Price Hike: महंगा होने जा रहा है OnePlus 15R; मार्च से लागू हो सकती है नई कीमतें, जानें अब कितना होगा दाम
OnePlus 15R Price Hike In India: वनप्लस के ग्राहकों के लिए एक बुरी खबर है। दिसंबर 2025 में लॉन्च हुए वनप्लस 15R की कीमतों में कंपनी जल्द ही बढ़ोतरी कर सकती है। टेक जगत के जानकारों के मुताबिक, मार्च महीने से इस स्मार्टफोन का मार्केट ऑपरेटिंग प्राइस (MOP) बदल जाएगा, जिससे ग्राहकों को अब इस फोन के लिए अधिक कीमत चुकानी होगी।
3000 से 4000 रुपये तक की होगी बढ़ोतरी
टिपस्टर अभिषेक यादव के सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार, वनप्लस 15R के दोनों वेरिएंट्स की कीमतों में संशोधन किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि बेस वेरिएंट, जिसमें 12GB रैम और 256GB स्टोरेज मिलती है, उसकी कीमत अब बढ़कर 51,999 रुपये हो सकती है। वहीं, 12GB रैम और 512GB स्टोरेज वाले टॉप वेरिएंट की कीमत 56,999 रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। गौरतलब है कि लॉन्च के समय इनकी कीमतें क्रमश: 47,999 रुपये और 52,999 रुपये रखी गई थीं।
Hearing from sources: OnePlus may increase the OnePlus 15R price starting March 1.
— Abhishek Yadav (@yabhishekhd) February 24, 2026
Not officially confirmed yet — currently verifying with multiple retailers and market channels.
If this gets confirmed, it would be a very early price revision post-launch.
Would you buy before… pic.twitter.com/u0pKByTnbK
क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
स्मार्टफोन की कीमतों में इस अचानक उछाल का मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर मेमोरी कंपोनेंट्स (रैम और स्टोरेज चिप्स) की कमी को माना जा रहा है। इससे पहले वनप्लस 13R की तुलना में 15R को पहले ही 5,000 रुपये महंगा लॉन्च किया गया था। अब मार्च से होने वाली यह नई बढ़ोतरी उन ग्राहकों के लिए एक झटका है जो सेल या ऑफर्स का इंतजार कर रहे थे। फिलहाल उपलब्ध बैंक ऑफर्स (HDFC और Axis Bank) के जरिए ग्राहक इसे कुछ डिस्काउंट पर खरीद सकते हैं, लेकिन 1 मार्च से प्रभावी होने वाली नई दरें इस फायदे को कम कर देंगी।
बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
वनप्लस 15R का सीधा मुकाबला हाल ही में लॉन्च हुए iQOO 15R से है। वनप्लस का यह हैंडसेट अपनी परफॉरमेंस और फ्लैगशिप जैसे फीचर्स के लिए जाना जाता है। जानकारों का मानना है कि कीमत बढ़ने के बावजूद यह फोन उन लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प बना रहेगा जो प्रीमियम फ्लैगशिप बजट तक नहीं जाना चाहते, लेकिन बेहतरीन अनुभव चाहते हैं। हालांकि, बढ़ी हुई कीमतें इसे मिड-प्रीमियम सेगमेंट में थोड़ा महंगा बना सकती हैं।
जापान की संसद में AI इंजीनियरों की एंट्री:टी-शर्ट व पोनीटेल वाले नेता चर्चा में, कहते हैं राजनीति से सुस्ती दूर कर देंगे; ‘टीम मिराई’ ने 11 सीटें जीतीं, 30 लाख वोट भी
जापान की संसद में इन दिनों एक शख्स चर्चा में है... ताकाहिरो एनो। 35 साल के एनो सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और राजनीतिक पार्टी ‘टीम मिराई’ के प्रमुख नेता हैं। टीम मिराई यानी भविष्य की टीम। पार्टी को टेक इंजीनियर्स ने बनाया है। हाल के चुनावों में सबको चौंकाते हुए जापान की संसद (निचले सदन) में पार्टी ने 11 सीटें जीतीं। पार्टी ने राजनीतिक दिग्गजों को पछाड़कर 30 लाख वोट भी अपने खाते में बटोरे हैं, जबकि सिर्फ 14 ही प्रत्याशी उतारे थे। एनो कहते हैं,‘एआई आग की तरह है, जो सभ्यता को पूरी तरह बदल देगा। जहां पश्चिमी देश इस एआई को ‘टर्मिनेटर’ जैसा खतरनाक मानकर डरते हैं, वहीं जापान के लोग इसे ‘डोरेमोन’ जैसा मददगार और प्यारा दोस्त समझते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि टीम मिराई की जीत की वजह उनका ‘प्रैक्टिकल’ होना है। उनका तरीका ‘न वामपंथी है, न दक्षिणपंथी’। जापान फोरसाइट के संस्थापक टोबियस हैरिस के अनुसार, वे सिर्फ समस्याओं को हल करने पर ध्यान देते हैं। उन्होंने लोकलुभावन वादों के बजाय जटिल मुद्दों को सुलझाने की बात की। 40 से 50 की उम्र के शहरी मतदाताओं ने उन्हें हाथों-हाथ लिया। जीते उम्मीदवारों में टोक्यो और बर्कले जैसे बड़े संस्थानों के पढ़े एक्सपर्ट और आईबीएम-सोनी के पूर्व कर्मचारी शामिल हैं। सिलिकॉन वैली में इंजीनियर रहे नवनिर्वाचित सांसद आओई फुरुकावा, कहते हैं,‘कोडिंग और कानून बनाना एक जैसा है, क्योंकि दोनों के लिए तर्क और सटीक संरचना की जरूरत होती है।’ प्रस्ताव समझाने के लिए चैटबॉट, 39 हजार सवालों के जवाब दिए टीम मिराई की कार्यशैली की झलक वादों में भी दिखी। इन्होंने चुनाव जीतने के हाई-टेक समाधानों पर जोर दिया। ड्राइवरलेस बसें लाना, राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता के लिए डिजिटल डेटाबेस बनाना, ताकि भ्रष्टाचार रुके। AI के जरिए सरकारी खर्चों में कमी करके मध्यम वर्ग को पेंशन व स्वास्थ्य बीमा में राहत जैसे वादे किए। पार्टी ने प्रस्ताव समझाने के लिए चैटबॉट भी शुरू किया। इसने 39 हजार सवालों के जवाब दिए और 6,200 से ज्यादा सुझाव जुटाए। बड़ी चुनौती संसद तक तो इंजीनियर्स पहुंच गए, लेकिन असली जंग अब शुरू हुई है। जापान की नौकरशाही आज भी ‘फैक्स मशीन’, ‘फ्लॉपी डिस्क’ और कागज के ढेरों पर टिकी है। संसद के कई कमरों में लैपटॉप और टैबलेट ले जाने पर पाबंदी है। बोर्ड पर ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ व ‘मशीन लर्निंग’ जैसे शब्द लिखने वाले इन युवा सांसदों को अब उन बुजुर्ग नेताओं के साथ काम करना होगा जो अब भी डिजिटल युग से दूर हैं। टीम मिराई का नारा है... सुस्त राजनीति को तेज बनाओ... इसने राजनीति के गलियारों में हलचल मचा दी है। आमतौर पर सफेद शर्ट और फॉर्मल सूट में दिखने वाले जापानी राजनेताओं के बीच अब ‘लाइन्स ऑफ कोड’ लिखी टी-शर्ट, पोनीटेल और इंडिगो सूट वाले चेहरे दिखने लगे हैं। संकेत साफ हैं कि भविष्य की राजनीति कोड, चैटबॉट व डेटा के सहारे भी लिखी जा सकती है।
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