MP Board Exam 2026: परीक्षा से पहले CM डॉ. मोहन यादव ने दिए छात्रों को सफलता के मंत्र
MP Board परीक्षाएं 10 फरवरी से शुरू होने जा रही हैं और ठीक एक दिन पहले भोपाल से छात्रों को मिला आत्मविश्वास का संदेश।
परीक्षा के दबाव और मानसिक तनाव के बीच मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार (9 फरवरी 2026) को परीक्षा पर संवाद कार्यक्रम में बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आए। सुभाष एक्सीलेंस स्कूल में आयोजित इस संवाद में मुख्यमंत्री ने खुद को छात्रों का गार्जियन बताते हुए उनकी शंकाएं सुनीं और लक्ष्य पर फोकस, कड़ी मेहनत व सकारात्मक सोच के साथ परीक्षा देने के व्यावहारिक मंत्र दिए।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि परीक्षा जीवन की कसौटी नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और अनुशासन की पहचान है। तनावमुक्त रहकर, समय प्रबंधन और निरंतर अभ्यास के जरिए सफलता हासिल की जा सकती है। परीक्षा से पहले मिला यह मार्गदर्शन MP Board के छात्रों और अभिभावकों- दोनों के लिए संबल बनकर सामने आया।
सीएम ने अपने व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद वादा निभाते हुए कहा, "मुझे पिछले शनिवार आना था, लेकिन व्यस्तता के कारण नहीं आ सका। आज मैं अपना वादा पूरा करने और हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों का गार्जियन बनकर आया हूं।" उन्होंने सभी छात्रों को परीक्षा की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं।
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) February 9, 2026
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अनुशासन, दूरदर्शिता और कार्यशैली की सराहना की तथा छात्रों को उनसे प्रेरणा लेने की सलाह दी। विद्यार्थियों ने अपने सपनों के बारे में बताया- कुछ डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, शिक्षक या राजनेता बनना चाहते हैं। सीएम ने उन्हें लक्ष्य स्पष्ट रखने और निरंतर मेहनत करने का प्रोत्साहन दिया।
स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने भी संबोधित करते हुए कहा कि परीक्षा सुनते ही बच्चे तनावग्रस्त हो जाते हैं, लेकिन इसे तनाव के बजाय उत्सव और अवसर के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री के 'परीक्षा पर चर्चा' कार्यक्रम का जिक्र करते हुए सकारात्मक सोच अपनाने की बात कही।
इस मौके पर स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. संजय गोयल, आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय शिल्पा गुप्ता सहित बड़ी संख्या में अधिकारी और विद्यार्थी उपस्थित थे। कार्यक्रम ने छात्रों को परीक्षा से पहले महत्वपूर्ण प्रेरणा और मार्गदर्शन प्रदान किया।
CM डॉ. मोहन यादव की परीक्षा पर संवाद की तस्वीरें
CM डॉ. मोहन यादव के 5 परीक्षा मंत्र
- लक्ष्य पर फोकस रखें-पढ़ाई को बोझ नहीं, उद्देश्य बनाएं
- तनाव से दूर रहें-परीक्षा जीवन की कसौटी नहीं है
- एकाग्रचित्त होकर पढ़ें -चिंतन-मनन को पढ़ाई का हिस्सा बनाएं
- असफलता से न डरें -पहली बार न मिले तो दोबारा पूरे आत्मविश्वास से प्रयास करें
- अनुशासन + मेहनत -सफलता निरंतर प्रयास से ही मिलती है
बांग्लादेश चुनाव 2026: तारिक रहमान की 'प्रचंड विजय', BNP को 208 सीटें; अल्पसंख्यकों का साथ और सत्ता परिवर्तन की पूरी कहानी
नई दिल्ली: 17 साल के लंबे अंतराल के बाद बांग्लादेश की राजनीति में एक नया युग शुरू हो गया है। 12 फरवरी 2026 को हुए 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 208 सीटों के साथ दो-तिहाई बहुमत की ओर कदम बढ़ा दिए हैं।
तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना अब तय माना जा रहा है। अवामी लीग की अनुपस्थिति में हुए इस चुनाव में न केवल सत्ता बदली है, बल्कि देश की संवैधानिक दिशा भी बदलती नजर आ रही है।
अल्पसंख्यकों का रुझान: किधर गया हिंदू और अन्य समुदायों का वोट?
बांग्लादेश के चुनाव में अल्पसंख्यक समुदाय विशेषकर हिंदू, बौद्ध और ईसाई हमेशा निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। पारंपरिक रूप से ये समुदाय शेख हसीना की अवामी लीग के समर्थक माने जाते थे, लेकिन उनकी अनुपस्थिति में इस बार रुझान इस प्रकार रहा:-
सुरक्षा की गारंटी पर वोट: अल्पसंख्यकों का एक बड़ा हिस्सा इस बार BNP की ओर झुका दिखा। तारिक रहमान द्वारा चुनाव पूर्व दिए गए "समावेशी बांग्लादेश" के वादे और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिखित आश्वासन ने उन्हें प्रभावित किया।
तटस्थता और दुविधा: कुछ क्षेत्रों में अल्पसंख्यकों ने मतदान से दूरी बनाई या निर्दलीय उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी, क्योंकि उन्हें जमात-ए-इस्लामी के बढ़ते प्रभाव से असुरक्षा का डर था।
जमात का प्रयास: जमात-ए-इस्लामी ने भी अपनी छवि सुधारने के लिए कुछ अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में संपर्क साधा था, लेकिन उन्हें वहां से बहुत कम समर्थन मिला।
मतदान का प्रतिशत और जन भागीदारी
वोटर टर्नआउट: इस बार कुल मतदान लगभग 48% से 60% के बीच रहने का अनुमान है, जो 2024 के विवादित चुनाव (41.8%) से काफी बेहतर है।
युवा शक्ति : देश के 44% मतदाता युवा (18-37 वर्ष) हैं। रुझानों से स्पष्ट है कि पहली बार वोट देने वाले युवाओं ने बड़े पैमाने पर बीएनपी और एनसीपी को वोट दिया।
संवैधानिक जनमत संग्रह और 'जुलाई चार्टर'
चुनाव के साथ ही देश में एक ऐतिहासिक जनमत संग्रह भी कराया गया, जिसे 'जुलाई चार्टर' का नाम दिया गया है। इसे 72.9% जनता का भारी समर्थन मिला। इस चार्टर के लागू होने से अब बांग्लादेश में कोई भी व्यक्ति दो कार्यकाल से अधिक प्रधानमंत्री पद पर नहीं रह सकेगा। यह संवैधानिक बदलाव भविष्य में किसी भी प्रकार की तानाशाही को रोकने के उद्देश्य से किया गया है।
तारिक रहमान की वापसी: लंदन में निर्वासन के बाद तारिक रहमान की यह पहली बड़ी राजनैतिक जीत है। उन्होंने अपनी दोनों सीटों बोगुरा-6 और ढाका-17 से बड़ी जीत दर्ज की है।
डिजिटल वोटिंग और पारदर्शिता: पहली बार डाक मतपत्रों का व्यापक उपयोग हुआ और गणना प्रक्रिया को लाइव स्ट्रीम किया गया ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
शेख हसीना की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक
भारत में शरण लिए हुए पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इन नतीजों को सिरे से खारिज करते हुए इसे 'फर्जी चुनाव' और 'लोकतंत्र का मजाक' बताया है। उनका कहना है कि अवामी लीग के बिना यह चुनाव अवैध है। दूसरी ओर, यूरोपीय संघ, कॉमनवेल्थ और अन्य करीब 500 अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने चुनावी प्रक्रिया को मोटे तौर पर शांतिपूर्ण और सफल करार दिया है।
आगामी सरकार के सामने प्रमुख चुनौतियां
नई सरकार के गठन के बाद तारिक रहमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना और प्रशासनिक भ्रष्टाचार को खत्म करना होगा। साथ ही, भारत के साथ रणनीतिक संबंधों को संतुलित करना और देश में कानून व्यवस्था बनाए रखना उनके कार्यकाल की प्राथमिकता होगी। जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन की संभावनाओं के बीच वैश्विक स्तर पर अपनी स्वीकार्यता बनाए रखना भी बीएनपी के लिए अहम होगा।
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