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ट्रम्प आज अमेरिकी संसद को संबोधित करेंगे:ईरान-गाजा और टैरिफ पर बयान दे सकते हैं; एपस्टीन सेक्स स्कैंडल की कई पीड़ित शामिल होंगी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आज अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में दूसरे कार्यकाल का दूसरा ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ भाषण देंगे। इस दौरान वे ईरान और गाजा के हालात के साथ-साथ टैरिफ के मुद्दे पर भी बयान दे सकते हैं। उनके भाषण के दौरान जेफ्री एपस्टीन सेक्स स्कैंडल की कई पीड़िताएं भी संसद में मौजूद रहेंगी। इन्हें विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद चक शूमर, एमिली रैंडल, टेरेसा लेगर फर्नांडीज, जैमी रास्किन और सुहास सुब्रमण्यम ने इनवाइट किया है। ट्रम्प और एपस्टीन में लंबे समय तक दोस्ती थी, हालांकि ट्रम्प कई बार कह चुके हैं कि उन्हें एपस्टीन के किसी गलत काम की जानकारी नहीं थी। ट्रम्प का संबोधन सुबह 7:30 बजे शुरू होगा। इस जॉइंट सेशन में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (निचला सदन) मेंबर, सीनेट (ऊपरी सदन) मेंबर, सुप्रीम कोर्ट के जज और राष्ट्रपति की कैबिनेट मौजूद रहती है। इस भाषण में राष्ट्रपति देश के मौजूदा हालात और अपनी सरकार की आगे की योजनाओं के बारे में बताते हैं। ट्रम्प टैरिफ नीति को देश की सुरक्षा से जोड़ सकते हैं इस बार भाषण की थीम 'अमेरिका एट 250: स्ट्रॉन्ग, प्रॉस्पेरस एंड रिस्पेक्टेड' रखी गई है। CNN के मुताबिक अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ट्रम्प के कुछ टैरिफ पर रोक लगा दी थी। इसके बाद उन्होंने सीमित समय के लिए नया टैरिफ लागू किया है। हो सकता है वे इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के लिए जरूरी कदम बता सकते हैं। ट्रम्प विदेश नीति पर भी खुलकर बोल सकते हैं। ईरान को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है और गाजा में हालात को लेकर भी अमेरिका की भूमिका चर्चा में है। ट्रम्प खुद को मजबूत नेता के तौर पर पेश करते हुए कह सकते हैं कि सख्त रुख ही शांति का रास्ता है। यूक्रेन युद्ध भी चर्चा में रहेगा। रूस के हमले को चार साल पूरे हो गए हैं। चुनाव प्रचार के दौरान ट्रम्प ने कहा था कि वह एक दिन में युद्ध खत्म कर देंगे, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है। इमिग्रेशन भी उनका प्रमुख मुद्दा रहेगा। सत्ता में लौटने के बाद उन्होंने बड़े पैमाने पर डिपोर्ट ऑपरेशन चलाया और दक्षिणी बॉर्डर पर सख्ती बढ़ाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रम्प ने 13 महीनों में लगभग 240 एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए हैं। फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट के बाद इतने कम समय में इतने ज्यादा आदेश किसी राष्ट्रपति ने जारी नहीं किए। ट्रम्प किन किन मुद्दों पर भाषण दे सकते हैं… हर साल जनवरी या फरवरी में ये भाषण होता है अमेरिका में राष्ट्रपति हर साल जनवरी या फरवरी में कांग्रेस (संसद) को एक संबोधित करते हैं, जिसे 'स्टेट ऑफ द यूनियन' कहा जाता है। स्टेट ऑफ द यूनियन के दिन संसद की प्रतिनिधि सभा (निचला सदन) और सीनेट (ऊपरी सदन) के सदस्य हाउस चैंबर में इकट्ठा होते हैं। स्पीकर ऑफ द हाउस और उपराष्ट्रपति जो सीनेट के अध्यक्ष भी होते हैं, राष्ट्रपति के पीछे ऊंचे मंच पर बैठते हैं। जब राष्ट्रपति संसद में पहुंचते हैं तो हाउस के सार्जेंट-एट-आर्म्स उनके आने की घोषणा करते हैं। इसके बाद स्पीकर राष्ट्रपति का परिचय कराते हैं और राष्ट्रपति कांग्रेस को अपना भाषण देते हैं। कैबिनेट का एक मेंबर कार्यक्रम में शामिल नहीं होता एक परंपरा के मुताबिक राष्ट्रपति के कैबिनेट का एक सदस्य इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होता। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि अगर कोई बड़ी दुर्घटना हो जाए और राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और बाकी कैबिनेट सदस्य की मौत हो जाएं, तो जो सदस्य कार्यक्रम में नहीं आया है वह राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभाल सके। राष्ट्रपति अपने भाषण के लिए कुछ खास अमेरिकी नागरिकों को भी बुलाते हैं। इन लोगों को इसलिए आमंत्रित किया जाता है क्योंकि उन्होंने कोई असाधारण काम किया होता है। भाषण के दौरान राष्ट्रपति उनका परिचय कराते हैं और सम्मानित करते हैं। स्टेट ऑफ द यूनियन संदेश के बाद विपक्षी पार्टी की ओर से एक जवाबी भाषण दिया जाता है। इसमें विपक्ष के नेता राष्ट्रपति की बातों पर अपनी राय रखते हैं और देश को बेहतर बनाने के लिए अलग सुझाव देते हैं। इसे पहले 'एनुअल मैसेज' कहा जाता था स्टेट ऑफ द यूनियन की परंपरा अमेरिकी संविधान से जुड़ी है। संविधान के अनुच्छेद 2 में लिखा है कि राष्ट्रपति समय-समय पर कांग्रेस को देश के हालात की जानकारी देंगे और जरूरी कदमों की सिफारिश करेंगे। शुरुआत में इस भाषण को 'एनुअल मैसेज' कहा जाता था। जॉर्ज वॉशिंगटन से लेकर हर्बर्ट हूवर तक सभी राष्ट्रपति इसे इसी नाम से बुलाते थे। फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट पहले राष्ट्रपति थे जिन्होंने अपने 1941 के भाषण में इसे ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ कहा। हालांकि उनका यह भाषण ‘फोर फ्रीडम्स’ नाम से ज्यादा फेमस है। संविधान में यह नहीं बताया गया है कि यह संदेश कब और कैसे दिया जाए, लेकिन परंपरा के तौर पर राष्ट्रपति हर साल एक बार यह भाषण देते हैं। पहले यह भाषण आमतौर पर दिसंबर में दिया जाता था, लेकिन 1934 के बाद से इसे जनवरी या फरवरी में दिया जाने लगा। साल 2022 में जो बाइडेन मार्च महीने में व्यक्तिगत रूप से यह भाषण देने वाले पहले राष्ट्रपति बने थे। उन्होंने 2024 में भी ऐसा ही किया। पिछले साल डोनाल्ड ट्रम्प ने भी कांग्रेस के संयुक्त सत्र में इसी तरह का संबोधन दिया था। थॉमस जेफरसन ने लिखित संदेश भेजे थे एक समय ऐसा भी था जब ये स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण के रूप में नहीं बल्कि लिखित रूप में भेजा जाता था। जॉर्ज वॉशिंगटन (1789-1797) और जॉन एडम्स (1797-1801) ने कांग्रेस के सामने जाकर भाषण दिया था, लेकिन थॉमस जेफरसन (1801-1809) ने लिखित संदेश भेजने की परंपरा शुरू की। माना जाता है कि वह अच्छे वक्ता नहीं थे। इसके बाद 1913 तक राष्ट्रपति लिखित संदेश ही भेजते रहे। फिर वुडरो विल्सन (1913-1921) ने दोबारा कांग्रेस के जॉइंट सेशन को संबोधित करने की परंपरा शुरू की। फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट के बाद से ज्यादातर राष्ट्रपति भाषण देकर ही अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाते हैं। दो राष्ट्रपति ऐसे रहे जो यह भाषण नहीं दे पाए। विलियम हेनरी हैरिसन की 1841 में बीमारी से मौत हो गई थी और जेम्स गारफील्ड की 1881 में एक हमले में मृत्यु हो गई थी। इसलिए दोनों अपने कार्यकाल में स्टेट ऑफ द यूनियन नहीं दे सके। रॉनल्ड रीगन ने 1981 में अपने पहले संबोधन को स्टेट ऑफ द यूनियन नहीं कहा था। उन्होंने इसे ‘एड्रेस बिफोर अ जॉइंट सेशन ऑफ कांग्रेस’ नाम दिया। उनके बाद आने वाले सभी राष्ट्रपतियों ने अपने पहले साल के भाषण को स्टेट ऑफ द यूनियन नहीं कहा। समय के साथ भाषण की लंबाई बदलती रही भाषण की लंबाई भी समय के साथ अलग-अलग रही है। जॉर्ज वॉशिंगटन का भाषण सबसे छोटा था, जिसमें केवल 1089 शब्द थे। रिचर्ड निक्सन का 1972 का भाषण सबसे कम समय का था, जो करीब 29 मिनट चला। जिमी कार्टर का 1981 का लिखित संदेश सबसे लंबा था, जिसमें 33667 शब्द थे। यह आखिरी बार था जब स्टेट ऑफ द यूनियन लिखित रूप में दिया गया। समय के साथ इन भाषणों की भाषा भी आसान हो गई है। पहले राष्ट्रपति कठिन और हाई लेवल की भाषा में बोलते थे, लेकिन अब आम लोगों को ध्यान में रखकर सरल भाषा का इस्तेमाल किया जाता है। हैरी ट्रूमैन ने 1947 में पहली बार टीवी पर भाषण दिया तकनीक के कारण इन भाषणों को सुनने और देखने के तरीके बढ़े हैं। कैल्विन कूलिज पहले राष्ट्रपति थे जिनका संदेश 1923 में रेडियो पर प्रसारित हुआ। हैरी ट्रूमैन का भाषण 1947 में पहली बार टेलीविजन पर दिखाया गया। बिल क्लिंटन का भाषण 1997 में इंटरनेट पर प्रसारित हुआ। इसके बावजूद दर्शकों की संख्या बढ़ने के बजाय कम हुई है। 1993 में लगभग 6.7 करोड़ लोगों ने क्लिंटन का भाषण देखा था, जबकि पिछले साल ट्रम्प का भाषण करीब 3.66 करोड़ लोगों ने देखा। इतिहास में कई अहम घोषणाएं इसी मंच से की गई हैं। जेम्स मुनरो ने 1823 में मुनरो डॉक्ट्रिन की घोषणा की थी। थियोडोर रूजवेल्ट ने 1904 में इसमें अपना संशोधन जोड़ा। फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट ने 1941 में 'फोर फ्रीडम्स' पेश किया। जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने 2002 में 'एक्सिस ऑफ ईविल' शब्द का इस्तेमाल किया था।

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रिलेशनशिप एडवाइज- पार्टनर चैट्स का स्क्रीनशॉट रखता है:झगड़े में पुरानी बातें ले आता है, फिर सबूत दिखाता है, क्या ये रेड फ्लैग है?

सवाल- मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन कर रही हूं। एक साल से रिलेशनशिप में हूं। मेरा बॉयफ्रेंड मेरी हर बात का रिकॉर्ड रखता है, चैट के स्क्रीनशॉट रखता है। मैंने कब क्या कहा, कैसे कहा, सबकुछ। फिर जब भी हमारे बीच झगड़ा होता है, वो पुराने चैट्स निकालकर दिखाने लगता है। जब पहली बार उसने चैट का स्क्रीनशॉट दिखाया तो मुझे बहुत शॉक लगा था। क्या ये बिहेवियर नॉर्मल है, क्या ये ट्रस्ट की कमी है या मैं जरूरत से ज्यादा सेंसिटिव हूं? मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा है कि मैं क्या करूं? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- सबसे पहले तो शुक्रिया कि आपने अपनी भावनाओं को शब्दों में इतने अच्छे से व्यक्त किया। कॉलेज लाइफ में रिश्ते की इतनी गहरी समझ होना और ये सवाल पूछना आसान नहीं होता। ज्यादातर लड़कियां ऐसे मामलों में खुद को ही दोष देती रहती हैं, लेकिन आपने सवाल किया यानी आप सजग हैं। ये अपने आप में बहुत बड़ी बात है। आपका सवाल पार्टनर की सिर्फ एक आदत को लेकर नहीं है। यह सवाल इमोशनल सेफ्टी और उस भरोसे को लेकर है, जो किसी भी रिलेशनशिप की बुनियाद है। इसलिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आप जो महसूस कर रही हैं, वह न तो छोटी बात है और न ही आप ओवर-सेंसिटिव हैं। आपकी फीलिंग्स पूरी तरह वैलिड हैं। रिश्ते में अगर हर बात पर सबूत मांगे जाएं, तो अविश्वास पैदा हो सकता है। चलिए, इस समस्या को स्टेप-बाई-स्टेप समझते हैं और देखते हैं कि आप क्या कर सकती हैं। हर बात का रिकॉर्ड रखना हेल्दी नहीं है अगर कोई पार्टनर बातचीत के स्क्रीनशॉट संभालकर रखता है और झगड़े के समय उन्हें दिखाता है, तो यह हेल्दी पैटर्न नहीं है। रिकॉर्ड्स कोर्टरूम में जरूरी होते हैं क्योंकि वहां जज को सच और झूठ तय करने के लिए सबूत चाहिए। लेकिन ये समझना चाहिए कि रिश्ता कोर्टरूम नहीं है। इसलिए इसमें सबूत नहीं, समझ, भरोसा और भावनाओं की जरूरत होती है। इस तरह का बिहेवियर टॉक्सिक हो सकता है। इसके सभी संकेत ग्राफिक में देखिए- रिकॉर्ड रखने का पार्टनर पर क्या असर पड़ता है? ऐसे रिश्ते में इंसान पर अक्सर ये तीन भावनाएं हावी हो जाती हैं। यह टॉक्सिक रिलेशनशिप का संकेत हो सकता है, अगर आपको लग रहा है कि- ऐसे मामलों में अक्सर लड़कियां खुद को कमतर महसूस करने लगती हैं। उन्हें ऐसा लगता है, जैसे हर बात एक टेस्ट है, जहां फेल होने पर पुराने पेपर निकालकर दिखाए जाते हैं। ये न सिर्फ गुस्सा बढ़ाता है, बल्कि रिश्ते की खुशी को भी छीन सकता है। इसके सभी साइकोलॉजिकल इफेक्ट ग्राफिक में देखिए- क्या यह सिर्फ ट्रस्ट इश्यू है? अक्सर लोग ऐसी सिचुएशन को सीधे ट्रस्ट इश्यू कह देते हैं, जबकि यह इससे ज्यादा गहरी बात है। पार्टनर के ऐसे बिहेवियर के पीछे उसका कोई ट्रॉमा, पास्ट रिलेशनशिप या परवरिश हो सकती है। ऐसे लोग अक्सर खुद को सुरक्षित रखने के लिए हर चीज डॉक्यूमेंट करने लगते हैं। यह उनका डिफेंस मेकेनिज्म हो सकता है। पार्टनर के ऐसे बिहेवियर के पीछे के सभी संभावित कारण ग्राफिक में देखिए- आपको क्या करना चाहिए? भले ही पार्टनर की ऐसी आदतों के पीछे उसकी जिंदगी के पुराने अनुभव हों, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपको ऐसे व्यवहार को सहन करना चाहिए। किसी की इनसिक्योरिटी को समझना इंसानियत है, लेकिन उसी इनसिक्योरिटी की कीमत पर अपनी मानसिक शांति गंवाना समझदारी नहीं है। आप दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ रही हैं, आपकी जिंदगी में पढ़ाई, दोस्त, करियर भी महत्वपूर्ण हैं। रिश्ता ऐसा होना चाहिए, जो आपको सपोर्ट करे, न कि बोझ बन जाए। पार्टनर को काउंसलिंग की जरूरत अगर कोई इंसान रिश्ते में रहते हुए भी हर बात का रिकॉर्ड रखने की जरूरत महसूस करता है, तो यह संकेत है कि उसके अंदर डर और अविश्वास जैसी भावनाएं बहुत गहरे बैठी हैं। इसके लिए उसे प्रोफेशनल हेल्प और काउंसलिंग की जरूरत है। काउंसलिंग के दौरान सपोर्ट करें, लेकिन दोस्त की तरह यहां आपको एक अहम बात समझनी होगी कि आप पार्टनर को सपोर्ट कर सकती हैं। आप यह कह सकती हैं कि आप उसकी तकलीफ को समझ रही हैं। आप उसे काउंसलिंग लेने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं। लेकिन सपोर्ट का मतलब यह बिल्कुल नहीं होता है कि आप रिश्ते में रहकर खुद तकलीफ सहती रहेंगी। सपोर्ट करना है तो दोस्त बनकर किया जा सकता है। पार्टनर बनकर खुद की जिंदगी खराब करना, सपोर्ट नहीं कहलाता। बाउंड्री तय करना जरूरी आपको साफ-साफ यह कहना होगा कि झगड़े में पुरानी चैट्स निकालना आपको असहज करता है। यह तरीका आपको सुरक्षित महसूस नहीं कराता और आप रिश्ते में इस पैटर्न को नहीं सहन करेंगी। बाउंड्री रखने का मतलब रिश्ता खत्म करना नहीं होता। इसका मतलब है कि आप अपनी सेफ्टी तय कर रही हैं। अगर पैटर्न न बदले तो क्या करें? अगर पार्टनर आपकी फीलिंग्स को बार-बार नजरअंदाज करे, आपको ही ओवर-सेंसिटिव कहे, हर बार सबूत से चुप कराने की कोशिश करे तो आपको खुद से एक ईमानदार सवाल पूछना होगा- क्या मैं इस रिश्ते में खुद को मानसिक रूप से सुरक्षित महसूस करती हूं? रिलेशनशिप के मजबूत और स्थाई होने के लिए जरूरी है कि कोई इंसान खुद को कमतर न महसूस करे। दोनों एक-दूसरे को बराबरी पर आकें। रेड फ्लैग कैसे पहचानें? अगर पार्टनर बदलने को तैयार नहीं है, तो यह रेड फ्लैग है। यह रिश्ते को री-इवैल्यूएट करने का समय है। रेड फ्लैग की पूरी लिस्ट ग्राफिक में देखें- रिश्ते में भरोसा जरूरी रिश्ते भरोसे से चलते हैं, डॉक्यूमेंटेशन से नहीं। जहां हर बात का रिकॉर्ड रखना पड़े, वहां लोग दिल खोलकर नहीं बोल पाते हैं। आपका असहज महसूस करना जायज है। आपकी भावनाएं वैलिड हैं। सबसे जरूरी बात ये है कि किसी को ठीक करने की कोशिश में खुद को परेशानी में डालना प्यार नहीं है। ……………… ये खबर भी पढ़िए रिलेशनशिप एडवाइज- शादी-बच्चे की जिम्मेदारियों में फंस गई हूं: मुझे पर्सनल स्पेस चाहिए, लेकिन हसबैंड समझते नहीं, क्या मैं गलत हूं? हिंदुस्तान से लेकर जॉर्जिया तक औरतें ये करना चाहती हैं। लेकिन बहुत कम में यह हिम्मत होती है कि वो आपकी तरह सवाल लिखकर अपने दिल की बात कहें। आपका सवाल ही बता रहा है कि आप एक संजीदा इंसान हैं। आप खुद को जानने-समझने की यात्रा तय करना चाहती हैं। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। आगे पढ़िए…

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टी20 वर्ल्ड कप के बीच ईशान किशन का धमाका, टॉप-5 में मारी एंट्री; बुमराह ने भी लगाई लंबी छलांग

ishan kishan 5th place latest icc t20i rankings update: जिम्बाब्वे के खिलाफ 'करो या मरो' के मुकाबले से पहले आईसीसी की ताजा टी20 रैंकिंग में ईशान किशन दुनिया के नंबर-5 बल्लेबाज बन गए. जबकि जसप्रीत बुमराह ने टॉप-10 गेंदबाजों में वापसी की है. हालांकि, खराब फॉर्म से जूझ रहे तिलक वर्मा और रिंकू सिंह की जगह प्लेइंग XI में संजू सैमसन की एंट्री लगभग तय मानी जा रही है. चेन्नई की टर्निंग पिच पर कप्तान सूर्यकुमार यादव बड़े बदलावों के साथ उतरने को तैयार हैं, जहां दुनिया के नंबर-1 ऑलराउंडर सिकंदर रजा की जिम्बाब्वे टीम से कड़ी चुनौती मिलेगी. Wed, 25 Feb 2026 22:07:50 +0530

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