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Israel Election Countdown: ऐसा क्या हुआ? जीतकर भी PM नहीं बन पाएंगे नेतन्याहू! सत्ता परिवर्तन से गाजा को मिलेगी राहत या आएगी और बड़ी आफत

27 अक्टूबर 2026 इजराइल के इतिहास का एक ऐसा मोड़ जिस पर आज पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई है। यह सिर्फ एक आम चुनाव नहीं है बल्कि दुनिया के सबसे अनुभवी और कद्दावर राजनेताओं में से एक बेंजामिन नेतन्याहू के पूरे राजनीतिक जीवन की सबसे अनोखी परीक्षा है। एक ऐसा नेता जिसने हर संकट से देश को निकालने का दावा किया। आज इजराइल के ही एक अनोखे राजनीतिक चक्रव्यूह में वह घिरा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स एक बेहद दिलचस्प संभावना की तरफ इशारा कर रही हैं कि नेतन्याहू की पार्टी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर तो सकती है लेकिन इजराइल के पेंचीदा चुनावी गणित और गठबंधन की शर्तों के कारण शायद शायद सत्ता की चाबी उनके हाथ से फिसल जाए। जीत की दहलीज पर खड़े होकर भी सरकार बनाने का यह रास्ता इतना मुश्किल क्यों हो गया है? वो कौन सा एक नया कानून और अंदरूनी खींचतान है जिसने इस पूरी चुनावी बाजी को एक सस्पेंस थ्रिलर बना दिया है? क्या इस बार इजराइल में एक नया इतिहास लिखा जाएगा या राजनीति का यह सबसे बड़ा खिलाड़ी कोई नया समीकरण बिठा लेगा। 


इजरायल का चुनावी सिस्टम भारत से कितना अलग?


इस पूरे गणित को समझने के लिए पहले हमें इजराइल के चुनावी सिस्टम को समझना होगा जो भारत या अमेरिका से बिल्कुल अलग है। इजराइल में जनता किसी एक प्रधानमंत्री उम्मीदवार को सीधा वोट नहीं देती। वहां लोग पार्टियों को वोट देते हैं। संसद में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़ा है 61 सीटों का। इजराइल के इतिहास में आज तक किसी भी सिंगल पार्टी को अकेले 61 सीटें नहीं मिली हैं। इसका मतलब इसका मतलब है कि वहां हमेशा खिचड़ी सरकार यानी गठबंधन वाली गवर्नमेंट होती है। नेतन्याहू इसी गठबंधन के सबसे बड़े खिलाड़ी हैं। वो छोटी-छोटी कट्टरपंथी और दक्षिणपंथी पार्टियों को मिलाकर किसी तरह 61 वाला आंकड़ा जुटा लेते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स कहती है इस बार इसी दक्षिणपंथी वोट बैंक में एक बहुत बड़ी दरार आ चुकी है।

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नेतन्याहू के लिए क्या है मुसीबत

अब बात करते हैं उस बारूद के ढेर यानी सेना में भर्ती वाला कानून की जिसने नेतन्याहू की सरकार को हिलाया है। इजराइल में एक नियम है कि हर नागरिक चाहे लड़का हो या लड़की उसे दो से तीन साल तक इजराइल के डिफेंस फोर्स में देश की सेवा करनी ही होगी। लेकिन 1948 से इजराइल के अतिरूढ़िवादी यानी हारेदी यहूदी को इससे छूट मिली हुई थी। वो सिर्फ धार्मिक पढ़ाई करते थे और उन्हें सेना में नहीं जाना पड़ता था। लेकिन 7 अक्टूबर के हमलों और लगातार चल रहे बहु मोर्चे के युद्ध के बाद इजराइल की सेना थक चुकी है। सेना के चीफ ने साफ कह दिया कि अब हमें और सैनिक चाहिए और यह भेदभाव नहीं चलेगा। इजराइल की सुप्रीम कोर्ट ने भी आदेश दे दिया कि रूढ़िवादी यहूदियों को भी सेना में भर्ती होना पड़ेगा। फॉरेन पॉलिसी की रिपोर्ट के मुताबिक इजराइल की आम जनता इस बात से बेहद गुस्से में है और वह पूछ रहे हैं कि हमारे बच्चे सीमा पर जान दें और यह कुछ लोग घर में बैठकर सिर्फ पूजा क्यों करें? 72% इजराइली चाहते हैं कि सबके लिए सेना का नियम बराबर होना चाहिए। लेकिन नेतन्याहू की कुर्सी जिन पार्टियों के दम पर टिकी है जैसे शास और यूनाइटेड टोरा जुडाइज्म वो कट्टर धार्मिक पार्टियां हैं। उन्होंने नेतन्याहू को धमकी दी है कि अगर हमारे बच्चों को सेना में भेजा गया तो हम सरकार गिरा देंगे। 

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सर्वे ने उड़ाई नेतन्याहू की नींद


दक्षिणपंथी नेता ऑफर विंटर ने साफ कह दिया है कि वह चुनाव के बाद राष्ट्रपति से नेतन्याहू को पीएम बनाने की सिफारिश तो कर देंगे लेकिन वह उनकी सरकार का हिस्सा नहीं बनेंगे जब तक सेना में भर्ती का कानून पूरी तरह लागू नहीं होता। दूसरी तरफ द जेरुशसलम पोस्ट की तरफ से शेयर किए गए मारिव के लेटेस्ट पोल के नतीजे नेतन्याहू के लिए नींदें उड़ाने वाले हैं। इस सर्वे के मुताबिक 48% इजराइली जनता मानती है कि पूर्व सेना प्रमुख गादी आयदन कोर्ट नेतन्याहू से बेहतर प्रधानमंत्री साबित होंगे। आयदन कोर्ट की पार्टी याशार लगातार मजबूत भी हो रही है।

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गाजा में बदलेंगे हालात


गाजा में युद्ध, वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियों का विस्तार और फिलिस्तीनियों के लिए अलग देश बनाने का सवाल। लंबे समय से विवाद की वजह बने हुए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर नेतन्याहू की जगह विपक्षी नेता सत्ता में आते हैं तो फिलिस्तीनियों के लिए कुछ मामलों में हालात संभालने की कोशिश हो सकती है। लेकिन फिलिस्तीन को एक अलग देश बनाने के सवाल पर बड़े बदलाव की उम्मीद कम नजर आती है। हालांकि नए प्रधानमंत्री के आने पर सैन्य कारवाई का तरीका कूटनीति का इस्तेमाल और अमेरिका के साथ बातचीत की रणनीति बदल सकती है। यानी बदलाव हो सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि दोनों देशों के बीच तनाव खत्म हो जाएगा। इजराइल में सत्ता परिवर्तन का असर सिर्फ ईरान और फिलिस्तीन तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर अमेरिका के साथ उसके रिश्तों और पूरे मिडिल ईस्ट की राजनीति पर भी पड़ सकता है। 

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JIO IPO Updates: 28 अक्टूबर को होगी Jio IPO की लिस्टिंग! | Reliance Jio IPO | Share Market News

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  Sports

New Zealand को हराकर Team India ने रचा इतिहास, T20I में 200 जीत दर्ज करने वाली पहली टीम बनी

भारतीय क्रिकेट टीम ने न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में जीत दर्ज करने के साथ ही एक ऐसा रिकॉर्ड बना दिया है, जो इससे पहले पुरुषों की किसी भी टीम के नाम नहीं था। भारत टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 200 जीत हासिल करने वाली दुनिया की पहली टीम बन गई है। यह मुकाबला भारतीय टीम का 300वां टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच भी था। इस तरह भारत पाकिस्तान के बाद 300 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली दूसरी टीम बन गया है।

क्राइस्टचर्च में खेले गए इस मुकाबले में भारतीय टीम के लिए जीत आसान नहीं रही। पिच पर बल्लेबाजी करना मुश्किल था और लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत एक समय दबाव में नजर आ रहा था। हालांकि, तिलक वर्मा और नीतीश कुमार रेड्डी ने आखिरी ओवरों में शानदार बल्लेबाजी करते हुए मैच का रुख बदल दिया। दोनों ने 30 गेंदों पर नाबाद 69 रन की साझेदारी की और भारत को 1 गेंद बाकी रहते जीत दिला दी।

इस जीत के साथ भारतीय टीम ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी मजबूत स्थिति को और बेहतर किया है। ईएसपीएनक्रिकइन्फो के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने अब तक खेले गए 300 मुकाबलों में से 200 में सीधे जीत हासिल की है, जबकि उसे 83 मैचों में हार का सामना करना पड़ा है। भारत का जीत-हार अनुपात 2.409 रहा है, जो सबसे ज्यादा टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेलने वाली शीर्ष 5 टीमों में सर्वश्रेष्ठ है। इतना ही नहीं, आईसीसी के 12 पूर्ण सदस्य देशों में भी भारत का यह अनुपात सबसे बेहतर है।

बता दें कि भारत की जीत की संख्या में सुपर ओवर के जरिए हासिल की गई 5 जीत और बॉल-आउट से मिली 1 जीत शामिल नहीं हैं। यानी सामान्य मुकाबलों में 200 जीत के अलावा भारत ने इन तरीकों से भी जीत दर्ज की है। इससे टी20 प्रारूप में भारतीय टीम के लगातार अच्छे प्रदर्शन का अंदाजा लगाया जा सकता है।

इस मुकाबले में भारतीय टीम ने एक और बड़ा रिकॉर्ड बनाया। पारी के आखिरी 5 ओवरों में भारत ने 68 रन बनाकर लक्ष्य हासिल किया, जो टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इस अवधि के दौरान लक्ष्य का पीछा करते हुए उसका सबसे बड़ा स्कोर है। इससे पहले भारत ने 2022 टी20 विश्व कप में मेलबर्न में पाकिस्तान के खिलाफ आखिरी 5 ओवरों में 60 रन बनाए थे।

तिलक वर्मा और नीतीश कुमार रेड्डी की साझेदारी भी रिकॉर्ड बुक में दर्ज हो गई है। 7वें विकेट या उससे नीचे के लिए भारत की ओर से यह सबसे बड़ी नाबाद साझेदारी है। इससे पहले 2019 में हैमिल्टन में न्यूजीलैंड के खिलाफ दिनेश कार्तिक और क्रुणाल पांड्या ने 7वें विकेट के लिए नाबाद 63 रन जोड़े थे।

गौरतलब है कि भारत ने पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में 226 रन का लक्ष्य हासिल करके जीत दर्ज की थी। अब 2 मैचों में लगातार जीत के साथ भारतीय टीम 5 मैचों की इस सीरीज में 2-0 से आगे है। तीसरा मुकाबला वेलिंगटन, चौथा ऑकलैंड और आखिरी मैच हैमिल्टन में खेला जाएगा।

टी20 श्रृंखला के बाद दोनों टीमें 4 नवंबर से शुरू होने वाली 5 मैचों की एकदिवसीय सीरीज में आमने-सामने होंगी। इसके बाद 19 नवंबर से 2 मैचों की टेस्ट श्रृंखला खेली जाएगी। भारतीय टीम की नजर अब टी20 सीरीज में बढ़त को मजबूत करने और न्यूजीलैंड के खिलाफ जीत का सिलसिला जारी रखने पर है।

Sun, 25 Oct 2026 20:48:00 +0530

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