Board Exams 2026: बोर्ड एग्जाम में कैसे बनें बच्चों का सबसे मजबूत सहारा? जरूरी गाइड
बोर्ड एग्जाम (CBSE, ICSE या राज्य बोर्ड) 2026 के लिए बच्चों की तैयारी का समय चल रहा है। 10 फरवरी से मध्यप्रदेश बोर्ड के एग्जाम शुरू हो रहे हैं। इस दौर में बच्चे अकादमिक प्रेशर, स्ट्रेस और आत्मविश्वास की कमी से जूझते हैं।
बोर्ड या फाइनल एग्जाम का तनाव सिर्फ बच्चों का ही नहीं बढ़ता, बल्कि उनके माता-पिता भी मानसिक दबाव में आ जाते हैं। ऐसे समय में पैरेंट्स की समझदारी और संवेदनशीलता बच्चों के लिए बेहद जरूरी हो जाती है, ताकि वे बिना डर और दबाव के परीक्षा दे सकें।
माता-पिता के रूप में आप उनका सबसे मजबूत सहारा बन सकते हैं, न कि प्रेशर का सोर्स। नीचे एक पूर्ण गाइड है, जो भावनात्मक, शारीरिक और पढ़ाई संबंधी सपोर्ट पर फोकस करता है। ये टिप्स हालिया एक्सपर्ट एडवाइस और पैरेंटिंग गाइड्स से इंस्पायर्ड हैं।
इस दौर में अभिभावकों की भूमिका आलोचक की नहीं, बल्कि सपोर्ट सिस्टम की होनी चाहिए।
तुलना करती है आहत
अपने बच्चे की तुलना किसी और बच्चे से न करें। इस तरह की बातें बच्चे को मानसिक रूप से आहत करती हैं। जैसे हर इंसान का काम करने का तरीका अलग होता है, वैसे ही हर बच्चे की सीखने की क्षमता और पढ़ाई का तरीका भी अलग होता है। तुलना करने से आत्मविश्वास बढ़ता नहीं, बल्कि टूटता है।
ताने न मारें
“तुम कुछ नहीं कर सकते”,
“भगवान जाने तुम्हारा क्या होगा”,
“हम सब कुछ देते हैं और तुम पढ़ाई भी नहीं कर पाते...”
ऐसे कटुवचन बच्चे के मन में गहरी नकारात्मक छाप छोड़ते हैं।
यह समझना जरूरी है कि आज के समय में सिर्फ अच्छे नंबर ही सफल जीवन की गारंटी नहीं होते। एक परीक्षा या एक कक्षा के अंक बच्चे का भविष्य तय नहीं करते, लेकिन आपके शब्द उसके आत्मसम्मान को जरूर प्रभावित कर सकते हैं।
रखें स्वस्थ पारिवारिक माहौल
घर का वातावरण बच्चे की पढ़ाई पर सीधा असर डालता है। यदि घर में लगातार झगड़े हों या बहुत अधिक शोर-शराबा हो, तो बच्चे के लिए एकाग्र होकर पढ़ना मुश्किल हो जाता है। परीक्षा के दिनों में घर का माहौल शांत, सकारात्मक और सहयोगी होना चाहिए, ताकि बच्चा बिना किसी बाधा के पढ़ाई कर सके।
डाइट है बहुत महत्वपूर्ण
परीक्षा के दिनों में बच्चे मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से मेहनत करते हैं। ऐसे में उनकी डाइट का खास ध्यान रखें।
फास्ट फूड से दूरी बनाकर ताजे फल, फलों का जूस, हरी सब्ज़ियां, बादाम, अखरोट और भुने मखाने जैसे पौष्टिक आहार दें। सही खान-पान से न केवल ऊर्जा मिलती है, बल्कि एकाग्रता भी बेहतर होती है।
भावनात्मक सपोर्ट दें
कई बच्चे इस समय एग्जाम फोबिया का शिकार हो जाते हैं। उन्हें डर सताने लगता है कि अगर वे अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए तो उन्हें नाकाम समझा जाएगा। ऐसे में पैरेंट्स का यह कहना-
“मार्क्स चाहे जैसे हों, हम तुम्हारे साथ हैं”
बच्चे के लिए सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।
समय निकालकर उनसे हल्की-फुल्की बातें करें, पढ़ाई के अलावा भी उनकी भावनाओं को समझें।
मददगार बनें
परीक्षा सिर पर आते ही कई बच्चे यह तय नहीं कर पाते कि कैसे पढ़ें, क्या रिवाइज़ करें और किस तरह तैयारी करें। ऐसे में उन्हें डांटने की बजाय सही दिशा दिखाएं। ज़रूरत हो तो किसी शिक्षक या काउंसलर की मदद लेने में भी संकोच न करें।
क्या करें ?
परीक्षा बच्चों की जिंदगी का एक पड़ाव है, पूरा जीवन नहीं। इस दौर में माता-पिता का शांत, सकारात्मक और सहयोगी रवैया बच्चे के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दे सकता है।
(सीनियर काउंसलर और साइकोलॉजिस्ट निधि तिवारी से की गई बातचीत पर आधारित)
Bangladesh elections: जमात प्रमुख शफीकुर रहमान ने दिया संदेश, कहा-भारत से बेहतर संबंध उनकी पहली प्राथमिकता
एपी सिंह, ढाका। बांग्लादेश में आम चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी बीच जमात-ए-इस्लामी के अमीर (चीफ) शफीकुर रहमान ने कूटनीतिक संकेत देते हुए कई अहम मुद्दों पर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट किया। मतदान से पहले उन्होंने ढाका के एक प्रतिष्ठित होटल में विदेशी राजनयिकों, अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों और मीडिया प्रतिनिधियों के साथ बातचीत किया। इस पहल को चुनाव से पहले भरोसा कायम करने और सकारात्मक छवि पेश करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर पूछे गए सवाल के जवाब में रहमान ने प्रतीकात्मक भाषा का इस्तेमाल किया।
उन्होंने सभागार में लगे झूमरों की ओर इशारा करते हुए संबंधों को रंगीन बताया। जब ध्यान दिलाया गया कि झूमरों का रंग हरा है, तो उन्होंने कहा कि हरा रंग तरक्की और विकास का प्रतीक है। उनका कहना था कि भारत पड़ोसी देश है, इसलिए उसके साथ सहयोग और मजबूत रिश्ते उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेंगे। इस बयान को क्षेत्रीय संतुलन और व्यावहारिक कूटनीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। देश में धार्मिक और सामाजिक विविधता के सवाल पर उन्होंने अल्पसंख्यक शब्द से असहमति जताई। उनका कहना था कि बांग्लादेश में सभी नागरिक बराबर हैं और किसी को दूसरे दर्जे का नहीं माना जाना चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि हर व्यक्ति सबसे पहले बांग्लादेशी है और समान अधिकारों का हकदार है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब चुनावी दौर में कुछ समुदायों ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंताएं जताई हैं। महिलाओं की भूमिका और इस्लामी मूल्यों के पालन पर उठे सवालों का जवाब देते हुए रहमान ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी महिलाओं के खिलाफ नहीं है। उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि उनके अपने परिवार में पत्नी और बेटियां हैं, इसलिए महिला-विरोधी होने का सवाल ही नहीं उठता। इन बयानों से साफ है कि जमात-ए-इस्लामी चुनाव से पहले खुद को एक जिम्मेदार और संतुलित राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है, ताकि देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों में भरोसा कायम किया जा सके।
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