बीएसएनएल निदेशक को वीआईपी ट्रीटमेंट मिलने पर बोले सिंधिया; यह अस्वीकार्य, 'कारण बताओ नोटिस जारी किया'
नई दिल्ली, 25 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को बीएसएनएल के एक निदेशक को वीआईपी ट्रीटमेंट मिलने को अनुचित और स्थापित नियमों का उल्लंघन बताते हुए कहा कि ऐसा आचरण अस्वीकार्य और चौंकाने वाला है और बताया कि इस कार्य के लिए अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में भारत संचार निगम लिमिटेड के निदेशक विवेक बंसल की प्रस्तावित यात्रा के लिए किए गए विस्तृत इंतजामों का खुलासा होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है।
मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए सिंधिया ने कहा कि यह घटना स्थापित नियमों और परंपराओं का उल्लंघन है।
सिंधिया ने पत्रकारों से कहा,“कल मीडिया ने मुझसे कुछ सवाल पूछे और मैंने साफ कर दिया है कि यह अनुचित है और स्थापित नियमों और परंपराओं का उल्लंघन है। यह मुझे बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। यह बेहद चौंकाने वाला है।”
उन्होंने आगे कहा,“निदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है और उन्हें सात दिन के भीतर जवाब देने को कहा गया है। हम उचित कार्रवाई करेंगे।”
सिंधिया ने आगे इस बात पर जोर दिया कि आज के दौर में अधिकारियों के लिए किसी भी प्रकार का रॉयल ट्रीटमेंट अकल्पनीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में दोषी पाए जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
उप महाप्रबंधक द्वारा जारी एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, यात्रा से जुड़े 21 अलग-अलग कार्यों के प्रबंधन के लिए दो दिनों में लगभग 50 कर्मचारियों को तैनात किया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, मिनट-दर-मिनट की योजना में नौका विहार, मंदिर दर्शन, त्रिवेणी संगम में स्नान और तौलिये, तेल, कंघी और यहां तक कि अंतर्वस्त्रों से युक्त स्नान किट की तैयारी शामिल थी।
अधिकारियों को सूट की व्यवस्था करना, तस्वीरें खींचना, परिवहन का प्रबंध करना और वाहनों में पानी की बोतलें, चॉकलेट, चिप्स और अन्य पेय पदार्थ रखना जैसे काम भी सौंपे गए थे।
इस निजी यात्रा से जुड़े दस्तावेज सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया और लोग इसकी खुलकर आलोचना कर रहे हैं। विवाद सामने आने के तुरंत बाद, बंसल की यात्रा रद्द कर दी गई।
बता दें, सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल ने पिछली तिमाही में 1,300 करोड़ रुपए से अधिक का घाटा दर्ज किया था। हालांकि, कंपनी का इसे लेकर कोई बयान सामने नहीं आया है।
--आईएएनएस
एबीएस/
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Air Ambulance Crash: 39 साल पुराना था झारखंड में क्रैश हुआ बीचक्राफ्ट विमान, 6600 घंटे भर चुका था उड़ान
Ranchi Air Ambulance Crash: झारखंड की राजधानी रांची के पास क्रैश हुई एयर एंबुलेंस को लेकर लगातार नए-नए खुलासे हो रहे हैं. अब बताया जा रहा है कि मंगलवार शाम को जो विमान क्रैश हुआ था वो 39 साल पुराना था. इस विमान ने 6600 घंटे से ज्यादा उड़ान भरी थी. इस हादसे में विमान में सवार सभी यात्रियों की जान चली गई थी.
मंगलवार शाम को क्रैश हुआ था विमान
बता दें कि सात सीटों वाला विमान 23 फरवरी की रात को झारखंड के चतरा जिले में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस विमान ने रांची से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी. जो एक मरीज को दिल्ली लेकर आ रहा था. मृतकों में मरीज संजय कुमार (41), एक डॉक्टर, एक पैरामेडिक, दो परिचारक, पायलट-इन-कमांड विवेक विकास भगत और फर्स्ट ऑफिसर सवराजदीप शामिल थे. विवेक विकास भगत के पास करीब 1,400 घंटे का उड़ान अनुभव था. जबकि फर्स्ट ऑफिसर सवराजदीप सिंह ने करीब 450 घंटे उड़ान भरी थी.
6600 घंटे से ज्यादा उड़ान भर चुका था प्लेन
एक अधिकारी ने बताया, "रेडबर्ड एयरवेज द्वारा संचालित यह विमान, बीचक्राफ्ट सी90ए (किंग एयर) ट्विन-टर्बोप्रॉप (पंजीकृत संख्या VT-AJV), 1987 में बनाया गया था. दुर्घटना के समय तक ये विमान लगभग 6,610 घंटे की उड़ान भर चुका था." अधिकारी ने आगे बताया कि इन आंकड़ों के अनुसार, विमान का अत्यधिक उपयोग नहीं किया गया था.
उन्होंने बताया, "इसमें पी एंड डब्ल्यू पीटी6ए-21 इंजन लगे थे और इसके बाएं इंजन ने लगभग 2,900 घंटे और दाएं इंजन ने लगभग 2,800 घंटे की उड़ान भरी थी."
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि, "दोनों प्रोपेलर लगभग 2,500 घंटे चल चुके थे, और इसका नवीनतम एयरवर्थनेस रिव्यू सर्टिफिकेट (ARC) इसी वर्ष 21 जनवरी को जारी किया गया था और एक वर्ष के लिए वैध था."
कब और कैसे हुआ हादसा?
दरअसल, मंगलवार यानी 23 फरवरी की शाम करीब 7.11 बजे विमान ने रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरी. लेकिन उड़ान भरने के कुछ देर बाद विमान का संपर्क एटीसी से टूट गया. एक अधिकारी के मुताबिक, चालक दल ने उड़ान भरने के तुरंत बाद मौसम संबंधी कारणों से उड़ान मार्ग में बदलाव की अनुमति मांगी थी. उन्होंने कहा, "उड़ान भरने के लगभग 23 मिनट बाद संचार और रडार संपर्क टूट गया. विमान बाद में चतरा जिले के सिमरिया के पास एक वन क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया."
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विमान में नहीं था ब्लैकबॉक्स
दुर्घटनाग्रस्त विमान का अधिकतम उड़ान भार 4,583 किलोग्राम था, और इसमें ब्लैक बॉक्स नहीं था, यानी इसमें कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) या डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (DFDR) नहीं था. अधिकारी ने बताया कि, "इस विमान में नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं (CAR) के अनुसार CVR और FDR स्थापित नहीं किए गए थे. विमान का पहला वायुयोग्यता प्रमाणपत्र (C of A) 1987 में जारी किया गया था. इसके मूल प्रमाणीकरण के समय CVR या FDR स्थापित करने की कोई अनिवार्य नियामक आवश्यकता नहीं थी."
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