यूपीआई पर एमडीआर लागू करने का प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में, लेकिन डिजिटल भुगतान व्यवस्था की लागत किसी को वहन करनी होगी: आरबीआई गवर्नर
मुंबई, 5 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) जैसी डिजिटल भुगतान व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए होने वाली लागत का भुगतान किसी न किसी को करना होगा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका बोझ जरूरी नहीं कि आम उपभोक्ताओं पर ही डाला जाए।
मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनसे यूपीआई ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) या कमीशन लगाए जाने की संभावनाओं को लेकर सवाल पूछा गया था। इस पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि इस विषय पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
संजय मल्होत्रा ने कहा, इस बारे में अभी कुछ कहना बहुत जल्दबाजी होगी। आने वाले घटनाक्रम का इंतजार करना चाहिए। आखिरकार लागत किसी न किसी को वहन करनी होती है, लेकिन जरूरी नहीं है कि इसका भार आम उपभोक्ताओं पर ही पड़े।
आरबीआई गवर्नर इससे पहले पिछले महीने भी कह चुके हैं कि डिजिटल भुगतान से जुड़ी आधारभूत संरचना (डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर) को बनाए रखने और विकसित करने की लागत को किसी न किसी रूप में पूरा करना आवश्यक है। हालांकि फिलहाल आम उपभोक्ताओं से शुल्क वसूलने को लेकर कोई औपचारिक प्रस्ताव या ढांचा मौजूद नहीं है।
इस बीच, वित्त मंत्रालय ने भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जिसका उद्देश्य भविष्य में 2,000 रुपए से अधिक मूल्य के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर व्यापारियों से शुल्क लेने की संभावनाओं के लिए कानूनी लचीलापन प्रदान करना है। हालांकि वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, सामान्य उपभोक्ताओं द्वारा किए जाने वाले नियमित यूपीआई भुगतान आगे भी निःशुल्क बने रहेंगे।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि दूध, सब्जी, किराना और अन्य रोजमर्रा की खरीदारी से जुड़े 90 प्रतिशत से अधिक ट्रांजैक्शन किसी भी संभावित एमडीआर शुल्क के दायरे में नहीं आएंगे। यानी आम लोगों के दैनिक भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगने की संभावना बहुत कम है।
वर्तमान में क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड के माध्यम से होने वाले ट्रांजैक्शन पर एमडीआर लागू होता है। हालांकि अधिकांश व्यापारी यह अतिरिक्त लागत सीधे ग्राहकों से नहीं वसूलते और स्वयं वहन करते हैं।
वित्त मंत्रालय ने भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम की धारा 10ए में संशोधन का प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत शून्य शुल्क से जुड़े कठोर प्रावधानों को हटाकर सरकार को भविष्य में विभिन्न डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क संबंधी अधिसूचना जारी करने की अधिक स्वतंत्रता देने की योजना है।
लोकसभा में पेश किए गए विधेयक के अनुसार, सरकार को यह तय करने का अधिकार मिलेगा कि कौन से डिजिटल भुगतान माध्यम शुल्क से मुक्त रहेंगे और किन पर भविष्य में एमडीआर लागू किया जा सकता है।
फिलहाल कानून के तहत बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को यूपीआई एवं रुपे डेबिट कार्ड जैसे अधिसूचित भुगतान माध्यमों पर किसी प्रकार का शुल्क लगाने की अनुमति नहीं है। प्रस्तावित संशोधन इस व्यवस्था में बदलाव का रास्ता खोल सकता है।
हालांकि सरकार और आरबीआई दोनों ने संकेत दिया है कि किसी भी संभावित बदलाव का उद्देश्य डिजिटल भुगतान प्रणाली को टिकाऊ बनाना है और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालना नहीं है। यूपीआई पर एमडीआर को लेकर अंतिम निर्णय भविष्य में परिस्थितियों और नीतिगत जरूरतों के आधार पर लिया जाएगा।
--आईएएनएस
डीबीपी
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Explainer: क्या अजित पवार की जगह ले पाएंगी डिप्टी CM सुनेत्रा? महाराष्ट्र में उनकी चुप्पी को लेकर कैसे गरमाती जा रही राजनीति
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में 6 महीने बाद फिर राजनीति उलथ पुथल शुरू हो गई है. साल की शुरुआत में एक दर्दनाक हादसा हुआ. प्लेन क्रैश में डिप्टी सीएम अजित पवार की मौत हो गई. यह हादसा महाराष्ट्र की राजनीति के लिए काला अध्याय साबित हुआ. उनकी जगह डिप्टी सीएम बनीं सुनेत्रा पर अब 6 महीने बाद सवाल उठने लगे हैं. राजनीति में उनकी चुप्पी या शांत स्वभाव कमजोरी बनने लगी है. कांग्रेस ने सुनेत्रा को चुप रहने पर गूंगी गुड़िया तक कह दिया. अब देखना होगा कि क्या सुनेत्रा पवार चुप्पी तोड़ेंगी या राजनीति में कुछ नया रंग देखने को मिलेगा. आइए विस्तार से समझते हैं.
बता दें कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता अजित पवार की 28 जनवरी 2026 को एक विमान हादसे में मौत हो गई. आजित पवार (दादा) की मौत से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में नेतृत्व पर काले बादल छा गए. बगावत की बू आने लगी. आनन फानन में अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को उनकी जगह डिप्टी सीएम बनाया गया. सहानुभूति के चलते पहली बार राजनीति में आईं सुनेत्रा को पार्टी ने स्वीकार कर लिया. हालांकि कई नेता बगावत के मूड में नजर आए थे.
कैसे शुरू हुई राजनीति?
सुनेत्रा पवार की चुप्पी को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है. विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया. कांग्रेस का दावा है कि वीडियो में एनसीपी नेता धनंजय मुंडे पत्रकारों के सवाल पर सुनेत्रा पवार को जवाब देने से रोकते नजर आ रहे हैं. इसके बाद कांग्रेस ने अपने पोस्ट में सुनेत्रा पवार को "गूंगी गुड़िया" कहकर निशाना बनाया. सुनेत्रा पवार बीड जिले की संरक्षक मंत्री भी हैं.
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब मसाजोग गांव के सरपंच संतोष देशमुख की हत्या का मामला सुर्खियों में है. इस केस में धनंजय मुंडे के करीबी सहयोगी वाल्मिक कराड मुख्य आरोपी हैं, जिसके चलते विपक्ष सरकार और एनसीपी पर लगातार सवाल उठा रहा है.
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कैसे अजित पवार का हुआ निधन?
जिला परिषद चुनाव प्रचार के लिए निकले अजित पवार की यात्रा बीच रास्ते में ही खत्म हो गई. महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता अजित पवार की 28 जनवरी 2026 को एक दर्दनाक विमान हादसे में मौत हो गई.
मुंबई से बारामती जा रहा उनका लियरजेट-45 (Learjet 45) विमान सुबह करीब 9 बजे बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार हो गया. एयरपोर्ट अधिकारियों के मुताबिक, विमान रनवे पर उतरते समय फिसल गया और दुर्घटनाग्रस्त हो गया. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि विमान असंतुलित होने के बाद उसमें आग लग गई और कुछ ही देर में वह पूरी तरह जल गया.
66 वर्षीय अजित पवार बारामती में जिला परिषद चुनाव के लिए चार जनसभाओं को संबोधित करने वाले थे. लेकिन अपनी राजनीतिक कर्मभूमि पहुंचने से पहले ही यह हादसा हो गया, जिसने महाराष्ट्र की राजनीति को गहरा झटका दिया.
सुनेत्रा के सामने क्या हैं चुनौतियां?
अजित पवार के निधन के बाद डिप्टी सीएम का पद तो सुनेत्रा ने संभाल लिया लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सुनेत्रा पवार एनसीपी की कमान संभाल पाएंगी? उनके सामने सिर्फ सरकार में जिम्मेदारी निभाने की नहीं, बल्कि पार्टी को एकजुट रखने और राजनीतिक नेतृत्व साबित करने की भी बड़ी चुनौती है.
सबसे पहले उन्हें एनसीपी (अजित गुट) के 41 विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को एक साथ बनाए रखना होगा, ताकि पार्टी में किसी तरह की टूट-फूट न हो. इसके अलावा, सुनेत्रा पवार का अब तक का राजनीतिक अनुभव मुख्य रूप से राज्यसभा तक सीमित रहा है. महाराष्ट्र की जमीनी और आक्रामक राजनीति में उन्हें अभी खुद को साबित करना होगा, जहां अजित पवार की मजबूत पकड़ मानी जाती थी.
इसी बीच, शरद पवार के गुट के साथ एनसीपी के संभावित विलय की चर्चाएं भी तेज हो सकती हैं. ऐसे में सुनेत्रा पवार को पार्टी के भविष्य, संगठन की दिशा और राजनीतिक रणनीति पर बड़े फैसले लेने होंगे. उनकी अगली चाल ही तय करेगी कि एनसीपी आगे किस दिशा में जाएगी.
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अगर चुप्पी साधे रहीं सुनेत्रा तो...
सुनेत्रा पवार करीब 6 महीने से डिप्टी सीएम के पद पर हैं. पति अजित पवार की मृत्यू के चलते उन्हें यह कुर्सी मिली थी. शुरुआत से ही एनसीपी के कई नेता इस फैसले के पक्ष में नहीं थे. लेकिन सहानुभूति के चलते किसी ने खुलकर विरोध नहीं किया न पक्ष न विपक्षा ने. अब कई महीने बीत जाने के बाद विपक्ष ने सुनेत्रा के कामकाज पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. अभी तक के कार्यकाल में सुनेत्रा का कोई एक्शन, बयान या फैसला चर्चा का विषय नहीं बना है. सुनेत्रा शांति से पद पर हैं. पत्रकार के सवाल पूछने से रोकने से कांग्रेस को मुद्दा उठाने का मौका मिल गया.
अगर सुनेत्रा ने चुप्पी तोड़ दी तो....
अगर सुनेत्रा ने अपनी चुप्पी वाली इमेज नहीं बदली तो कांग्रेस आए दिन सुनेत्रा को आड़े हाथों लेती रहेगी. आरोपों और जुबानी राजनीति का काउंटर न करने की वजह से सुनेत्रा की पार्टी के कई नेता बागी हो सकते हैं.
जबकि अगर सुनेत्रा पवार ने चुप्पी तोड़ी और राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत कर ली. तो वह बड़ी आसानी ने अपनी पहचान बना सकती हैं. बीजेपी का रुख पहले से ही सुनेत्रा की तरफ नरम है, एनसीपी अजित पवार के चलते सुनेत्रा के साथ है. अगर सुनेत्रा एक्शन में आती हैं तो कांग्रेस को भी मुंहतोड़ जवाब मिलेगा. अभी तक बेदाग छवि वाली सुनेत्रा का काउंटर करना कांग्रेस के लिए डेढ़ी खीर साबित हो जाएगा.
शरद पवार ने हटाए पुराने प्रवक्ता
महाराष्ट्र की राजनीति में एक साथ कई मोर्चों पर हलचल तेज हो गई है. एक तरफ शरद पवार की एनसीपी ने अपने सभी मौजूदा प्रवक्ताओं की नियुक्ति रद्द कर संगठन में बड़ा बदलाव किया है. वहीं दूसरी ओर राज ठाकरे के सिद्धिविनायक मंदिर के दान-चढ़ावे में कथित गड़बड़ी को लेकर दिए गए बयान ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है. इसी बीच कांग्रेस और अजित पवार गुट के नेताओं के बीच व्यक्तिगत टिप्पणियों को लेकर जुबानी हमला भी तेज हो गया है. इन घटनाओं के बाद महाराष्ट्र की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है.
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