञापनों और वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी में पहले ही संशोधन किया जा चुका है. जिन सामग्री या दावों में बदलाव अभी बाकी है, उन पर कंपनी स्तर पर समीक्षा और पुनर्विचार किया जा रहा है.

डाबर का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य नियामक संस्था की चिंताओं का समाधान करना और उपभोक्ताओं तक स्पष्ट जानकारी पहुंचाना है.

FSSAI के साथ रचनात्मक बातचीत जारी

कंपनी ने बताया कि वह इस मामले में FSSAI को उचित जवाब दे रही है और समाधान तक पहुंचने के लिए नियामक निकाय के साथ लगातार संवाद कर रही है. डाबर के अनुसार, वह मामले के सभी पहलुओं पर विचार कर रही है और नियामक प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेगी.

कंपनी ने कहा कि संबंधित आदेश और उसके प्रभावों को लेकर आंतरिक स्तर पर भी समीक्षा की जा रही है. जरूरत पड़ने पर कंपनी उचित कानूनी मंच पर अपना पक्ष रखने का विकल्प भी अपना सकती है. डाबर ने बताया कि आगे की कार्रवाई और उपलब्ध कानूनी विकल्पों को लेकर विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है.

गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्धता दोहराई

डाबर ने अपने बयान में उत्पादों की गुणवत्ता, शुद्धता और खाद्य सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया. कंपनी के अनुसार, उत्पादों के निर्माण से लेकर उनकी बिक्री तक गुणवत्ता नियंत्रण और नियामक अनुपालन के तय मानकों का पालन किया जाता है.

कंपनी ने कहा कि उपभोक्ताओं का भरोसा उसके लिए महत्वपूर्ण है और वह अपने उत्पादों के संबंध में उच्च गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने के लिए लगातार काम करती है. डाबर के मुताबिक, लेबल और विज्ञापन में किए जा रहे बदलावों का उद्देश्य नियामक निर्देशों के साथ बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना है.

कानूनी सलाह लेने की भी तैयारी

डाबर ने यह भी कहा कि वह मामले में आगे की संभावित कार्रवाई को लेकर कानूनी सलाह ले रही है. कंपनी का कहना है कि वह नियामक प्रक्रिया का सम्मान करती है और संबंधित अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग जारी रखेगी.

कंपनी ने स्पष्ट किया कि वह उचित मंच पर अपना पक्ष रखने के लिए तैयार है और मामले का समाधान नियमों के दायरे में रहकर करने का प्रयास करेगी. डाबर के अनुसार, उत्पादों की गुणवत्ता और उपभोक्ता हितों की सुरक्षा उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है.

लेबलिंग और विज्ञापन दावों पर बढ़ी चर्चा

FSSAI की कार्रवाई और उसके बाद डाबर के स्पष्टीकरण ने खाद्य उत्पादों की लेबलिंग तथा विज्ञापनों में किए जाने वाले दावों को लेकर चर्चा तेज कर दी है. इस मामले में आगे नियामक संस्था और कंपनी के बीच होने वाली बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

फिलहाल डाबर ने ‘100 प्रतिशत’ से जुड़े दावों में बदलाव शुरू करने, अधिकांश सामग्री को संशोधित करने और शेष मामलों की समीक्षा जारी रखने की बात कही है. आने वाले समय में इस मामले पर नियामक प्रक्रिया और कंपनी की कानूनी रणनीति से स्थिति और स्पष्ट हो सकती है.  

यह भी पढ़ें - FSSAI का बड़ा एक्शन: भ्रामक 100 फीसदी दावों वाले उत्पादों की बिक्री पर रोक, डाबर को जारी हुआ आदेश

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श्रीलंका पहुंचे विदेश सचिव विक्रम मिस्री, शीर्ष नेतृत्व से करेंगे मुलाकात

विदेश सचिव विक्रम मिस्री बुधवार को श्रीलंका के एक दिवसीय दौरे पर कोलंबो पहुंचे. इस दौरान उनका राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके, प्रधानमंत्री हरिनी अमरसूर्या, विदेश मंत्री विजिता हेराथ और अन्य लोगों से मिलने का कार्यक्रम है. 

श्रीलंका स्थित भारतीय उच्चायोग ने इसकी जानकारी दी. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "भारत और श्रीलंका के बीच नियमित उच्च स्तरीय बातचीत को आगे बढ़ाते हुए, यह दौरा द्विपक्षीय रिश्तों को और मजबूत करेगा और जरूरी पहलों की रफ्तार बढ़ाएगा."

डेंगू के प्रसार पर लगाम लगाने में भारत का योगदान अहम

पड़ोसी देशों की मदद को हमेशा तत्पर भारत ने एक दिन पहले ही डेंगू के प्रसार पर लगाम लगाने के लिए भी अहम योगदान दिया था. भारत के उच्चायुक्त संतोष झा ने मंगलवार को श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. नलिंदा जयतिस्सा को 500 लीटर टेक्निकल मैलाथियान (कीटनाशक रसायन) सौंपा.

झा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए इसकी जानकारी दी. उन्होंने लिखा, "भारत डेंगू के खिलाफ लड़ाई में श्रीलंका के साथ खड़ा है. भारत सरकार और जनता की ओर से उपहार स्वरूप 500 लीटर टेक्निकल मैलाथियान स्वास्थ्य मंत्री डॉ. नलिंदा जयतिस्सा को सौंपकर खुशी हुई. इससे श्रीलंका में चल रहे डेंगू नियंत्रण प्रयासों को बल मिलेगा."

श्रीलंका में डेंगू के दैनिक मामलों में गिरावट

भारत ने यह मदद ऐसे समय की है जब श्रीलंका भर के अस्पतालों में डेंगू वार्ड अभी भी भरे हुए हैं. हालांकि रोजाना आने वाले मामलों की संख्या में कमी आई है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, श्रीलंका में डेंगू के दैनिक मामले जो कभी 1000 के आसपास पहुंच गए थे, अब घटकर लगभग 500 रह गए हैं. इससे पहले, 27 जुलाई को विभिन्न परियोजनाओं का जिक्र करते हुए झा ने कहा था कि श्रीलंका में विकास परियोजनाओं के लिए भारत की सहायता 7.5 अरब डॉलर से अधिक हो गई है. ये परियोजनाएं श्रीलंका के सभी 25 जिलों को कवर करती हैं.

भारतीय उच्चायोग ने एक्स पर लिखा, "7.5 अरब डॉलर से अधिक की सहायता, जिसमें 850 मिलियन डॉलर से अधिक अनुदान शामिल है, के साथ भारत की जन-केंद्रित परियोजनाएं आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा, रेलवे, ऊर्जा और आजीविका के क्षेत्र में श्रीलंका में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं." 14 जुलाई को संतोष झा और श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव अनिल जासिंघे ने देनियाया के बेस अस्पताल में चिकित्सा उपकरण आपूर्ति हेतु एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे. इसके तहत भारत सरकार एसएलआर (श्रीलंकाई मुद्रा) 600 मिलियन का अनुदान देगी. यह अस्पताल आपदा-पीड़ित क्षेत्र में स्थित होने के कारण स्थानांतरित किया जा रहा है. 3 साल में इस लक्ष्य को हासिल करने की उम्मीद है.

2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गए थे श्रीलंका 

2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीलंका के आधिकारिक दौरे पर गए थे. 2024 में राष्ट्रपति दिसानायके के पदभार संभालने के बाद वो दुनिया के ऐसे पहले शीर्ष नेता थे जो वहां पहुंचे थे. इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा से लेकर स्वास्थ्य और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को लेकर 7 अहम समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए थे.

--आईएएनएस

केआर/

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