इस्पात उद्योग के दिग्गज जतिंदर मेहरा का निधन, उद्योग जगत शोक में डूबा
नई दिल्ली, 25 फरवरी (आईएएनएस)। इस्पात उद्योग के दिग्गज जतिंदर मेहरा का बुधवार को निधन होने के साथ भारत के धातु और खनन क्षेत्र के एक युग का अंत हो गया।
छह दशकों से अधिक के अपने करियर में, मेहरा अपने तकनीकी ज्ञान, रणनीतिक सोच और महत्वाकांक्षी विचारों को सफल बड़े पैमाने की परियोजनाओं में बदलने की क्षमता के लिए व्यापक रूप से सम्मानित थे।
मेहरा ने एस्सार समूह में धातु एवं खनन प्रभाग के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया, जहां उन्होंने समूह के इस्पात और धातु व्यवसायों के मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शोक संदेश में, एस्सार परिवार ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और उन्हें एक दूरदर्शी लीडर के रूप में याद किया, जिनकी स्पष्टता, प्रतिबद्धता और नेतृत्व ने समूह की कुछ सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों को परिभाषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कंपनी ने कहा, भारत के इस्पात उद्योग के एक सम्मानित दिग्गज और ऐसे लीडर, जिनकी दूरदृष्टि ने एस्सार समूह की कुछ सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों की नींव रखी, उनके निधन से एस्सार परिवार को गहरा दुख हुआ है।
उन्होंने कहा कि एस्सार की यात्रा में उनका योगदान गहराई से समाहित है और उनकी विरासत आने वाले वर्षों में संगठन का मार्गदर्शन करती रहेगी।
एस्सार में, उन्होंने दीर्घकालिक रणनीति को आकार देने और इस्पात उत्पादन क्षमता का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें हजीरा में प्रमुख विकास परियोजनाएं शामिल हैं।
उन्होंने ओडिशा में पारादीप इस्पात संयंत्र जैसी बड़ी एकीकृत परियोजनाओं के विकास का भी नेतृत्व किया, जिससे वैश्विक इस्पात बाजार में एस्सार की उपस्थिति मजबूत हुई।
एस्सार में शामिल होने से पहले, मेहरा ने भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात उद्योग में कई वरिष्ठ पदों पर कार्य किया।
उन्होंने स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड में कार्यकारी निदेशक और बाद में राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक के रूप में कार्य किया।
आरआईएनएल में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र के चालू होने का नेतृत्व किया, जो देश के इस्पात क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर परियोजना थी।
उद्योग में उनके आजीवन योगदान को मान्यता देते हुए, भारतीय इस्पात संघ ने उन्हें 2022 में लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया।
सहकर्मी और साथी अकसर उन्हें एक मार्गदर्शक और विचारक के रूप में मानते थे, जिन्होंने मार्गदर्शन, अनुशासन और प्रेरणा के माध्यम से पेशेवरों की कई पीढ़ियों को आकार देने में मदद की।
उनके निधन से इस्पात उद्योग में शोक की लहर दौड़ गई है, क्योंकि भारत अपने सबसे सम्मानित और प्रभावशाली लीडर्स में से एक को अंतिम विदाई दे रहा है।
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
कोविड के बाद दक्षिण कोरिया में बढ़ी देश की कुल प्रजनन दर, विवाह की संख्या में भी वृद्धि
सियोल, 25 फरवरी (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया में बीते 15 सालों में शिशुओं की संख्या में भारी बढ़ोत्तरी देखने को मिली है, जो साल 2020 में कोविड के बाद से बहुत ज्यादा है।
सरकारी आंकड़ों की मानें तो 2025 में जन्म लेने वाले शिशुओं की संख्या में पिछले 15 वर्षों में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई, जिससे देश की कुल प्रजनन दर चार वर्षों में पहली बार बढ़कर 0.8 हो गई।
आंकड़ों और सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल कुल 254,500 शिशुओं का जन्म हुआ, जो 2024 की तुलना में 6.8 प्रतिशत या 16,100 अधिक है। योनहाप समाचार एजेंसी के मुताबिक, मंत्रालय अगस्त में अंतिम आंकड़े जारी करेगा। माना यह भी जा रहा है कि साल 2010 के बाद शिशुओं की संख्या में दूसरी बार बढ़ोत्तरी देखी गई है। पहले साल 2010 में वृद्धि दर्ज की गई थी और 2025 में संख्या में बड़ा उछाल आया है।
देश की कुल प्रजनन दर इस बार 0.8 रही, जोकि पिछले साल की तुलना में 0.05 अधिक है। माना जा रहा है कि ये कुल प्रजनन दर में बढ़ोत्तरी की सीमा बीते चार वर्षो में ज्यादा बढ़ी है। मंत्रालय ने नवजात शिशुओं की संख्या में इस उछाल का कारण विवाहों में वृद्धि और 2021 से 30 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं की आबादी में निरंतर वृद्धि को बताया है, जो कि बच्चे पैदा करने की प्रमुख आयु वर्ग है।
मंत्रालय की तरह से कहा गया कि “कोविड-19 महामारी के कारण अपनी शादी टालने वाले जोड़ों के विवाह संपन्न होने से अप्रैल 2024 से पिछले वर्ष दिसंबर तक लगातार 21 महीनों तक विवाहों की संख्या में वृद्धि हुई। विवाह की संख्या के साथ बच्चों के जन्म की दर भी प्रभावित हुई है।
सरकारी अधिकारी पार्क ने यह भी कहा कि संतानोत्पत्ति के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में उल्लेखनीय बदलाव आया है। मंत्रालय के 2024 के नवीनतम द्विवार्षिक सर्वेक्षण में दो साल पहले की तुलना में विवाह के बाद संतानोत्पत्ति की इच्छा रखने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। उन्होंने आगे कहा कि विवाह से बाहर संतानोत्पत्ति के लिए इच्छुक लोगों का अनुपात भी बढ़ा है।
सरकारी विभाग को उम्मीद है कि यह आंकड़ा इस वर्ष 0.8 के स्तर से ऊपर रहेगा और 2031 में बढ़कर 1 तक पहुंच जाएगा। इसके अलावा, आंकड़ों से यह भी पता चला कि 2025 में मृत्यु दर में वार्षिक आधार पर 1.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 363,400 तक पहुंच गई, जिसके परिणामस्वरूप जनसंख्या में 110,000 की प्राकृतिक गिरावट आई।
--आईएएनएस
पीएस/एएस
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