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No filter: जंतर-मंतर पर क्यों बिगड़े हालात? चूक किसकी, कानून क्या कहता है, क्राउड कंट्रोल की 'SOP' और पुलिस की चुनौतियों पर Ex-IPS का बेबाक विश्लेषण

जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा में धांधली के विरोध में उपजे आंदोलन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा बुलाए गए 'संसद मार्च' के दौरान हुई हिंसा ने एक बार फिर पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों पर बहस छेड़ दी है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने बर्बरता और पैलेट गन का इस्तेमाल किया, जबकि पुलिस का कहना है कि भीड़ के उग्र होने और बैरिकेड्स तोड़ने के बाद कार्रवाई मजबूरी बन गई थी। इसी पूरे घटनाक्रम, क्राउड कंट्रोल की एसओपी (SOP) और भारतीय राजनीति में आंदोलनों के बदलते स्वरूप पर प्रभात साक्षी के विशेष शो 'No Filter' में पूर्व संयुक्त पुलिस आयुक्त (Ex-IPS) ओपी मिश्रा ने कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर बेबाक राय रखी।

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प्रदर्शन और पुलिस की सीमा: जब टूटती है 'लक्ष्मण रेखा'

पूर्व आईपीएस अधिकारी ओपी मिश्रा के अनुसार, संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार देता है और पुलिस का पहला कर्तव्य इस अधिकार की रक्षा करना है [04:25]। लेकिन नई दिल्ली जैसा क्षेत्र, जहाँ संसद और राष्ट्रपति भवन जैसे अति-संवेदनशील संस्थान हैं, वहाँ सुरक्षा के कड़े मानदंड लागू होते हैं । सीजेपी प्रदर्शन का विश्लेषण करते हुए उन्होंने कहा कि समस्या तब उत्पन्न हुई जब प्रदर्शनकारियों ने पूर्व निर्धारित शर्ते और पुलिस के साथ तय लक्ष्मण रेखा को लांघा। संसद जैसे प्रतिबंधित क्षेत्र की ओर जबरन बढ़ने की कोशिश के बाद ही स्थिति तनावपूर्ण हुई।

लाठीचार्ज और बल प्रयोग:क्या कहता है नियम?

पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाने वालों को जवाब देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस बल का प्रयोग अचानक या मनमाने ढंग से नहीं करती। क्राउड कंट्रोल की एक लिखित एसओपी (SOP) और 'ग्रेडेड रिस्पांस' होता है:
पहला चरण: लाउड हेलर से चेतावनी 
दूसरा चरण: वॉटर कैनन (पानी की बौछार) का प्रयोग 
तीसरा चरण: लाठीचार्ज (केन चार्ज) 
अंतिम चरण: आंसू गैस के गोले छोड़ना 
ओपी मिश्रा ने कहा कि जब उग्र भीड़ सारे बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ने पर आमादा हो, तो मौके पर तैनात सक्षम अधिकारी को सार्वजनिक संपत्ति और जान-माल की रक्षा के लिए सख्त निर्णय लेने ही पड़ते हैं। 

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बिना वर्दी में डंडे और सोशल मीडिया का 'हाफ ट्रुथ'

प्रदर्शन के दौरान बिना वर्दी और बिना नेम प्लेट के हाथों में डंडे लिए घूम रहे संदिग्धों पर उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी से जुड़ी कई विंग्स प्लेन क्लोथ्स में तैनात होती हैं । हालाँकि, भीड़ में डंडे लेकर घूम रहे हर व्यक्ति को सीधे पुलिसकर्मी मान लेना सही नहीं है, इसकी निष्पक्ष जाँच आवश्यक है। सोशल मीडिया और 15-20 सेकंड के वायरल वीडियो पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि अनुशासित बल होने के नाते पुलिस हर वीडियो पर तुरंत बयानबाजी नहीं कर सकती । आधिकारिक माध्यमों से ही अफवाहों का खंडन किया जाता है 

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Article 370 पर J&K Politics में फिर से उबाल, Congress-NC मना रहे Black Day, Mehbooba Mufti ने Tiranga उलटा पकड़ कर करा दिया बड़ा बवाल

एक ओर पूरा देश और स्वयं जम्मू-कश्मीर का आम नागरिक पिछले सात वर्षों में घाटी में आए शांति, विकास और नए अवसरों का स्वागत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ स्थानीय राजनीतिक दल और नेता आज भी पांच अगस्त को 'काला दिवस' मनाकर अपने पुराने राजनीतिक एजेंडे से बाहर निकलने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। सबसे अधिक विवाद पीडीपी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को लेकर खड़ा हुआ, जो विरोध प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रध्वज को उल्टा पकड़े हुए दिखाई दीं। राष्ट्रीय ध्वज जैसे सर्वोच्च राष्ट्रीय प्रतीक के प्रति इस तरह की लापरवाही या असंवेदनशीलता ने उनकी राजनीतिक मानसिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों ने इसे ध्वज संहिता का उल्लंघन मानते हुए कानूनी कार्रवाई पर भी विचार शुरू कर दिया है।

हम आपको याद दिला दें कि पांच अगस्त 2019 को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 और 35-ए के अधिकांश प्रावधानों को समाप्त कर दिया था तथा तत्कालीन राज्य का पुनर्गठन कर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया था। सात वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में शांति, प्रगति और समान अवसरों के नए युग की शुरुआत बताते हुए कहा कि भारत एक विकसित जम्मू-कश्मीर, समृद्ध लद्दाख और विकसित भारत के निर्माण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहा है।

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इसके विपरीत नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी और कांग्रेस ने पांच अगस्त को 'काला दिवस' के रूप में मनाते हुए विरोध प्रदर्शन किए। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने श्रीनगर में मार्च निकालने का प्रयास किया और विशेष दर्जे की बहाली की मांग दोहराई। पार्टी का कहना है कि जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक अधिकार समाप्त किए गए और राज्य का दर्जा अब तक बहाल नहीं किया गया है। कांग्रेस और पीडीपी ने भी राज्य का दर्जा, भूमि और रोजगार संबंधी सुरक्षा बहाल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किए। प्रशासन ने किसी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए श्रीनगर में विशेषकर लाल चौक और राजनीतिक दलों के कार्यालयों के आसपास सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे।

हालांकि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन पिछले सात वर्षों के आंकड़े जम्मू-कश्मीर में आए व्यापक बदलावों की अलग तस्वीर पेश करते हैं। सबसे बड़ा परिवर्तन सुरक्षा के क्षेत्र में दिखाई देता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार आतंकवादी घटनाओं, घुसपैठ के प्रयासों, पत्थरबाजी और हिंसा में उल्लेखनीय गिरावट आई है। आतंकवादी घटनाएं वर्ष 2022 की 151 से घटकर 2025 में केवल 35 रह गईं। इसी अवधि में मारे गए आतंकवादियों की संख्या 193 से घटकर 46 हो गई, जबकि सुरक्षाबलों के शहीद होने की घटनाओं में भी कमी दर्ज की गई। पत्थरबाजी की घटनाओं में लगभग 99 प्रतिशत तक गिरावट आई है और 2025 पिछले दो दशकों का सबसे कम हिंसक वर्ष माना गया। 2026 में भी अब तक आतंकवाद से जुड़ी घटनाओं की संख्या सीमित रही है।

शांति का सबसे बड़ा लाभ पर्यटन क्षेत्र को मिला है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला स्वयं विधानसभा में बता चुके हैं कि 2016 से 2018 के बीच जहां लगभग 59 लाख पर्यटक जम्मू-कश्मीर आए थे, वहीं 2023 से 2025 के बीच यह संख्या बढ़कर 2.42 करोड़ तक पहुंच गई। हालांकि पिछले वर्ष पहलगाम आतंकी हमले के कारण कश्मीर घाटी में पर्यटकों की संख्या कुछ घटी, फिर भी जम्मू संभाग और विशेष रूप से माता वैष्णो देवी धाम में श्रद्धालुओं की भारी आमद जारी रही। पर्यटन विभाग के आंकड़े भी बताते हैं कि 2019 की तुलना में 2023 तक पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो घाटी में सामान्य होते हालात और लोगों के बढ़ते विश्वास का संकेत है।

साथ ही आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिले हैं। उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक के शुरू होने से पहली बार कश्मीर घाटी सीधे देश के रेल नेटवर्क से जुड़ गई है। इसी परियोजना के तहत चिनाब नदी पर दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल बनाया गया, जो भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रतीक बन चुका है। इसके साथ ही नई सड़कों, सुरंगों, डिजिटल कनेक्टिविटी और अन्य आधारभूत परियोजनाओं ने क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को नई गति दी है।

यही नहीं, आर्थिक मोर्चे पर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। जम्मू-कश्मीर के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार 2019 के बाद प्रति व्यक्ति आय में औसतन 8.81 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में प्रति व्यक्ति आय लगभग 1.68 लाख रुपये रहने का अनुमान है। यद्यपि यह अभी राष्ट्रीय औसत से कम है, फिर भी यह स्पष्ट करता है कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। हालांकि कृषि पर अत्यधिक निर्भरता, सीमित औद्योगिकीकरण और रोजगार सृजन की धीमी गति जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, जिन पर सरकार को आगे और अधिक ध्यान देने की आवश्यकता होगी।

बहरहाल, देखा जाये तो ऐसे समय में जब जम्मू-कश्मीर धीरे-धीरे हिंसा की छवि से बाहर निकलकर विकास, निवेश और पर्यटन की नई पहचान बना रहा है, तब 'काला दिवस' की राजनीति आम कश्मीरी की आकांक्षाओं से मेल खाती नहीं दिखती। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन राष्ट्रध्वज जैसे राष्ट्रीय सम्मान के प्रतीक के प्रति असावधानी किसी भी राजनीतिज्ञ से अपेक्षित नहीं है। महबूबा मुफ्ती का तिरंगे को उल्टा पकड़ना केवल एक विवाद नहीं, बल्कि उस राजनीतिक सोच पर भी प्रश्नचिह्न है जो आज भी राष्ट्रीय एकता से जुड़े प्रतीकों के प्रति पर्याप्त संवेदनशीलता नहीं दिखा पा रही है। सात वर्षों के अनुभव बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर में अभी चुनौतियां अवश्य हैं, लेकिन शांति, आधारभूत विकास, पर्यटन, निवेश और राष्ट्रीय एकीकरण की दिशा में जो बदलाव आए हैं, उन्हें नकारना कठिन है। यही कारण है कि अनुच्छेद 370 हटाने का निर्णय सिर्फ संवैधानिक बदलाव नहीं, बल्कि नए जम्मू-कश्मीर की आधारशिला के रूप में देखा जा रहा है।

-नीरज कुमार दुबे

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  Sports

IND vs SL: श्रीलंका में कब प्रैक्टिस मैच खेलेगा भारत... कितने बजे शुरू होगा वॉर्म अप मुकाबला

IND vs XI Warm up Match: श्रीलंका दौरे पर रवाना हुई भारतीय टीम के लिए जसप्रीत बुमराह का बाहर होना बड़ा झटका है. हालांकि, 15 अगस्त से शुरू हो रही टेस्ट सीरीज से पहले टीम इंडिया के पास कोलंबो की परिस्थितियों में खुद को ढालने का शानदार मौका है. 7 अगस्त से शुरू होने वाले तीन दिवसीय अभ्यास मैच में भारतीय खिलाड़ी मैदान पर उतरेंगे. सुबह 10:00 बजे से शुरू होने वाला यह वॉर्म-अप मुकाबला प्लेइंग इलेवन का सही कॉम्बिनेशन तय करने में बेहद मददगार साबित होगा. Wed, 5 Aug 2026 18:35:38 +0530

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