श्रीलंका पहुंचे विदेश सचिव विक्रम मिस्री, शीर्ष नेतृत्व से करेंगे मुलाकात
विदेश सचिव विक्रम मिस्री बुधवार को श्रीलंका के एक दिवसीय दौरे पर कोलंबो पहुंचे. इस दौरान उनका राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके, प्रधानमंत्री हरिनी अमरसूर्या, विदेश मंत्री विजिता हेराथ और अन्य लोगों से मिलने का कार्यक्रम है.
श्रीलंका स्थित भारतीय उच्चायोग ने इसकी जानकारी दी. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "भारत और श्रीलंका के बीच नियमित उच्च स्तरीय बातचीत को आगे बढ़ाते हुए, यह दौरा द्विपक्षीय रिश्तों को और मजबूत करेगा और जरूरी पहलों की रफ्तार बढ़ाएगा."
डेंगू के प्रसार पर लगाम लगाने में भारत का योगदान अहम
पड़ोसी देशों की मदद को हमेशा तत्पर भारत ने एक दिन पहले ही डेंगू के प्रसार पर लगाम लगाने के लिए भी अहम योगदान दिया था. भारत के उच्चायुक्त संतोष झा ने मंगलवार को श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. नलिंदा जयतिस्सा को 500 लीटर टेक्निकल मैलाथियान (कीटनाशक रसायन) सौंपा.
झा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए इसकी जानकारी दी. उन्होंने लिखा, "भारत डेंगू के खिलाफ लड़ाई में श्रीलंका के साथ खड़ा है. भारत सरकार और जनता की ओर से उपहार स्वरूप 500 लीटर टेक्निकल मैलाथियान स्वास्थ्य मंत्री डॉ. नलिंदा जयतिस्सा को सौंपकर खुशी हुई. इससे श्रीलंका में चल रहे डेंगू नियंत्रण प्रयासों को बल मिलेगा."
श्रीलंका में डेंगू के दैनिक मामलों में गिरावट
भारत ने यह मदद ऐसे समय की है जब श्रीलंका भर के अस्पतालों में डेंगू वार्ड अभी भी भरे हुए हैं. हालांकि रोजाना आने वाले मामलों की संख्या में कमी आई है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, श्रीलंका में डेंगू के दैनिक मामले जो कभी 1000 के आसपास पहुंच गए थे, अब घटकर लगभग 500 रह गए हैं. इससे पहले, 27 जुलाई को विभिन्न परियोजनाओं का जिक्र करते हुए झा ने कहा था कि श्रीलंका में विकास परियोजनाओं के लिए भारत की सहायता 7.5 अरब डॉलर से अधिक हो गई है. ये परियोजनाएं श्रीलंका के सभी 25 जिलों को कवर करती हैं.
भारतीय उच्चायोग ने एक्स पर लिखा, "7.5 अरब डॉलर से अधिक की सहायता, जिसमें 850 मिलियन डॉलर से अधिक अनुदान शामिल है, के साथ भारत की जन-केंद्रित परियोजनाएं आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा, रेलवे, ऊर्जा और आजीविका के क्षेत्र में श्रीलंका में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं." 14 जुलाई को संतोष झा और श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव अनिल जासिंघे ने देनियाया के बेस अस्पताल में चिकित्सा उपकरण आपूर्ति हेतु एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे. इसके तहत भारत सरकार एसएलआर (श्रीलंकाई मुद्रा) 600 मिलियन का अनुदान देगी. यह अस्पताल आपदा-पीड़ित क्षेत्र में स्थित होने के कारण स्थानांतरित किया जा रहा है. 3 साल में इस लक्ष्य को हासिल करने की उम्मीद है.
2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गए थे श्रीलंका
2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीलंका के आधिकारिक दौरे पर गए थे. 2024 में राष्ट्रपति दिसानायके के पदभार संभालने के बाद वो दुनिया के ऐसे पहले शीर्ष नेता थे जो वहां पहुंचे थे. इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा से लेकर स्वास्थ्य और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को लेकर 7 अहम समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए थे.
--आईएएनएस
केआर/
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पुरानी कारों को ऑटो एलपीजी में बदलने के लिए राष्ट्रीय रेट्रोफिट नीति जरूरी: इंडस्ट्री
नई दिल्ली, 5 अगस्त (आईएएनएस)। भारत का तेजी से बढ़ता सेकेंड-हैंड कार बाजार शहरी प्रदूषण कम करने का एक तेज और व्यावहारिक अवसर प्रदान करता है। इसी को देखते हुए सरकार को इस्तेमाल में मौजूद पेट्रोल और डीजल वाहनों को ऑटो एलपीजी में बदलने के लिए समयबद्ध राष्ट्रीय रेट्रोफिट नीति लागू करनी चाहिए। यह मांग बुधवार को इंडस्ट्री की ओर से की गई।
भारत में ऑटो एलपीजी को बढ़ावा देने वाली प्रमुख संस्था आईएसी ने कहा कि देश में हर साल सेकेंड-हैंड कारों की बिक्री करीब 60 लाख के स्तर पर पहुंच रही है, ऐसे में एक समर्पित रेट्रोफिट नीति की तत्काल जरूरत है।
उद्योग संगठन के अनुसार, ऐसी नीति देश के तेजी से बढ़ते प्री-ओन्ड वाहन बाजार को वाहन प्रदूषण कम करने और वायु गुणवत्ता सुधारने का प्रभावी माध्यम बना सकती है। खासकर दिल्ली एनसीआर और अन्य प्रदूषण प्रभावित शहरों में इसका बड़ा लाभ मिलेगा।
रिपोर्ट में उद्योग के अनुमानों का हवाला देते हुए कहा गया है कि सेकेंड-हैंड वाहनों का कारोबार नई कारों की बिक्री की तुलना में कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2023 में लगभग 46 लाख सेकेंड-हैंड वाहनों के लेन-देन का आंकड़ा 2030 तक 1 करोड़ से अधिक पहुंच सकता है। इस दौरान इसकी वार्षिक औसत वृद्धि दर (सीएजीआर) 12-13 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में हर नई कार की बिक्री पर एक से अधिक पुरानी गाड़ी का स्वामित्व बदलता है।
यदि भारतीय सड़कों पर चल रहे करोड़ों पेट्रोल और डीजल वाहनों में से केवल एक हिस्से को भी ऑटो एलपीजी में बदला जाए, तो वायु प्रदूषण में बड़ी कमी लाई जा सकती है। विशेष रूप से दिल्ली-एनसीआर और अन्य प्रदूषण प्रभावित शहरों में इसका बड़ा सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।
रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों और हाइड्रोजन जैसी दीर्घकालिक तकनीकों के व्यापक स्तर पर अपनाए जाने तक, रेट्रोफिटमेंट उत्सर्जन घटाने का सबसे तेज और व्यावहारिक समाधान साबित हो सकता है।
आईएसी के महानिदेशक सुयश गुप्ता ने कहा, यदि भारत ऐसे ईंधन का उपयोग करता है जो पेट्रोल की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत सस्ता है और पार्टिकुलेट मैटर, हाइड्रोकार्बन तथा नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओएक्स) का उत्सर्जन भी काफी कम करता है, तो सड़कों पर चल रहे मौजूदा वाहनों से होने वाले प्रदूषण को तेजी से कम किया जा सकता है। इससे लाखों लोगों को बेहतर स्वास्थ्य और स्वच्छ हवा का लाभ मिलेगा, जबकि इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन जैसे दीर्घकालिक विकल्प भी समानांतर रूप से आगे बढ़ते रहेंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रति किलोमीटर संचालन लागत के आधार पर ऑटो एलपीजी पेट्रोल से लगभग 40-45 प्रतिशत सस्ता पड़ता है। वहीं किसी वाहन को ऑटो एलपीजी में बदलने की लागत करीब 30,000 रुपए आती है, जो इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने में लगने वाले कई लाख रुपए के खर्च से काफी कम है।
संगठन का दावा है कि एलपीजी से चलने वाले वाहन पेट्रोल वाहनों की तुलना में कार्बन मोनोऑक्साइड और कुल हाइड्रोकार्बन उत्सर्जन में लगभग 50 प्रतिशत तक कमी ला सकते हैं। साथ ही इनमें नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओएक्स) का उत्सर्जन भी काफी कम होता है और यह बीएस-VI मानकों की निर्धारित सीमा से नीचे रहता है।
--आईएएनएस
एबीएस
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